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सज्जन कुमार की जमानत याचिका की सुनवाई जुलाई तक टली

नयी दिल्लीः सज्जन कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई फिर जुलाई तक टल गयी

है। सन् 1984 के सिख विरोधी दंगे से जुड़े मामले के दोषी पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार

को बुधवार को उच्चतम न्यायालय से एक बार फिर निराशा हाथ लगी, क्योंकि उसने

उनकी अंतरिम जमानत पर कोई आदेश जारी करने के बजाय उसे लंबित रखा। मुख्य

न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की

पीठ ने सज्जन कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह की दलीलें सुनने के

बावजूद जमानत अर्जी पर जुलाई महीने में सुनवाई करने का निर्णय लिया। न्यायालय ने

हालांकि सुनवाई की कोई निश्चित तारीख फिलहाल निर्धारित नहीं की है। राजधानी के

तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते

हुए अंतरिम जमानत आदेश जारी करने का न्यायालय से अनुरोध किया था। सज्जन

कुमार के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल की जमानत याचिका लंबित है। इस

मामले में वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई नहीं की जा सकती, इसलिए उन्हें अंतरिम

जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सज्जन कुमार की

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में स्वास्थ्य जांच करायी गयी है और उन्हें

फिर तिहाड़ जेल ले जाया गया है। सज्जन कुमार के वकील ने दलील दी कि उनके

मुवक्किल को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है, लेकिन बीमारी के कारण

उनकी मौत हो जाती है और यह सजा स्वत: ‘मृत्युदंड’ के समान हो जायेगी।

सज्जन कुमार के वकील ने दी अपनी नई दलील

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे मुवक्किल को कोविड 19 महामारी के कारण एम्स नहीं ले जाया

जायेगा और कल यदि उनकी मौत हो जाती है तो यह उनके लिए मृत्युदंड के समान हो

जायेगा।’’ उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को कम से कम अंतरिम जमानत का आदेश

दिया जाना चाहिए। इसका सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह कहते हुए पुरजोर

विरोध किया कि याचिकाकर्ता नरसंहार के दोषी है और उन्हें जमानत पर रिहा करने का

आदेश नहीं दिया जाना चाहिए। उनकी इस दलील का कुछ दंगा पीड़ितों के परिजनों की

ओर से पेश वकील दुष्यंत दवे ने भी किया। न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा कि उन्होंने

याचिकाकर्ता की एम्स की सात मार्च की मेडिकल रिपोर्ट देखी है और रिपोर्ट के अनुसार

उन्हें अभी अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी वह

जमानत याचिका को लंबित रखना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने जमानत याचिका की

सुनवाई जुलाई में करने का निर्णय लिया। हालांकि कोई निर्धारित तिथि नहीं बतायी गयी

है। इससे स्पष्ट नहीं है कि आखिर सुनवाई कब होगी।


 

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