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रोबोट मकड़ा अब इंसानों का ढेर सारा कठिन काम करेगा







  • छोटे होने की वजह से कहीं भी ले जा सकते हैं
  • इंसान के मुकाबले ज्यादा बेहतर देख सकता है
  • आकार के बाद भी मजबूती में भी काफी बेहतर
  • गहराई में जानलेवा गैसों का भी पता लगायेगा
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः रोबोट मकड़ा अब इंसानों की ढेर सारी परेशानियों का हल कर

सकता है। इन्हें विकसित कर लिया गया है। आकार में ये काफी छोटे हैं। कुछ

मामलों में इन्हें इंसान अपनी पोशाक में लगाकर ले जा सकता है। इस

अवस्था में होने के बाद आवश्यकता पड़ने पर यह तुरंत ही काम करने के

लिए हमेशा तैयार रहते हैं। आकार में छोटे होने के बाद भी इनके काम करने

की क्षमता कई मामलों में इंसानों से काफी अधिक है।

नेशनल एकाडेमी ऑफ साइंस की पत्रिका में इस शोध के बारे में जानकारी

दी गयी है। इस किस्म के उपकरण को हावर्ड विश्वविद्यालय के ए पॉलसन

स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के शोधकर्ताओं ने बनाया है। आकार में छोटे होने

के साथ साथ यह काफी हल्के हैं। इस वजह से उन्हें अपने साथ ले जाने में

मनुष्य को कोई परेशानी नही होती। इसी वजह से इन्हें वीयरेबल यानी

पहनने लायक यंत्र करार दिया गया है।

इन माइक्रो रोबोट के बारे में खास बात यह है कि इनके अंदर खास तौर पर

गहराई नापने का सेंसर लगाया गया है। इस शोध प्रबंध के प्रथम सह लेखक

झूजुन शि ने बताया कि यंत्र को कई किस्म की सुविधाओं से लैश किया

गया है। इसमें देखने के कैमरों में लगे खास उपकऱणों की वजह से दूरी

और गहराई नापने में आसानी होती है। इसका सफलतापूर्वक प्रयोग कर

लेने के बाद इसमें कई अलग अलग विशेषताओं को भी जोड़कर देखा जा

रहा है।

रोबोट मकड़ा मक्खी प्रजाति के भी तैयार हुए हैं

इसके तहत एक रोबोट ऐसा भी है, जो देखने मे किसी छोटी मक्खी के जैसा है।

इसके पास मक्खी के जैसे गुण भी हैं और वह उड़ सकता है। इनका वैज्ञानिक

और रक्षा क्षेत्र में उपयोग किया जाने वाला है। लेकिन वर्तमान में यह परीक्षण

के बाद भी सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए जारी नहीं किये गये हैं। इसकी खास

वजह इनके इस्तेमाल से व्यक्ति की निजता में हनन होने से रोकना है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि आम तौर पर दूरी और गहराई नापने में इंसान

अक्सर ही पूरी तरह सही नहीं रहता। हमलोग अपनी दो आंखों से किसी दृश्य

को देखने के बाद दोनों आंखों से उसकी अलग अलग तस्वीर दिमाग तक

भेजते हैं। दिमाग के खास हिस्से में उनके विश्लेषण के बाद जो तस्वीर

उभरती है,उसके आधार पर हम अनुमान लगाते हैं। कई बार प्रकाश किरणों

की वजह से यह अनुमान गलत भी होता है। लेकिन ऐसे सुक्ष्म रोबोटों में अन्य

उपकऱण भी लगे हैं तो इन मामलों में इंसानों के मुकाबले ज्यादा सटीक

गणना कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इन्हें तैयार करने के लिए उपकऱणों के लिए

इस्तेमाल होने वाले पदार्थों का चयन भी काफी सावधानी से किया है। देखने

में काफी छोटे लगने के बाद भी ये काफी मजबूत हैं और कई काम मजबूती की

वजह से भी कर सकते हैं।

खनन और सुरक्षा क्षेत्र में बहुत कारगर साबित होगा

इनका प्रयोग सफल होने के बाद उनका व्यवहारिक परीक्षण भी किया जा रहा

है। इससे पहले ही वैज्ञानिकों ने मधुमक्खी की तरह उड़ने वाले रोबोट और

पतंग जैसे रोबोट भी सफलतापूर्वक तैयार कर लिये हैं। इन सारे रोबोटों की

विशेषता यह है कि वे पहले से प्राप्त कंप्यूटर आधारित निर्देशों के अनुसान

खास जिम्मेदारी का पालन कर सकते हैं। इसके माध्यम से कठिन और खतरे

वाले कामों के लिए रोबोटों का इस्तेमाल ज्यादा बेहतर माना गया है।

गहराई में काम करने लायक रोबोट खास तौर पर गहराई में जानलेवा गैस

की मौजूदगी के बारे में ज्यादा बेहतर संकेत दे सकेंगे। इसका इस्तेमाल

खनन कार्य में ज्यादा सुरक्षा प्रदान करने वाला साबित होगा।



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