रिंग ऑफ फायर में तेज हो रही हलचल, भूकंप और सूनामी की आशंका

रिंग ऑफ फायर
  • पृथ्वी के नीचे फॉल्ट लाइन में हो रही है हलचल

  • फायर ऑफ रिंग घोड़े के नाल की शक्ल में

  • कैलिफोर्निया पर पड़ सकता है सर्वाधिक प्रभाव

  • आम लोगों के अनुमान से स्थिति अधिक गंभीर

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः रिंग ऑफ फायर की आग तेज हो रही है। पृथ्वी की गहराई में सोया पड़ा यह अग्नि दानव फिर से जाग रहा है।

पृथ्वी के अंदर हो रही इस हलचल से कई इलाकों में भूकंप और सूनामी का खतरा भी बढ़ गया है।

कुछ वैज्ञानिक मान रहे हैं कि अगले 48 घंटे में इसके कुपरिणाम भी सामने आ सकते हैं।

दरअसल पृथ्वी की गहराई में बड़ी-बड़ी चट्टानों के बीच जो दरार है, उसमें यह हलचल हो रही है।

इस दरार में हो रही हलचल की वजह से उसके नीचे की आगे विस्फोट के तौर पर ऊपर आने की आशंका जतायी गयी है।

हाल के दिनों में इंडोनेशिया, बोलिविया, जापान और फिजी में आये भूकंप को इसी हलचल का परिणाम बताया गया है।

अनुमान है कि इसका सबसे बड़ा झटका अमेरिका के कैलिफोर्निया में लग सकता है, जहां इस दरार का अंतिम छोर है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह दरार दरअसल पृथ्वी की काफी गहराई में एक घोड़े की नाल की शक्त में हैं।

इसे रिंग ऑफ फायर कहा जाता है।

दुनिया के दो बड़े चट्टानों (टेक्टोनिक प्लेट) की रगड़ के बीच है यह दरार।

हाल के भूकंपों की वजह भी इस रिंग ऑफ फायर की हलचल रही है।

दो बड़ी चट्टानों के बीच की यह दरार नीचे से दबाव से खिसकती रहती है।

रिंग ऑफ फायर जिंदा कर सकता है 452 ज्वालामुखी

अब इसमें दोबारा हलचल होने के बाद पूरी दुनिया में 452 ज्वालामुखी फिर से सक्रिय हो सकते हैं।

पूरे प्रशांत सागर के इलाके में इसकी हलचल का सीधा प्रभाव पड़ता है।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं कि जिस तरीके से अब यह हलचल हो रही है, उससे नौ मैग्निच्यूड का भूकंप आ सकता है।

इस आकार के भूकंप को वैज्ञानिक अत्यंत विनाशकारी भूकंप की श्रेणी में रखते हैं।

भूकंप आने की स्थिति में पूरे इलाके के समुद्र में बड़ी सूनामी भी आ सकती है।

खासकर अमेरिका के पश्चिमी तट पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पडऩे की आशंका है।

कोलाराडो विश्वविद्यालय के जियोफिजिक्स के प्रोफेसर रिचडर् एस्टर ने कहा कि

आम लोग भूकंप के बारे में जो धारणा रखते हैं, स्थिति उससे कहीं अधिक भयावह है।

यहां वर्ष 1906 में सात मैग्निच्यूड का भूकंप आया था, जिसमें तीन हजार लोग मारे गये थे।

वर्तमान पीढ़ी को इस भयावह स्थिति का कोई अनुभव नहीं है पर वे भूकंप के बारे में जानकारी रखते हैं।

इसलिए उन्हें आगाह कर देना जरूरी है कि जैसी वह कल्पना कर रहे हैं स्थिति उससे कहीं अधिक खतरनाक हो सकती है।

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