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डीजीपी के लिए एसके सिंघल के नाम पर सरकार ने मुहर लगायी




  • तीन नामों का पैनल भेजा गया था दिल्ली

  • अब तक प्रभारी डीजीपी के तौर पर थे वह

  • भाजपा और जदयू नेतृत्व की सहमति बनी

दीपक नौरंगी

भागलपुरः डीजीपी के लिए एसके सिंघल को ही बिहार सरकार ने चुना है। अब श्री सिंघल

बिहार में प्रभारी डीजीपी के बदले स्थायी डीजीपी के तौर पर काम करेंगे। बिहार

विधानसभा चुनाव निपटने और नीतीश कुमार के फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही

लोगों की नजर इस पर लगी हुई थी।

वीडियो में जान लीजिए संक्षिप्त विवरण

दरअसल चुनाव के ठीक पहले अचानक गुप्तेश्वर पांडेय की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की

वजह से बिहार सरकार को आनन फानन में प्रभारी डीजीपी का चयन करना पड़ा था। वैसे

श्री सिंघल के चयन में कई वरीय प्रशासनिक अधिकारियों को शायद आपत्ति थी क्योंकि

उनके स्थान श्री सिंघल के रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं। लेकिन दोबारा सरकार में आने के बाद

नीतीश कुमार की सरकार ने स्थायी डीजीपी के लिए तीन नामों का पैनल केंद्र को भेजा

था। इस पैनल को भेजे जाने के बाद अंदरखाने में कई किस्म की राजनीति भी हुई थी। इस

दौरान ही एक अन्य डीजी और आईपीएस अधिकारी अरविंद पांडेय को दो दशक से अधिक

पुराने एक मामले में दंडित करने का फैसला आया था। इस फैसले की भी काफी आलोचना

हुई थी और कई स्तरों पर यह माना गया था कि यह आईपीएस लॉबी की आंतरिक

राजनीति का परिणाम है। वरना 23 वर्ष पुराने पलामू जिला के एक बीडीओ की नक्सलियों

द्वारा हत्या किये जाने के मामले में इतने दिनों के बाद फैसला आने का कोई पूर्व रिकार्ड

नहीं था।

डीजीपी के लिए नामों के चयन अरविंद पांडेय के खिलाफ फैसला

जब इस पैनल को तैयार किया जा रहा था तो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात कई

अधिकारियों के नामों की चर्चा भी हुई थी। वह 1985 बैच के एकमात्र अफसर थे। 1986 बैच

में राकेश कुमार मिश्रा, शीलवर्धन सिंह और अशोक कुमार वर्मा था। 1987 बैच के

आइपीएस अधिकारियों में  दिनेश सिंह बिस्ट, सुनील कुमार, गुप्तेश्वर पांडेय और ए सेमा

राजन का नाम है। उसके बाद 1988 बैच में अरविंद पांडेय, एसके सिंघल और मनमोहन

सिंह हैं। अगले यानी वर्ष 1989 बैच में अकेले अधिकारी आलोक राज थे। लिहाजा यह

चयन बिहार के लिए उपलब्ध अफसरों के बीच ही होना था। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय

प्रतिनियुक्ति में चल रहे कई अफसरों ने बिहार लौटने से इंकार कर दिया था। इसी वजह से

जब अरविंद पांडेय के खिलाफ कार्रवाई हुई तो इसे वरीयता क्रम के आधार पर हुई

राजनीति का एक हिस्सा समझा गया था। इतना कुछ होने के बाद भी अंततः बिहार से जो

पैनल भेजा था, उसमें से अब एसके सिंघल को ही स्थायी डीजीपी बनाने का फैसला लिया

जा चुका है। श्री सिंघल को स्थायी डीजीपी बनाये जाने संबंधी सरकारी अधिसूचना आज

की तिथि से जारी कर दी गयी है।



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