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संस्कृत दिवस पर संस्कृत कौशल अभ्युदय प्रतियोगिता का आयोजन

  • उपेक्षा के कारण घटा संस्कृत का महत्व : आचार्य लीलेश्वर

रांचीः संस्कृत दिवस पर श्री अग्रसेन स्कूल, भुरकुंडा के द्वारा संस्कृत कौशल अभ्युदय

ऑनलाइन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में चार प्रकार की

स्पर्धाओं का आयोजन हुआ। गायन कौशल में ‘त्वमेव माता च पिता त्वमेव’ मंत्र के पूरे

पाठ का लयबद्ध उच्चारण करने, लेखन कौशल में ‘शिक्षा का जीवन में महत्व’ विषय पर

संस्कृत में छह-आठ पंक्तियां बोलने, वाचन कौशल में कोविड-19 से संबंधित हमारे

स्वास्थ्य सहायकों का हौसला बढ़ाने के लिए संस्कृत में शुभकामना संदेश, नृत्य

कौशल में किसी संस्कृत गीत पर नृत्य का वीडियो बनाकर भेजने को कहा गया था।

क्लास छह से आठ तक के प्रतिभागियों ने  की इस प्रतियोगिता में रुचिपूर्वक

हिस्सा लेते हुए अनेकों वीडियो प्रेषित किया। प्रतियोगिता में समृद्धि कुमारी, अर्णव

सरकार, आर्यन कुमार, डेनियल मेहरा को क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ पुरस्कार

मिला। इस अवसर पर  शिक्षक आचार्य लीलेश्वर पांडेय ने बच्चों को इसकी

महत्व समझाया। श्री पांडेय ने कहा कि  भारत देश की सबसे प्राचीन भाषा

है। प्राचीन ग्रन्थ, वेद आदि की रचना भी संस्कृत में ही हुई थी। यह भाषा बहुत सी भाषाओं

की जननी है। महाभारत काल में वैदिक संस्कृत का प्रयोग होता था। लेकिन उपेक्षा के

कारण आज देश की कम बोले जानी वाली भाषा बन गई है। प्राचार्य आरके

रॉय ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्द्धन करते हुए कहा कि इसकी महत्ता से कोई इनकार

नहीं कर सकता है। इस भाषा के अभ्यास से हमें दूसरी भाषा को भी सिखने बोलने में मदद

मिलती है।

संस्कृत दिवस श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है

भारत में संस्कृत दिवस श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन को इसीलिए

चुना गया था कि इसी दिन प्राचीन भारत में शिक्षण सत्र की शुरुआत होती थी। आज

इसकी व्यापक प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है। आयोजन को सफल बनाने में

दीपिका तिवारी, सरोज गुप्ता, सरिता कुमारी आदि का योगदान रहा।


 

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