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जरूरत से ज्यादा नमूना लादकर ओसिरिस रेक्स परेशानी में है




  • पृथ्वी पर लौटते यान से गिर रहे हैं बेन्नू के नमूने

  • रोबोट आर्म दस फीट लंबा था इस यान का

  • चोट से उम्मीद से कहीं अधिक कण टूट गये

  • कई प्रयोग छोड़े गये ताकि उसमें नमूना बचा रहे

राष्ट्रीय खबर

रांचीः जरूरत से ज्यादा नमूना यह अंतरिक्ष यान एकत्रित कर लेगा, इसकी कल्पना

वैज्ञानिकों ने नहीं की थी। उल्कापिंड पर जब इसका दस फीट लंबा हाथ अंदर गया तो एक

बहुत बड़ा पत्थर ही पूरी तरह टूट गया। इसका नतीजा यह हुआ कि जिस उपकरण में

नमूना एकत्रित होना था, उसके बाहर भी ढेर सारे नमूने यानी उल्कापिंड की मिट्टी के कण

चिपक गये। यह तय था कि सिर्फ साठ ग्राम नमूना लेकर ही यान को वापस लौटना है।

अब पता चल रहा है कि उसमें कई सौ ग्राम से अधिक नमूना आ गया था। इस अधिक

नमूने की वजह से उस अंतरिक्ष यान का एक इलाका ठीक से बंद नहीं हुआ है और वहां से

नमूने बाहर गिर रहे हैं। अब वैज्ञानिक इस परेशानी को दूर करने की तैयारियों में जुटे हैं।

इसके लिए आगामी 1 नवंबर तक काम पूरा कर लेना है। जिस उपकरण में नमूना एकत्रित

किया गया है, उसे मुख्य यान में एक कैप्सूल की तरह बंद कर देना था। उसका कोई हिस्सा

खुल रह जाने की वजह से ऐसा अब तक नहीं किया गया है।

जरूरत से ज्यादा नमूना लिया तो यान पूरा बंद नहीं हुआ

उल्कापिंड बेन्नू पर सफलतापूर्वक उतर गया अंतरिक्ष यान ओसिरिज रेक्सइस शोध से जुड़े यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोयाना के मुख्य वैज्ञानिक दांते लाउरेट्टा ने बताया

कि इतनी दूरी पर सब कुछ ठीक ही चला था। यान में लगे कैमरे से उल्कापिंड पर उसके

उतरने तथा नमूना संग्रह करने की कार्रवाई को भी देखा गया था। अब यान की वापसी

यात्रा में जब और आंकड़े पृथ्वी स्थित नियंत्रण कक्ष तक पहुंचे तब जाकर पता चला कि

दरअसल उल्कापिंड उतना मजबूत नहीं था, जिसका आकलन था। इस वजह से यान का

रोबोट आर्म ने जब उसपर नमूना लेने के लिए धक्का मारा तो आवश्यकता से काफी

अधिक कण टूट गये। उनके मुताबिक अभी शायद यान में चार सौ ग्राम से अधिक नमूना

रह गया है।

इसी वजह से कोई एक हिस्सा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। इसे बंद कर मूल नमूना के पात्र

को कैप्सूल के जैसा मुख्य यान तक पहुंचाना है। लाउरेट्टा कहते हैं कि यह दरअसल

अभियान की सफलता की अपनी परेशानी है। उल्कापिंड की सतह कितनी मजबूत अथवा

कमजोर है, इस बारे में कोई आकलन नहीं था। दस फीट लंबा रोबोट बाह ने जब उस पर

धक्का मारा जो अनुमान से अधिक की चोट से अनेक हिस्से टूट गये। नासा के इस मिशन

के मुख्य वैज्ञानिक थॉमस जुबुचेन ने कहा कि अभी समय ही सबसे अधिक कीमती मुद्दा

है। इसलिए यान और नमूनों को सुरक्षित करने का काम चल रहा है।

सौरमंडल अनुसंधान से जुड़ा है यह अंतरिक्ष अभियान

यह फिर से बता दें कि दरअसल इस उल्कापिंड के नमूने इसलिए भी एकत्रित किये गये हैं

ताकि इसके अनुसंधान से इस सौर जगत की संरचना के बारे में अधिक जानकारी मिल

सके। खरबों वर्ष पूर्व कैसे यह सारी सृष्टि बनी थी, उसके काफी प्रमाण बेन्नू उल्कापिंड के

मिट्टी के नमूनों से मिल सकता है। इस काम को अंजाम देने के लिए ही आठ सौ मिलियन

डॉलर की यह योजना संचालित की गयी है। वहां के नमूना संग्रह करने के बाद यान लौट

रहा था। उसके वर्ष 2023 तक पृथ्वी पर लौट आने की उम्मीद है। यान से नमूना लीक होने

की वजह से वैज्ञानिक अनुसंधान के कुछ कार्यक्रमों में बदलाव करना पड़ा है। ऐसा इसलिए

किया गया है ताकि और अधिक नमूना इसमें से बाहर ना गिरे। उधर जापान का एक

अंतरिक्ष यान भी एक दूसरे उल्कापिंड से दूसरी बार नमूना लेकर लौट रहा है। उसके भी

दिसंबर तक पृथ्वी पर वापस आने की सूचना है।

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