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गेंडों को घऱ के आंगन में देखकर भागकर ऊपर पहुंचे घर के लोग

  • हाथी और चीता के हमले से परेशान अब गेंडा भी 
  • हाथियों का झूंड खा रहे हैं खेतों से लाया गया फसल
  • रात में चीता कर रहे हैं ग्रामीणों की मवेशियों पर हमला
  • गेंडा के अलावा जंगली भैसे भी घुस आये हैं गांव की इलाके में

अलीपुरदुआरः गेंडों को आम तौर पर दिन के उजाले में गांव की तरफ

कम आते देखा जाता है। जंगल की सीमा पर उन्हें चहलकदमी करते

अक्सर देखा जाता है। लेकिन इस बात दो गेंडे गांव नहीं घर के आंगन

में चले आये। हाथी और चीता के हमले से गांव वाले पहले से ही

परेशान चल रहे हैं। एक तरफ जंगली हाथी खेत के अलावा घरों तक

धावा बोलकर अनाज खा रहे हैं। दूसरी तरफ रात के अंधेरे में पता नहीं

कहा के चीता लगातार हमला कर मवेशियों को मार रहे हैं। इसके बीच

दिन के उजाले में गेंडा भी घरों के दालान तक आ पहुंचा है। यह घटना

जलदापाड़ा अभयारण्य के पास के गांव कोदालबस्ती की है। आम तौर

पर गेंडा अथवा अन्य जंगली जानवर रात के अंधेरे में गांवों की तरफ

आया करते हैं। अगली सुबह गांव वालों को कौन सा जानवर आया था,

उसका पता पैरों के निशान से होता था। आज अचानक दोपहर के वक्त

दो गेंडे घर की दालान तक चले आये। वहां खेल से काटा गया अनाज

रखा था। अनाज के पास ही पुआल का ढेर भी था। गेंडों को यूं भी काफी

बदमिजाज जानवर माना जाता है। इसलिए गेंडों का यह जोड़ा नजर

आते ही घर के लोगों ने चुपचाप दरवाजा बंद कर लिया ताकि किसी भी

तरीके से गेंडों को इंसान के पास होने का पता नहीं चले। कुछ देर तक

वहां चहलकदमी करने के बाद गेंडे वापस जंगल की तरफ भगाये गये।

वैसे दिन के उजाले में गेंडों के आने की चर्चा बाद में फैली। घर के अंगर

गेंडे की नजर से बचे होने के बाद भी ग्रामीणों ने अपने मोबाइल से

इसकी तस्वीरें खीची। लेकिन गेंडे उत्तेजित नहीं हों, इसका पूरा ख्याल

रखा।

गेडों के नजर आते ही ऊपर सुरक्षित हो गये थे घरवाले

घटनाक्रम के बारे में पता चला है कि घर के मालिक श्यामल राभा

अपने घर में हाथ धोकर भोजन करने बैठे थे। अचानक सामने से

काफी शोर होने की वजह से उनका ध्यान सामने से आ रहे दो गेंडों की

तरफ गया। उन्होंने चालाकी दिखाते हुए घर के लोगों को चुपचाप गेंडों

के सामने से हट जाने का निर्देश दिया। घर के सभी लोगों को लेकर वह

घर के ऊपरी हिस्से में बने इलाके में चले गये ताकि गेंडा अगर घर के

अंदर भी चला आये तो कोई उसके सामने नहीं पड़े। जंगल के काफी

करीब रहने की वजह से उन्हें इस बात की जानकारी थी। वहां से गांव

वालों को घऱ के अंदर गेंडा आने की जानकारी देने की वजह से वन

विभाग के कर्मचारी भी वहां पहुंचे। वन कर्मियों ने पटाखा फोड़कर

किसी तरह गेंडों को फिर से जंगल की तरफ भेजा। इस दौरान कई बार

नाराज होकर गेंडे वन विभाग के लोगों की तरफ भी दौड़ पड़े थे। लेकिन

सभी के सतर्क होने की वजह से कोई हादसा नहीं हुआ। ग्रामीण इस

बात से लगातार परेशान हैं कि सुबह से लेकर शाम तक जंगली हाथी

और रात के अंधेरे में चीता के हमले की आशंका के बीच अब दिन में

जंगली भैसों के साथ साथ गेंडे भी गांव के अंदर आ रहे हैं।

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