fbpx Press "Enter" to skip to content

सरना धर्म कोड की मांग पर राजधानी में हुआ प्रदर्शन

  • आदिवासियों की संख्या घटती जा रही

रांचीः सरना धर्म कोड की मांग पर आज राजधानी रांची में आदिवासी समुदाय के लोग

सड़कों पर उतरे। आदिवासियों का जनगणना फोरम में अपने धर्म कोड की मांग को लेकर

राजधानी रांची में विभिन्न आदिवासी संगठन के लोग रविवार को सड़क पर उतरे। उन्होंने

जगह-जगह मानव श्रृंखला बनाई। इसके माध्यम से झारखंड सरकार से यह मांग कि गई

कि चालू विधानसभा सत्र में ही आदिवासियों के अलग धर्म कोड के प्रस्ताव को पास कर

केंद्र सरकार को भेजा जाए। वहीं, सरना धर्मगुरु जयपाल उरांव ने कहा कि आदिवासियों

की धार्मिक-सामाजिक जमीन पर ही हमारा धर्म और अस्तित्व जुड़ा है। भारत सरकार

आदिवासियों के लिए सरना धर्म कोड लागू कराए वर्ना जनगणना होने नहीं देंगे।

मालूम हो कि इस मामले को लेकर लंबे वर्षों से झारखंड सहित पूरे देश में संघर्ष जारी है।

यह भी बताते चलें कि धर्म कोड को जनगणना फोरम में शामिल करने या ना करने का

अधिकार भारत सरकार की अनुशंसा पर रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया करती है। 12

करोड़ से अधिक निवास करने वाले प्राकृतिक पूजक आदिवासियों का धर्म कोड नहीं है।

आदिवासी संगठनों का कहना है कि अपना धर्म कोड नहीं होने के कारण 10 वर्ष में जब

जनगणना होती है तो प्रकृति आदिवासियों की गणना या तो ईसाई धर्म में कर दी जा रही

है या हिंदू में या अन्य में। इससे आदिवासियों की संख्या हर 10 साल में बढ़ने की बजाय

घटती जा रही है।

सरना धर्म कोड पर संगठनों की बड़ी स्पष्ट राय

आदिवासी संगठनों का कहना है कि 12 करोड़ से अधिक प्राकृतिक पूजक आदिवासियों का

धर्म कोड नहीं है। इधर, आदिवासी इंडीजिनियस धर्म समन्वय समिति, जय आदिवासी

केंद्रीय परिषद, आदिवासी छात्र मोर्चा व आदिवासी छात्र संघ की ओर से 20 सितंबर को

बिरसा चौक से विधानसभा तक मानव शृंखला बनाया जाएगा। इसमें कुरमी विकास मोर्चा

भी समर्थन करेगा। यह बातें कुरमी/कुड़मी विकास मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष शीतल

ओहदार ने कहीं। उन्होंने कहा कि झारखंड में आदिवासियों की राष्ट्रीय पहचान ट्राइबल

कॉलम सरना कोड 2021 की जनगणना प्रपत्र में अविलंब वर्णित किया जाना चाहिए

मांग को लेकर जारी किया समर्थन पत्र

सरना धर्म कोड विधानसभा सत्र में पारित कर केन्द्र सरकार को भेजने की मांग को लेकर

झारखंड छात्र संघ और अमया ने समर्थन पत्र जारी किया है। केंद्रीय संगठन प्रभारी मो

लतीफ आलम ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम से

मांग की है कि देश में निवास कर रहे करोड़ों से ज्यादा आदिवासी समुदाय को धार्मिक

पहचान और मान्यता दी जाए। केंद्रीय अध्यक्ष एस अली ने कहा है कि ब्रिटिश शासन में

प्रथम जनगणना प्रपत्र में आदिवासियों के लिए ट्राईबल रिलिजन कोड था, बाद में हटाया

गया।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from धर्मMore posts in धर्म »
More from रांचीMore posts in रांची »
More from राजनीतिMore posts in राजनीति »
More from लाइफ स्टाइलMore posts in लाइफ स्टाइल »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!