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रिम्स के बिस्तर से दुश्मनों का शिकार कर रहे हैं लालू प्रसाद

  • झारखंड की राजनीति में पर्दे के पीछे से चल रही दूसरी रणनीति
  • भाजपा टिकट वितरण का हाल उनकी जानकारी में
  • निशाने पर एक नंबर पर सांसद अन्नपूर्णा देवी
  • कोडरमा और पलामू में हो रही है घेराबंदी
  • गिरिनाथ सिंह पूरे सीन से अब तक गायब
संवाददाता

रांचीः रिम्स के बिस्तर पर लेटे होने के बाद भी लालू प्रसाद अपने

दुश्मनों की घेराबंदी कर रहे हैं। इस घेराबंदी में सबसे प्रमुख निशाने पर

कोडरमा की भाजपा सांसद अन्नपूर्णा देवी हैं। झारखंड की राजनीति में

पर्दे के पीछे के खेल भी काफी चतुराई से खेले जा रहे हैं। पिछले

लोकसभा चुनाव में जिनलोगों ने लालू प्रसाद को धोखा दिया था, अब

सबसे पहले उनकी बारी आयी नजर आ रही है। इस कड़ी में सबसे

पहले कोडरमा की सांसद अन्नपूर्णा देवी का नंबर लगा है। अंदरखाने

से छनकर आने वाली सूचनाओं के मुताबिक पलामू के इलाके में टिकट

वितरण और कई नेताओं के दल बदल में प्रमुख भूमिका निभाने वाली

सांसद को उनके ही इलाके में घेरा जा रहा है। राजद की तरफ से सुभाष

यादव को मैदान में उतारना एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।

इसी तैयारी की सूचनाओं के बाहर आने की वजह से ही पहली बार यह

खुलासा हो पाया है कि अन्नपूर्णा देवी ने ही पलामू के टिकट वितरण

में अहम भूमिका निभायी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव के

कहने पर राजद से इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर सांसद बनी

अन्नपूर्णा देवी को उनके घर में मात देने के लिए रिम्स के बिस्तर पर

पड़े लालू के अदृश्य सिपहसलार काम में जुट गये हैं।

अन्नपूर्णा को उसकी औकात बताने की तैयारी

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव के ठीक पहले अन्नपूर्णा देवी ने

खेमा बदलकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। इसी वजह से

कोडरमा के सांसद रविंद्र राय का टिकट काटकर उन्हें लोकसभा चुनाव

में भाजपा का प्रत्याशी बनाया गया था। जहां से वह चुनाव जीतकर

सांसद बनी है। जानकार मानते हैं कि इस फैसले से लालू खुश नहीं थे

लेकिन अत्यंत बीमार होने की वजह से वह अपने स्तर पर इसे रोकने

की स्थिति में भी नहीं थे। अब मौका आने पर वह पीठ पर छुरा घोंपने

वालों को औकात बताने के अपने अभियान में जुट गये हैं। वैसे इस पूरे

प्रकरण में पार्टी बदलने वाले दूसरे नेता गिरिनाथ सिंह कहीं भी सक्रिय

नजर नहीं आ रहे हैं।

रिम्स के बिस्तर से बनती रणनीति में कई निशाने पर

लिहाजा यह माना जा सकता है कि लालू ने सभी पुराने साथियों को पूर्व

चेतावनी देने के बाद ही उनके खिलाफ कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। लालू

की कृपा से राजनीति में ऊपर जाने वालों को उनके घर में घुसकर

चुनौती देना लालू की पुरानी आदत रही है। लिहाजा अब यह देखना

होगा कि बीमार अवस्था में रिम्स में होने के बाद भी लालू अपने

राजनीतिक चाल से किन लोगों को सबक सीखा पाते हैं।

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