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अमीरों पर अधिक मारक असर है कोरोना संक्रमण का




  • भारत में अधिक लोगों पर हुए शोध का नया निष्कर्ष 

  • आंध्रप्रदेश और तमिलनाडू के मरीजों का आंकड़ा

  • इन दोनों राज्यों में स्वास्थ्यसेवा अधिक बेहतर

  • अमेरिका के मुकाबले यहां औसतन कम मौत

रांचीः अमीरों पर भारत में कोरोना के अधिक घातक असर हुआ हैं। शोध से यह जानकारी

मिली है। भारत के दो राज्यों में कोरोना वायरस के मरीजों के आंकडों के विश्लेषण के

आधार पर नई रिपोर्ट जारी की गयी है। यह शोध आंध्रप्रदेश और तमिलनाडू के मरीजों के

हैं। यहां किसी के संपर्क में आने पर कोरोना के प्रसार की स्थितियों पर अध्ययन किया

गया था। इस रिपोर्ट के बनाने में 84965 मरीजों तथा संक्रमण के संपर्क में आये 575 071

लोगों के आंकड़े शामिल किये गये हैं। यानी कोरोना संक्रमण के विस्तार के क्रम में जो

हजारों लोग किसी न किसी रुप में इस संक्रमण के दायरे में आये हैं, उनका आंकड़ा भी इस

रिपोर्ट में शामिल किया गया है।

जर्नल साइंस में प्रकाशित इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि कोरोना से मौत के आंकड़े

खास तौर पर 40 से 69 वर्ष की आयु के लोगों के बीच अधिक पाये गये हैं। लेकिन अजीब

स्थिति यह है कि युवाओं में इस संक्रमण की वजह से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी अन्य

विकसित देशों की तुलना में काफी अधिक है। साथ ही शिशुओं में संक्रमण का दायरा भी

दूसरे देशों के मुकाबले काफी अधिक रहा है। इस सर्वेक्षण में सिर्फ तमिलनाडू और

आंध्रप्रदेश के सरकारी आंकड़े ही शामिल हैं। इसकी विशेषता यह है कि मौत के आगोश में

समाने वालों में अधिकांश उच्च आय वर्ग के लोग हैं।

अमीरों के मुकाबले गरीबों पर कम असरदार

वैज्ञानिकों ने पाया है कि अन्य देशों की तुलना में इन दो राज्यों का गरीब इसकी चपेट में

आने के बाद भी मौत को पछाड़ने में अधिक कामयाब रहा है। कोरोना से हुई मौत के

आंकड़ों का अनुपात भी आयुवर्ग के हिसाब से अलग अलग पाया गया है। पांच साल से 17

साल आयु वर्ग के बीच यह मौत का दर 0.05 प्रतिशत है जबकि 85 वर्ष से अधिक आयु वर्ग

में यह बढ़कर 16.6 प्रतिशत हो गया है।

सर्वेक्षण के आंकड़े यह दर्शा रहे हैं कि इन दो राज्यों में गंभीर रुप से कोरोना पीड़ित मरीजों

को मौत से पहले अस्पताल में पांच दिन रहना पड़ा है। दूसरी तरफ अमेरिका में यह

आंकड़ा औसतन 13 दिनों का है। अच्छी स्थिति यह है कि किसी तरह कोरोना के संपर्क में

आने वाले 70 फीसदी लोगों ने किसी अन्य तक संक्रमण नहीं फैलाया है। दूसरी तरफ चिंता

का विषय यह है कि मात्र आठ प्रतिशत लोगों ने खुद को संक्रमित होने के बाद भी

लापरवाही की वजह से साठ प्रतिशत लोगों तक यह संक्रमण फैलाने का काम किया है।

सर्वेक्षण की रिपोर्ट यह भी कहती है कि जांच की गति तेज होने जाने की वजह से संक्रमण

के फैलने की गति धीरे धीरे काबू में आने लगी है।

तमिलनाडू और आंध्रप्रदेश की स्वास्थ्य सेवा बेहतर है

इस रिपोर्ट को पूरे देश के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इन दोनों ही

राज्यों में सबसे अधिक स्वास्थ्य कर्मी है और दोनों राज्य सेवा सेवाओं पर अन्य राज्यों के

मुकाबले अधिक धन खर्च करते हैं। इन दोनों ही राज्यों में प्राथमिक चिकित्सा का दायरा

भी दूसरे राज्यों के मुकाबले उन्नत और अधिक क्रियाशील है। इस दौर में संक्रमण की

वजह से जो लोग मारे गये हैं, उनमें से 45 प्रतिशत लोग मधुमेह की बीमारी से पीड़ित थे।

पूरे देश के आंकड़ों के मिलान से यह बात सामने आ रही है कि मौत का यह आंकड़ा खास

तौर पर 50 से 64 साल के लोगों के बीच अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक एक अगस्त से

पहले इन दो राज्यो में 75 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के मौत का आंकड़ा 17.9 प्रतिशत

रहा है जबकि अमेरिका में इस आयु वर्ग में मौत का आंकड़ा 58.1 प्रतिशत पाया गया है।

इस शोध से जुड़े रहे विशेषज्ञ रामानन लक्ष्मीनारायण ने कहा है कि कोरोना संक्रमण के

रास्ते की जांच में दोनों राज्यों के स्वास्थ्य कर्मियों का उल्लेखनीय योगदान रहा है। इसकी

वजह से ही यह वायरस किस माध्यम से कहां तक पहुंचा है, उसकी पहचान के बाद आगे

की कार्रवाई और रोकथाम की प्रक्रिया तेज हो पायी है।

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