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राजद की नीति विहीन राजनीति को विधानसभा चुनाव से पहले झटका

  • पार्टी की कार्यशैली पर उठने लगे सवाल

  • रिम्स से एम्स भेजे गए पत्र ने मचाया हलचल

  • पांच बार सांसद और कई पदों पर रहे हैं डॉ रघुवंश सिंह

  • 32 वर्षों से पीछे खड़ा हूँ, लेकिन अब नहीं… – रघुवंश सिंह

रंजीत तिवारी

पटना : राजद की नीति विहीन राजनीति पर फिर से विरोधियों को हमला करने का नया

अवसर विधानसभा चुनाव के पहले मिल गया है।  लगभग तीन दशक से राजद के कद्दावर

नेता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पार्टी के लिए एक बड़ा चेहरा डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपना

दामन राजद से छुड़ा कर खुद को दरकिनार कर लिया है। पार्टी के अच्छे कार्यकर्ता राजद

सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बाद रघुवंश सिंह का हीं स्थान एक सुलझे हुए समर्पित नेता

के रूप में देते थे। चर्चा है कि उनका ऐसे जाना राजद के कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह

है। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार श्री सिंह का रुझान जदयू के तरफ बताया जा रहा है।

राजद के वरिष्ठ नेता श्री सिंह ने राजद सुप्रीमो के नाम महज एक पत्र ही नहीं बल्कि

अदृश्य रूप में एक बड़ा संदेश भी है। जिसमें उन्होने कहा है कि बापू, जेपी, लोहिया,

अंबेडकर और कर्पूरी की जगह एक परिवार के पांच की तस्वीर अब बर्दाश्त नहीं। दो दिन

पूर्व श्री सिंह के इस्तीफे की चिट्ठी साधारण पन्नो पर सोशल मीडिया में वायरल हुई थी।

जिसे राजद सुप्रीमो ने भी पत्र का जवाब लिखते हुए उन्हें पार्टी नहीं छोड़ने का मशविरा

दिया था। और उन्हें पार्टी में रहना बताया था। उसके बाद पूर्व सांसद श्री सिंह ने उनकी

चिट्ठी का जवाब नहीं देकर एक “संदर्भ” नाम से पत्र जारी किया है। जिसमें साफ तौर पर

उन्होंने लिखा था 32 वर्षों से मैं आपके पीछे खड़ा हूँ, लेकिन अब नहीं। वहीं इस चिट्ठी के

जरिये रघुवंश बाबू ने स्पष्ट किया है कि बापू, जेपी, लोहिया, अंबेडकर और कर्पूरी की

जगह एक हीं परिवार के पांच की तस्वीर उन्हें बर्दाश्त नहीं।

राजद की वर्तमान नीतियों पर ही उठाये हैं सवाल

रघुवंश बाबू के लेटरहेड पर सामने आई इस संदेश का शीर्षक “राजनीति मतलब बुराई से

लड़ना, धर्म मतलब अच्छा करना” है। इसके बाद बिहार में सियासत गरमाई हुई है।

गुरुवार को नयी दिल्ली स्थित एम्स में इलाजरत रघुवंश प्रसाद सिंह ने लंबी नाराजगी के

बाद लालू प्रसाद को राजद से अपना हस्त लिखित इस्तीफा भेज दिया था। इसके जवाब में

चारा घोटाले में सजायाफ्ता और न्यायिक हिरासत दौरान रिम्स में इलाजरत लालू ने श्री

सिंह के नाम जेल अधीक्षक को माध्यम बना ईमेल के जरिए एक पत्र भेजा था। जिसके

बाद बिहार में राजनीति तेज हो गई। सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री और जेडीयू नेता नीरज

कुमार ने इस मामले को बिहार-झारखंड जेल नियमावली का उल्लंघन करार दिया है।

उन्होंने जेल मैनुअल के प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि निजी मामलों में ही पत्र

लिखने की अनुमति होती है। कैदी की ओर से राजनीतिक पत्र व्यवहार नहीं किया जा

सकता है। इस बाबत झारखंड के जेल महानिरीक्षक वीरेंद्र भूषण ने बताया कि इसमें

राजनीतिक भाषा नहीं बल्कि व्यक्तिगत बातें थी उसे एम्स प्रेषित करने में जेल प्रशासन

को कुछ गलत नहीं समझ में आया।

बिहार के दिग्गज और वुद्धिजीवी नेताओं में से एक हैं

राजद के दिग्गज नेता और पांच बार सांसद तथा मंत्री रहे डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह का जन्म

6 जून 1946 को वैशाली के शाहपुर में हुआ था। डॉ. प्रसाद ने बिहार यूनिवर्सिटी से गणित

में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। अपनी युवावस्था में उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश

नारायण के नेतृत्व में हुए आंदोलनों में भाग लिया। 1973 में उन्हें संयुक्त  सोशलिस्ट

पार्टी का सचिव बनाया गया। 1977 से 1990 तक वे बिहार राज्य्सभा के सदस्य रहे। 1977

से 1979 तक वे बिहार राज्य के ऊर्जा मंत्री रहे। इसके बाद उन्हें लोकदल का अध्यक्ष

बनाया गया। 1985 से 1990 के दौरान वे लोक लेखा समिति के अध्यक्ष रहे। 1990 में

उन्होंने बिहार विधानसभा के सहायक स्पीकर का पदभार संभाला। लोकसभा के सदस्य‍ के

रूप में उनका पहला कार्यकाल 1996 से प्रारंभ हुआ। वे 1996 के लोकसभा चुनाव में

निर्वाचित हुए और उन्हें बिहार राज्य के लिए केंद्रीय पशुपालन और डेयरी उद्योग

राज्यमंत्री बनाया गया। लोकसभा में दूसरी बार वे 1998 में निर्वाचित हुए तथा 1999 में

तीसरी बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। इस कार्यकाल में वे गृह मामलों की समिति

के सदस्यु रहे। 2004 में चौथी बार उन्हें लोकसभा सदस्य के रूप में चुना गया और 23 मई

2004 से 2009 तक वे ग्रामीण विकास के केंद्रीय मंत्री रहे। इसके बाद 2009 के लोकसभा

चुनावों में उन्होंने पांचवी बार जीत दर्ज की।


 

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