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संयुक्त राष्ट्र में पहली बार रुस के विदेश मंत्री ने औपचारिक बयान दिया




रुस ने कहा कि माली ने निजी सैना की मदद मांगी थी
फ्रांस ने इसी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है
माली ने कहा फ्रांस ने हमें मंझधार में छोड़ा

संयुक्त राष्ट्रः संयुक्त राष्ट्र में पहली बार रुस के विदेश मंत्री ने माली में रुस की निजी सेना का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि माली देश की सरकार ने अपनी यहां की बिगड़ती परिस्थितियों को संभालने के लिए रुस से निजी सेना उपलब्ध कराने का आग्रह किया था।




उल्लेखनीय है कि इसी निजी सेना के मुद्दे पर फ्रांस ने वहां के सैन्य शासन को इसके गंभीर परिणाम होने की चेतावनी दी थी। संयुक्त राष्ट्र में रुस के विदेश मंत्री सेरेगेइ लावारोब ने कहा कि माली में रुस की निजी सेना वहां की सेना के लिए बहाली, प्रशिक्षण की जिम्मेदार निभाने जाएगी।

उम्मीद है कि शीघ्र ही औपचारिक तौर पर इस मुद्दे पर समझौता भी हो जाएगा। जिसके तहत रुस की वागनगर समूह की तरफ से निजी सेना माली को उपलब्ध करायी जाएगी। फ्रांस ने माली के इस कदम को खतरनाक बताते हुए इससे परहेज करने की चेतावनी दी है।

फ्रांस का कहना है कि इस इलाके में फ्रांस की सेना के मौजूद होने के बीच ही रुस की निजी सेना को इस तरीके से वहां लाना नये खतरे को आमंत्रित करने जैसा ही है। संयुक्त राष्ट्र में अपनी बात रखते हुए रुस के विदेश मंत्री ने कहा कि माली की सरकार ने यह मदद मांगी है।




वहां जारी आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए वहां की सरकार द्वारा मांगी गयी मदद उन्हें उपलब्ध करायी जा रही है। दूसरी तरफ माली की सरकार की इस कार्रवाई के बाद फ्रांस भी अपने अन्य सहयोगियों को जोड़कर वहां अपनी सैन्य उपस्थिति और मजबूत बनाने का काम कर ही है। वहां के बरखाने मिशन में पांच हजार लोगों को तैनात किया जा रहा है। यह सभी उत्तरी बाली के इलाको में तैनात किये जा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में पहली बार बयान के बीच फ्रांस की दूसरी तैयारी

माली के सैन्य शासन ने फरवरी 2022 मे वहां चुनाव कराने की बात कही है। संयुक्त राष्ट्र में इस विवाद पर माली के प्रधानमंत्री चोगुएल मैइगा ने कहा कि फ्रांस ने माली को लगभग अकेला छोड़ दिया था।

इसी वजह से मजबूरी में रुस की निजी सेना की मदद का रास्ता तलाशना पड़ा है। उनके मुताबिक देश को अपनी सुरक्षा के लिए बेहतर विकल्पों की तलाश करने की आजादी है और माली की सरकार वैसा ही करने जा रही है। ताकि फ्रांस के नहीं होने की स्थिति में भी देश में आतंकवाद को पैर पसारने का मौका नहीं मिले।



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