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कजाखिस्तान में भीषण दंगा के बाद रुसी सेना वहां पहुंची




आलमातीः कजाखिस्तान में अब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने के बाद रुसी सेना वहां पहुंच चुकी है। दोनों देशों के बीच पहले से ही यह सैनिक समझौता कायम है। बताया जाता है कि देश के राष्ट्रपति के अनुरोध पर रुस ने यह कदम उठाया है।




इस बीच यह जानकारी भी आ रही है कि सरकार विरोधी और सुरक्षा बलों के बीच हुए टकराव में अनेक लोग मारे गये हैं। इनमें दो दर्जन से अधिक सुरक्षाकर्मी भी हैं। तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के विरोध में पिछले कुछ दिनों से वहां लगातार आंदोलन और विरोध प्रदर्शन चल रहा था।

इसके बीच ही अचानक यह आंदोलन हिंसक हो गया और लोगों ने पुलिस पर हमला करना प्रारंभ कर दिया। उसके बाद से स्थिति धीरे धीरे नियंत्रण से बाहर होती चली गयी। देश के सबसे बड़े शहर आलमाती में जोरदार गोलीबारी की सूचना के बाद इससे संबंधित कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया में शेयर किये गये हैं।

पश्चिमी देशों ने वहां शांति बनाये रखने की अपील की है। दूसरी तरफ कजाखिस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट इसके लिए विदेश में प्रशिक्षण पा चुके आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। वैसे वहां विदेशी आतंकवादियों के होने का कोई प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है।




कजाखिस्तान के राष्ट्रपति ने मदद की अपील की थी

बुधवार की रात स्थिति अत्यधिक गंभीर होने के बाद राष्ट्रपति ने सीएसटीओ संगठन से मदद की गुहार लगायी थी। इस सीएसटीओ संगठन में रुस और कजाखिस्तान के अलावा बेलारुस, तजाकिस्तान और आर्मनिया शामिल हैं। यह सभी सांझा सुरक्षा समझौते के तहत एक दूसरे की मदद से लिए सहमत है।

उसके बाद ही रुस ने कार्रवाई करते हुए अपनी तरफ से पहली खेप में करीब ढाई हजार सैनिकों को वहां भेजा है। यह बताया गया है कि इस सेनाको सिर्फ वहां शांति बहाल करने के लिए भेजा गया है। स्थिति सामान्य होने तक ही यह सेना वहां रहेगी।

इस रुसी सेना के जिम्मे वहां के प्रमुख ठिकानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी है। मध्य एशिया के सबसे अधिक पेट्रोल वाले इस देश के प्रति सभी विकसित देशों की नजर रहती है। इसलिए वहां हिंसा भड़कने के बाद के घटनाक्रमों पर भी बड़े देशों की नजर अभी बनी हुई है।



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