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ऋचा भारती के मामले में अदालत ने फैसला संशोधित किया







  • जमानत में कुरान बांटने की शर्त हटायी

संवाददाता

रांचीः ऋचा भारती की जमानत के मामले में अदालत ने अपने पूर्व आदेश को संशोधित किया है।

सरकार की तरफ से यह बताया गया था कि अदालत द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में तकनीकी अड़चन आ सकती है।

सरकार की तरफ से यह आवेदन मामले के जांच अधिकारी और पिठौरिया के थाना प्रभारी की ओर से दिया गया था।

उनके इस आवेदन को सहायक लोक अभियोजक के द्वारा अदालत की जानकारी में लाया गया था।

दूसरी तरफ राज्य सरकार की तरफ से भी अदालत को इस फैसले के अनुपालन में आने वाली परेशानियों की तरफ ध्यान आकृष्ट किया गया था।

सोशल मीडिया पर घृणा फैलाने के मामले में इससे पूर्व अदालत ने

ऋचा भारती को दंड स्वरुप पांच पांच कुरान बांटने का निर्देश दिया था।

ऋचा भारती ने इस आदेश को मानने से न सिर्फ इंकार कर दिया था बल्कि यह बयान तक दे डाला था कि

अब क्या अदालत उसे नमाज पढ़ने का भी आदेश सुना सकती है।

इस बयान के बाद से राजनीति में भूचाल आ गया था।

ऋचा भारती के समर्थन में खड़े हो गये थे अनेक संगठन

अनेक लोग ऋचा भारती के समर्थन में भी खड़े हो गये थे।

आज इस मामले यानी कांड संख्या 58-2019 में प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी 21 की अदालत ने

अपने पूर्व आदेश को संशोधित करते हुए कुरान बांटने की शर्त को हटा दिया है।

ऋचा भारती को सात सात हजार को दो निजी मुचलकों को जमानत देने की शर्त पूर्ववत रहेगी।

इन दो जमानतदारों में से एक को ऋचा का रिश्तेदार होना होगा जबकि दूसरे जमानतदार का भी

स्थानीय निवासी होने की शर्त यथावत रहेगी।

इस अदालती फैसले के संशोधन से अब उम्मीद की जाती है कि इस मुद्दे पर जो बवाल हो रहा था

वह अब समाप्त हो जाएगा।

क्योंकि भाजपा सहित कई संगठनों के लोग कुरान बांटने की शर्त के नाम पर ऋचा के समर्थन में खड़े हो गये थे।

यह मुद्दा सोशल मीडिया की बदौलत एक राष्ट्रीय चर्चा का विषय भी बनता जा रहा था।



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