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सेल का घाटा एवं मुनाफा कभी भी वेतन समझौता का आधार नहीं रहा: बीडी प्रसाद

बोकारो: सेल में वेतन समझौता के मुद्दे पर प्रदर्शन आज भी हुआ। मजदूरों का वेज

रीविजन तत्काल करने, एजेसीएस समझौता का सम्मान करते हुए सेल पेंशन योजना में

वेतन का 6 प्रतिशत अंशदान, लिव इन्कैशमेंट बहाल करने, ठेका मजदूरों की मजदूरी

18000 प्रति माह करने, ग्रैच्युटी, लॉकडाउन अवधि की मजदूरी ठेका मजदूर को देने, मृत

कर्मचारी के आश्रितों को नौकरी देने, बीजीएच में लचर चिकित्सा व्यवस्था को ठीक करने,

आदि मांगो को लेकर सीआईटीयु के आहवान पर बुधवार को इस्पात मजदूर मोर्चा (सीटू)

द्वारा बोकारो स्टील प्लांट के ईडी (वर्क्स) विल्डिंग के पास जुझारू मजदूर प्रदर्शन किया

गया। सैकङो की संख्या में मजदूरों ने भाग लिया। अपनो मांगों के लिए जोरदार नारेबाजी

कर प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश प्रदर्शित किया। मजदूरों को संबोधित करते हुए युनियन के

महामंत्री बीडी प्रसाद ने कहा वर्ष 1970 से लेकर आजतक दसवें वेतन समझौता

एनजेसीएस के माध्यम से सेल मजदूरों के लिए हुआ है, लेकिन सेल का घाटा एवं मुनाफा

कभी भी वेतन समझौता का आधार नहीं रहा है। आने वाले दिनो में मजदूरों के लिए यह

खतरे की घंटी साबित होगी। सरकार की यह नीति मजदूरों को साफ संदेश देती है कि अब

मजदूरों के वेतन, भत्ता, और फ्रिंज बेनिफीट हमेशा घटता या बढता रहेगा। मतलब बहुत

स्पष्ट है कि न तो मजदूर का वेतन-भता सुरक्षित है नहीं तो खुद मजदूर सुरक्षित है। वर्ष

2011 से 2020 तक दस वर्षों में सेल कुल 19437.50 करोड रूपये का शुद्ध मुनाफा कमाया

है। वर्ष 2016-17-18 में क्रमश 43337, 47,220 और 58297 प्रति वर्ष करोड़ रूपये का सेल

का कुल कारोबार रहा है। इतना हीं नहीं वर्ष 16-17-18 में सेल कुल 8496 करोड रूपये केंद्र

सरकार के खजाने में दिया है।

सेल घाटे में था को सरकार को इतने पैसे क्यों दिये

सेल घाटे में था तो फिर सरकार सेल से इतनी बड़ी राशि अपने खजाने में क्यों लिया ?

मजदूरों का वेज रिविजन की बात होगी तो सेल घाटे में है। मजदूर इसे नहीं मानेगा। सेल

में घाटे के नाम पर एनजेसीएस समझौता का अवमानना करते हुए सेल पेंशन फंड में

प्रबंधन वेतन का 6 प्रतिशत की जगह सिर्फ 2 प्रतिशत अंशदान हीं देने का निर्णय ले लिया

है। प्रबंधन का यह कदम मजदूरों की सुविधा में कटौती करना है। ठेका मजदूर चमकता

हुआ इस्पात पैदा करता है। मगर मजदूरी के नाम पर राज्य सरकार की न्यूनतम मजदूरी।

वाजिब मजदूरी मांगने पर प्लांट से बाहर कर दिया जाता है। सरकारी एडवाइजरी के

बावजूद लॉकडाउन अवधि की मजदूरी ठेका मजदूर को नही दिया जा रहा है। उन्होनें कहा

कि ऐसी परिस्थित में इस बार वेतन समझौता काफी कठिन होने जा रहा है। सही-सही

वेजरिवीजन के लिए मजदूरों को कोयला मजदूरों की तरह जुझारू आन्दोलन के लिए

तैयार होना पङेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता आरएन सिंह ने किया। सभा को आरके गोरांई,

महेश प्रसाद सिंह, पवन कुमार, पीआर साहु, देव कुमार, अनिल सिंह, एसके पासवान,

अर्जुन दास, सुरेश साव, बृजमोहन प्रसाद आदि ने भी संबोधित किया

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