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रोहतास के जिलाधिकारी धर्मेंद्र कुमार से विभिन्न विषयों पर विस्तारित बात चीत

  • प्रारंभिक शिक्षा को नालंदा के सरकारी स्कूल में

  • आईएएस बनने के लिए सही तरीके से तैयारी जरूरी

  • सुबह 10 से शाम पांच बजे तक लगातार काम करते हैं

  • दादाजी की बातें सुनकर सबसे कठिन परीक्षा को ही चुनौती माना

दीपक नौरंगी

रोहतासः रोहतास के डीएम धर्मेंद्र कुमार 2013 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह अपने

दैनिक सरकारी फाइलों को  निपटाने के मध्य ही समय निकाल कर आम जनता से भी

मिलते हैं और उनकी समस्याओं का हर संभव निराकरण का प्रयास करते हैं। इलाके में यह

बात अब स्थापित सत्य है कि अगर जिलाधिकारी मुख्यालय में मौजूद हैं तो ठीक दस बजे

वह अपने कार्यालय में उपस्थित होंगे और शाम पांच बजे तक लगातार काम भी करते

रहेंगे। इसी साल के जनवरी में चार तारीख को इस रोहतास जिला का पदभार उन्होंने

ग्रहण किया है।

वीडियो में देखिये उन्होंने विस्तार से इस पर क्या कहा

नालंदा के हिलसा के निवासी इस युवा अधिकारी ने बात चीत के प्रारंभ में ही अपनी पढ़ाई

और आईएसएस की तैयारियों के बारे में जानकारी दी। यह सवाल उनसे इसलिए भी पूछा

गया था ताकि अन्य युवा भी इस वीडियो को देखकर आईएएस की परीक्षा की तैयारी के

लिए खुद को तैयार कर सकें। उनकी पढ़ाई का उल्लेख इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण

है क्योंकि उनकी पढ़ाई गांव के स्कूल में ही हुई और इंटरमिडियट तक की पढ़ाई भी उन्होंने

हिलसा से ही पूरी की। अपने दूसरे प्रयास में वह आईएएस की परीक्षा में कामयाब हुए।

रोहतास के डीएम श्री कुमार ने बताया कि गांव के सरकारी स्कूल का माहौल कुछ ऐसा नहीं

था कि वहां पढ़ते हुए अपने भविष्य के बारे में कोई योजना बनाने की सोच विकसित हो।

रोहतास के डीएम ने इस बारे में अपनी स्पष्ट राय दी

लेकिन आईएएस कुछ होता है, यह उन्होंने अपने स्वर्गीय दादाजी से अवश्य सुना था, जो

हिंदी के बहुत ही अनुभवी शिक्षक थे। धर्मेंद्र कहते हैं कि उनके दादाजी अक्सर यह कहा

करते थे कि आईएएस की परीक्षा ही सबसे कठिन परीक्षा होती है। यह सुनकर ही मन में

विचार बनता था कि इस कठिन चुनौती का ही सामना कर लिया जाए। इस सेवा में अपनी

सफलता का उल्लेख करते हुए रोहतास के जिलाधिकारी के पद तक पहुंचने के बाद उन्होंने

स्पष्ट कर दिया कि इस परीक्षा की तैयारी के लिए सही रणनीति बनाकर ही अध्ययन

करना पड़ता है। अगर ऐसा किया गया तो सफल होना तय है। दादाजी की बातें सुनकर

जिद बढ़ता चला गया लेकिन वह खुद स्वीकारते हैं कि उस वक्त तक कुछ भी पता नहीं था

कि यूपीएससी क्या होता है, इस परीक्षा के विषय कौन से होते हैं और तैयारी कैसे करनी

होती है। सिर्फ दादाजी के द्वारा कहे गये शब्द कानों में गूंजते थे कि सबसे कठिन परीक्षा

होती है और मन में सोच पनपती चली गयी कि अगर सबसे कठिन परीक्षा है तो इसमें ही

उत्तीर्ण होना है। (जारी)

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