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सरहुल पूजा संथालों की सामाजिक एकता का पर्व है: बबीता

ललपनिया: सरहुल पूजा संथाल समुदाय की सामाजिक एकता का पर्व है। यह विचार

विधायक बबीता देवी ने व्यक्त किये। गोमिया प्रखंड क्षेत्र अन्तर्गत कंडेर पंचायत के

दरहाबेडा ग्राम स्थित जाहेर गढ़ में संथाल आदिवासी समाज के लोगों द्वारा बुधवारको

सरहुल पूजा धूमधाम से मनाया गया। समारोह में भारी संख्या में संथाल आदिवासी

समाज के महिला, पुरुष एवं बच्चे शामिल हुए। आदिवासी महिलाओं वं पुरुषों ने अपने

आस्था एवं विश्वास के साथ जाहेरगढ़ में फूलों की वर्षा करके पराम्परागत प्राकृति देवी-

देवताओं की पूजा-अर्चना कर अपने सपरिवारों एवं गांव की सुख-शांति मंगलकामनाएं की।

इस अवसर पर समारोह के बतौर मुख्य अतिथि गोमिया क्षेत्र की पूर्व विधायक बबीता देवी

एवं विशिष्ट अतिथि झामुमो के नेता चित्रगुप्त महतो शामिल होकर जेहरा स्थल में पूजा-

अर्चना कर देवी-देवताओं के आगे माथा टेक क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि व उन्नति की

कामना की।मौकेपर मुख्य अतिथि पूर्व विधायक बबीता देवी ने अपने संबोधन में कहा कि

सरहुल पर्व में विशुद्ध रूप से संथाल आदिवासी समाज के हर लोग प्रकृति की पूजा करते है।

जो सरहुल पर्व सामाजिक एकता एवं संथालो की सृष्टि करने वाले देवताओं की पूजा है।

आदिवासियो की इस संस्कृति पर्यावरण को बचाए रखना सभी का धर्म है। तत्पश्चात

मुख्य अतिथि पूर्व विधायक,विशिष्ट अतिथि ने संथाल आदिवासी महिलाए व युवतियोंके

साथ अखाड़े में गीत-नृत्य की। इसके पूर्व समाज के लोगो ने मुख्य अतिथि पूर्व विधायक

बबीता देवी विशिष्ट अतिथि चित्रगुप्त महतो के आगमन पर बुक्के देकर एवं माला

पहनाकर स्वागत की। समारोह में झामुमो नेता तेजलाल महतो, दिनेश कुमार मुर्मू,

राजेन्द्र महतो, जितेन्द्र मरांडी, रतन मांझी, रामु मांझी, एतवा मांझी, चितरंजन टुडू सहित

सैकड़ों लोग उपस्थित थे।


 

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