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सरयू राय के लेटर बम से आगे भी बड़ा विस्फोट होता हुआ नजर आ रहा है

  • जांच में आरोपों की हो गयी पुष्टि
  • भाजपा के नेताओं की भी होती थी जासूसी
  • अर्जुन मुंडा और कई अन्य नेताओं के फोन टैप
संवाददाता,

रांचीः सरयू राय के लेटर बम से आगे भी बड़ा विस्फोट होता हुआ नजर आ रहा है। श्री राय

ने जिन मुद्दों की जांच कराने की बात कही थी, उनकी जांच में उनके द्वारा लगाये गये

आरोप सही पाये गये हैं। यह पाया गया है कि अनधिकृत तौर पर स्पेशल ब्रांच का एक

कार्यालय गोंदा थाना के पास चलाया जाता था। वहां से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और

सरयू राय के अलावा भी करीब चार सौ लोगों के टेलीफोन टैप किये जाते थे। रिपोर्ट में इस

बात का उल्लेख है कि यह काम एडीजी स्तर के एक अधिकारी के निर्देश पर होता था।

इससे स्पष्ट है कि जांच में यह इशारा रघुवर दास के करीबी रहे एडीजी अनुराग गुप्ता की

तरफ है। वैसे इन मुद्दों पर चर्चा प्रारंभ होते ही अनधिकृत तौर पर कुछ खास वेब साइटों के

जरिए अनुराग गुप्ता की सफाई भी पेश की जाने लगी है।

मिली जानकारी के मुताबिक श्री राय द्वारा एसआइटी से पूरे मामले की जांच कराने की

मांग किये जाने के बाद डीजीपी एमवी राव ने इसकी जिम्मेदारी सीआईडी को सौंपी थी।

सीआईडी की जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने की चर्चा है। यह स्पष्ट कर दिया गया है

कि यह गैर कानूनी जासूसी मुख्यमंत्री रघुवर दास की जानकारी में थी। इसके तहत चार

सौ लोगों के खिलाफ यह जासूसी होती रही थी। चर्चा है कि जिन चार सौ से अधिक लोगों

की जासूसी की गयी है, उनके नाम भी डीजीपी को सौंप दिये गये हैं। साथ ही यह फिर से

स्पष्ट कर दिया गया है कि यह सारी कार्रवाई अनधिकृत थी। वैसे इस मामले पर पहले

चर्चा होने के बाद एडीजी अनिल पाल्टा ने इस कार्यालय को बंद कराया था।

सरयू राय के लेटर बम पर चुप्पी साधे बैठी है सरकार

लेकिन अब रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद भी सरकार और पुलिस की तरफ से इस पर

कोई टिप्पणी या सफाई नहीं दी गयी ह । दूसरी तरफ खुद श्री राय ने कहा कि खुफिया तंत्र

का दुरुपयोग पुलिस की व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्न चिन्ह करता है। यह

न्याय और अन्याय के बीच आम नागरिक के हक का भी मुद्दा है। दूसरी तरफ कुछ खास

वेबसाइटों के माध्यम से अनुराग गुप्ता की अनधिकृत सफाई भी जारी की गयी है। जिसमें

यह दावा किया गया है कि श्री गुप्ता ने इन तमाम आरोपों पर अपनी तरफ से हर कुछ को

झूठ और गलत बताया है। श्री गुप्ता ने एनआइए की जांच में सामने आये एक नाम मनोज

गुप्ता के साथ कोई परिचय नहीं होने की सफाई दी है।

श्री गुप्ता के इन्हीं बेवसाइटों के जरिए सफाई दी है कि वह किसी मनोज गुप्ता को नहीं

जानते हैं और ना कभी मिला हैं।

वैसे इस मामले की गाड़ी जिस तरफ धीरे धीरे आगे बढ़ रही है, उससे यह तय है कि जांच

आगे बढ़ने की स्थिति में रघुवर दास के करीबी समझे जाने वाले कुछ लोगों के अलावा

काफी संख्या में पत्रकार भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इन पत्रकारों के मामले में भी

लगातार यह आरोप लगता रहा है कि सीक्रेट सर्विस फंड के माध्यम से इन पत्रकारों की

मदद से भी जासूसी कराने की कोशिशें हुई थीं।


 

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