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रोबोट मछलियां पानी के अंदर कई काम कर सकती हैं

  • आसमान में ड्रोन की तरह पानी के अंदर भी खोज का यंत्र

  • आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस से लैश हैं यह उपकरण

  • थ्री डी तकनीक से इनकी प्रिंटिंग की गयी है

  • टीम में भी काम करते हैं और संकेत देते हैं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रोबोट मछलियां बनायी गयी हैं। जिस तरीके से आसमान से जमीन पर किसी खास

चीज की तलाश के लिए ड्रोन के समूहों का भी प्रयोग किया जाता है, ठीक उसी तरीके से

यह यंत्र भी पानी के अंदर कई जिम्मेदारियों का पालन कर सकती हैं। आकार में मछली

जैसा दिखने की वजह से ही इन्हें रोबोट मछलियां करार दिया गया है। इनमें वैसे गुण डाले

गये हैं जिनकी मदद से वे न सिर्फ एक दूसरे को खोज सकते हैं बल्कि साथ मिलकर कोई

सांझा काम भी पूरा कर सकते हैं। पानी की गहराई में किसी खास इलाके में तलाशी

अभियान चलाने के लिए भी उनका बेहतर उपयोग किया जा सकता है। खासकर हाल के

दिनों में समुद्र की गहराई में छिपे रहस्यों का पता लगाने के काम लगातार तेज हो रहा है।

इसी वजह से समझा जा रहा है कि रोबोट मछलियां इस कार्य को और गति देने जा रही हैं।

इन रोबोट मछलियों को हार्वर्ड वेइस इंस्टिट्यूट ऑफ बॉयोलॉजी के वैज्ञानिकों ने तैयार

किया है। शोधकर्ता मानते हैं कि समुद्र की गहराई में बने खाइयों अथवा प्रवाल समूहों के

अंदर झांकना वर्तमान में सहज नहीं है। इस काम में भी यह यंत्र वैज्ञानिकों की मदद कर

सकते हैं। मजेदार बात यह है कि यह रोबोट मछलियां पानी की गहराई में अपना काम

करते हुए नियंत्रण कक्ष के संपर्क में रहती हैं। उनमें लगे कैमरे भी पानी के अंदर की स्थिति

की जानकारी देते रहते हैं। आवश्यकतानुसार वे मिले निर्देशों के मुताबिक अपनी

जिम्मेदारियां पूरी करते हैं। इस बारे में एक शोध प्रबंध भी प्रकाशित किया गया है। साइंस

रोबोटिक्स में प्रकाशित इस शोध प्रबंध के लेखकों में राधिका नागपाल, फ्लोरियन बर्लिंगर

और मेलविन गुची हैं।

रोबोट मछलियां गहराई में बेहतर तरीके से जांच सकती हैं

इस बारे में नागपाल ने तर्क किया है कि यह बड़ी चुनौती रही है कि कैसे पानी की गहराई में

भेजे जाने वाले उपकरण एक दूसरे से तालमेल बनाकर काम कर सके। रोबोट मछली इसी

जिम्मेदारी को पूरा करने में कामयाब पायी गयी हैं। इसी वजह से इन रोबोट मछलियों को

उस कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैश किया गया है, जिनकी मदद से वे एक दूसरे को पहचान कर

एक साथ भी काम कर सकते हैं। इन रोबोटों का नाम ब्लूसवार्म रखा गया है। दरअसल ये

ब्लू बॉट्स का सामूहिक नाम है। वैसे इन यंत्रों को थ्री डी प्रिंटिंग की मदद से तैयार किया

गया है। इसके मछली जैसे फिन में आगे बढ़ने के गुण हैं जबकि आंखों के स्थान पर कैमरे

लगाये गये हैं। देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि उन्हें देखकर कोई भयभीत नहीं होगा।

उनकी डिजाइन मछली जैसी होने के बाद भी बनाने वालों ने इस बात का ध्यान रखा है कि

वे देखने में डरावनी ना लगें। इनमें कुछ मछलियों की तरह अंधेरे में खुद से प्रकाशित होने

के गुण भी हैं। आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस से लैश होने की वजह से वे हमेशा ही एक दूसरे की

उपस्थिति को भांप सकते हैं। थ्री डी तकनीक से हुई प्रिटिंग की वजह से वे आवश्यतानुसार

अपनी रोशनी को कम या ज्यादा भी करने की क्षमता से लैश हैं।

एक दूसरे को संदेश भेज सकते हैं यह यंत्र

एक साथ काम करते समय इन रोबोट मछली को इस तकनीक से भी लैश किया गया है

कि किसी एक काम में उसकी टीम को लगाने के बाद जब कोई एक रोबोट किसी चीज की

तलाश कर लेता है तो वह अन्य रोबोटों की अपनी रोशनी की मदद से काम पूरा होने का

संकेत देने लगता है। पानी में छोड़े जाने के बाद अलग अलग परिस्थितियों से पानी के

अंदर जाने के बाद भी वे अपने आपसी संपर्क की वजह से एक दूसरे के करीब आ जाते हैं।

मछली के आकार में और मछली के जैसा ही पानी में तैरने की वजह से उन्हें देखकर अन्य

समुद्री जीवन को कोई खतरा महसूस नहीं होता। इसी गुण की वजह से वे पानी के अंदर

किसी स्थान को काफी करीब से देख सकते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि पानी के अंदर बचाव

और राहत कार्यों भी उनका प्रयोग काफी लाभप्रद साबित होने जा रहा है।

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