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सरयू राय का लेटर बम फिर फूटा तो गरमायी झारखंड की राजनीति

  • कांके रोड में अलग थे तैनात थे स्पेशल ब्रांच के अफसर

  • गोंदा थाना के बगल में था अवैध कार्यालय

  • नेताओं की फोन टैपिंग का काम सीआईडी से

  • ऊपर के आदेश के बिना ऐसा संभव नहीं था

  • पूरे मामले की एसआइ टी जांच की मांग

संवाददाता

रांचीः सरयू राय का लेटर बम से सुस्त पड़ी झारखंड की राजनीति में गरमी आती नजर आ

रही है। यूं तो पहले भी नेताओं की अवैध निगरानी की शिकायतें होती रही थी। इस बार

सरयू राय ने इस बारे में कुछ स्पष्ट तथ्यों की तरफ इशारा करते हुए जिम्मेदार लोगों के

खिलाफ कार्रवाई की मांग कर दी है। श्री राय के इस बयान के बाद पुलिस महकमा भी

सकते में हैं क्योंकि यह माना जाता है कि बगैर पुख्ता प्रमाण के श्री राय अनर्गल किस्म के

आरोप नहीं लगाया करते हैं। इसके पहले भी सरयू राय का लेटर बम से अनेक लोग

राजनीतिक तौर पर घायल होते रहे हैं। वैसे भी झारखंड की राजनीति में भाजपा के पराजय

में सरयू राय की प्रमुख भूमिका रही है। उन्हें भाजपा द्वारा टिकट नहीं दिये जाने का

नुकसान पार्टी को सिर्फ जमशेदपुर नहीं अन्य इलाकों में भी उठाना पड़ा है। अब फिर से

सरयू राय ने रघुवर दास को ही निशाने पर लिया है। अपने पत्र में उन्होंने इस पूरे मामले के

लिए विशेष जांच समिति के गठन की भी मांग कर दी है। इस मांग की वजह से कभी

रघुवर दास के प्रियपात्र रहे अफसरों में हड़कंप की स्थिति है। वैसे भी रघुवर दास के राज में

चर्चित रहे अफसर इनदिनों शंटिंग में हैं। इनमें से कुछ किसी तरह जान बचाकर केंद्रीय

प्रतिनियुक्ति में दिल्ली चले जाना चाहते हैं। रघुवर सरकार में स्पेशल ब्रांच के अफसर

नेताओं पर नजर रखते थे। ऐसा करने के लिए गोंदा थाना के बगल में स्पेशल ब्रांच का एक

अवैध कार्यालय खोला गया था। सीडब्लूसी, सदस्य बैजनाथ प्रसाद इस कार्यालय के संपर्क

सूत्र के रूप में काम करता था। 

सरयू राय का लेटर बम से कई अधिकारी सकते में

सरयू राय ने इस मामले पर पहले डीजीपी को चिट्ठी लिखी थी। एक अप्रैल को राज्य के

डीजीपी को चिट्ठी लिखने के बाद उन्होंने एक ट्वीट भी किया था। जिसमें साफ तौर से

इशारा रघुवर सरकार के दौरान पुलिसिया कार्यप्रणाली की तरफ था। सरयू राय ने

मुख्यमंत्री को लिखी चिटठी में कहा है कि रघुवर दास सरकार के समय विरोधी नेताओं के

मामले में स्पेशल ब्रांच के जरिये अवैध तरीके से निगरानी रखी जाती थी। किसी

जनप्रतिनिधि की निजी स्वतंत्रता के हनन के मामले में शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति की

सहमति के बिना ऐसे कुकृत्य को अंजाम देने की हिम्मत किसी वरीय पुलिस पदाधिकारी

की नहीं होगी। तत्कालीन भवन निर्माण विभाग के मंत्री तथा सचिव, डीजीपी, गृह सचिव

के सचिव को भी इसकी जानकारी जरूर होगी। श्री राय ने लिखा है कि उनके ऊपर नजर

रखने वाले विशेष शाखा के पुलिस कर्मी थे। साहेबगंज में संबंधित व्यक्ति के पकड़े जाने

पर उसने स्वीकारा था कि वो विशेष शाखा में इंस्पेक्टर है। मेरी सुरक्षा में तैनात स्पेशल

ब्रांच के इंस्पेक्टर मुंडा जी का बैचमेट है। उसने यह भी बताया था कि साहेबगंज में आपकी

गतिविधि की सूचना हर घंटे मांगी जा रही है।

राजभवन के सामने भी पकड़े गये थे स्पेशल विभाग के लोग

राजभवन के सामने नगावार हरकत करते हुए पकड़ाए सिपाही ने कबूला था कि वो विशेष

शाखा का सिपाही और अपने विभाग के डीआइजी के आदेश पर वो वीडियो रिकॉर्ड कर रहा

है। इन दोनों घटनाओं के बारे में उसी वक्त तत्कालीन डीजीपी को सूचित कर दिया गया

था। अब श्री राय ने लिखा है कि इस संबंध में जो नये तथ्य मिले हैं, वे चौंकाने वाले हैं।

रघुवर सरकार के निर्देश पर रांची के कांके रोड स्थित गोंदा थाना के पीछे एक भवन में

स्पेशल ब्रांच का एक अनाधिकृत कार्यालय था। जिसमें आठ कम्प्यूटर और आठ लोग

नियुक्त थे जो स्पेशल ब्रांच के थे। यहां पर रिकॉर्डिंग करने वाली संवेदनशील मशीनें भी

लगी थी। उस मकान से सटे हुए बैद्यनाथ प्रसाद का आवास था। जो उस समय चाइल्ड

वेल्फेयर कमेटी में कार्यरत थे और अभी भी हैं। वे इस कार्यालय के संपर्क सूत्र के रूप में

सक्रिय थे। उन्हें विशेष शाखा की ओर से दो अंगरक्षक मिले हुए थे। साथ ही दो चालक भी

दिया गया था। कार्यालय में डीएसपी स्तर के तीन अधिकारी नियुक्त थे। इस कार्यालय से

विभिन्न नेताओं की गतिविधि पर नजर रखी जाती थी और उनके फोन टैप होते थे। इसी

प्रकार की एक व्यवस्था सीआइडी मुख्यालय में भी की गयी थी। जिसके लिए स्पेशल ब्रांच

के 15 कर्मी नियुक्त थे। सरयू राय का यह लेटर बम पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके

खास पुलिस अधिकारी अनुराग गुप्ता सहित कौन से लोगों को घायल करता है, यह अब

आने वाले दिनों में देखने लायक बात होगी।


 

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