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रुस की दूसरी वैक्सिन का दूसरा अनुमोदन इसी सप्ताह होगा

  • इस वैक्सिन में बुखार भी नहीं आया है

  • आठ सितंबर को छोड़े गये स्वस्थ स्वयंसेवक

  • 40 हजार पर प्रथम वैक्सिन का ट्रायल जारी है

  • तीसरे चरण का वैश्विक क्लीनिकल ट्रायल नवंबर दिसंबर में

मॉस्कोः रुस की दूसरी वैक्सिन के सफल साबित होने के बाद अब इसी सप्ताह इसके

दूसरे चरण की शुरुआत करने का एलान कर दिया गया है। इंसानों पर हो रहे परीक्षणों में

यह सफल बताया गया है। घोषणा के मुताबिक 15 अक्टूबर को यह दूसरा वैक्सिन जारी

कर दिया जाएगा। इसे वेक्टर स्टेट रिसर्च सेंटर में तैयार किया गया है। पहला वैक्सिन

वहां के गामालेई संस्थान में तैयार किया गया था। इस वैक्सिन के वैश्विक क्लीनिकल

ट्रायल की तैयारियां होने लगी हैं। बताया गया है कि वैक्सिन को औपचारिक तौर पर

मान्यता देने के बाद नवंबर और दिसंबर माह में इसका वैश्विक परीक्षण प्रारंभ कर दिया

जाएगा। रुस की इस दूसरी वैक्सिन को एपिवैककोरोना वैक्सिन नाम दिया गया है। इस

बारे में सरकारी स्तर पर औपचारिक घोषणा कर दी गयी है। इस दूसरी वैक्सिन के

परीक्षण की अनुमति 27 जुलाई को दी गयी थी। पिछले आठ सितंबर को इस वैक्सिन के

परीक्षण में शामिल होने वाले बीस स्वयंसेवकों को स्वस्थ हालत में अस्पताल से छोड़ा

गया है। परीक्षण में इसके पूरी तरह सफल होने की जानकारी दी गयी है। साथ में यह भी

बताया गया है कि स्वयंसेवकों को इस वैक्सिन से न तो बुखार आया है और ना ही कोई

दूसरी परेशानी हुई है। रुस के मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सक डॉ एना पोपोवा ने यह बात कही

है।

रुस की दूसरी वैक्सिन के बारे में आधिकारिक घोषणा

इतना सब कुछ होने के बाद इसके तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में तीस हजार

स्वयंसेवकों को शामिल किया जाने वाला है। इसके साथ ही इसके वैश्विक परीक्षण की

तैयारियां भी चल रही हैं। रुस की इस वैक्सिन का परीक्षण फिलहाल फेडरल सर्विस फॉर

सर्विलेंस की देखरेख में चल रहा है। यह संस्था उपभोक्ता हितों के संरक्षण पर काम करती

है। अगले सप्ताह इसके रजिस्ट्रेशन का काम पूरा होने के बाद परीक्षण में बीस साल से

साठ साल तक के लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा। जिनलोगों को गंभीर किस्म की

बीमारियां हैं, वे भी इसके दायरे में रहेंगे। सभी की सेहत की जांच डाक्टरों द्वारा नियमित

तौर पर की जाएगी। याद रहे कि इससे पहले ही रुस ने स्पूटनिक पांच नाम का एक

वैक्सिन उतारा है। अभी उस वैक्सिन के अंतिम चरण का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है।

इस प्रथम वैक्सिन के तीसरे चऱण के ट्रायल में चालीस हजार स्वयंसेवक हिस्सा ले रहे हैं।

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