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समझौते के बाद प्योंगौंग झील से पीछे हट रही है चीन की सेना




  • झील पर भारतीय सेना की निरंतर नजरदारी

  • दो सौ टैक और एक सौ बख्तरबंद गाड़ी वापस

  • युद्ध जैसी स्थिति टल गयी ऐसा मान सकते हैं

  • चीन की तरफ से सैन्य वापसी की गति भारत से तेज

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः समझौते के बाद भारत और चीन की सेनाएं पीछे हट रही हैं। लेकिन इस मौके

पर भारतीय सेना भी चीन की फुर्ती देखकर हैरान है। भारतीय सेना की तुलना में उसकी

सेना ने न सिर्फ अपने टैंक तेजी से पीछे लिये हैं बल्कि बख्तरबंद गाड़ियों को भी भारत के

मुकाबले अधिक तेजी से पीछे हटाया है। वैसे सैन्य वाहनों की स्थिति में इस बदलाव के

बाद भी सैनिकों की मौजूदगी यथावत है और दोनों ही पक्ष एक दूसरे की गतिविधियों पर

कड़ी नजर रख रहे हैं। लद्दाख में काफी लंबे समय तक तनातनी और युद्ध जैसी स्थिति बने

रहने के बाद अंततः सैन्य कमांडरों की बैठक में इस समझौते के प्रारुप पर हस्ताक्षर किये

गये हैं।

जो सूचनाएं अब बाहर आ रही है, उसके मुताबिक प्योगौंग झील के अलावा गलवान घाटी

और गोग्रा हॉट स्प्रिंग्स में दोनों देशों की सेना आमने सामने हैं। लेकिन युद्ध की तैयारी जैसे

जो बड़े वाहन और हमलावर हथियार लाये गये थे, उन्हें पीछे हटा लिया गया है। अनुमान

है कि योजना के अगले चरण में क्रमवार तरीके से सेना की भी वापसी होगी। दरअसल

गलवान घाटी में धोखा खाने के बाद भारतीय सेना अब चीन की बात पर बिल्कुल भी

भरोसा नहीं कर रही है। उसे जैसा नजर आ रहा है, उसके मुताबिक वह अपना काम कर

रही है। पिछले नौ महीनों से वहां ऐसी हालत बनी हुई थी मानों किसी भी क्षण युद्ध की

शुरुआत हो सकती है।

समझौते के बाद से ही सेना ने पीछे हटना प्रारंभ किया था

गुरुवार से सेना की वापसी का काम प्रारंभ होने के बाद भारतीय सेना को हैरान करते हुए

चीन ने अपने दो सौ टैंक वापस ले लिया। साथ ही इस झील के पास अपने इलाकों में संपर्क

बनाये रखने के लिए तैनात एक सौ बड़े वाहन भी हटा लिये हैं। समझा जा रहा है कि

फरवरी 19 तक यह काम पूरा हो जाएगा। इस झील पर स्थिति सामान्य होने से ऐसा माना

जा सकता है कि युद्ध जैसी भीषण स्थिति टल गयी है। दरअसल इसी झील के उत्तरी और

दक्षिणी छोर पर ही टकराव की नौबत बनी थी। यहां आगे बढ़ने वाले चीनी सैनिकों को भी

भारतीय सेना ने मारपीट कर पीछे भगा दिया था। दरअसल भारतीय सेना भी गलवान

घाटी की घटना के बाद बदले की मानसिक तैयारी में थी। वहां हथियार चलाने की अनुमति

नहीं होने की वजह से कोई बड़ा हादसा होने से टल गया था। देश में इस मुद्दे पर

राजनीतिक बयानबाजी जारी होने के बीच उस सीमा के सीधे संपर्क में रहने वाले सैन्य

अधिकारी मानते हैं कि सेना को आगे बढ़ने का आदेश देने के बाद उसे उसी रफ्तार से पीछे

नहीं हटाया जा सकता है। लेकिन जो बदलाव हुए हैं उससे यह माना जाना चाहिए कि युद्ध

की स्थिति खत्म हो रही है। वैसे राहुल गांधी द्वारा भारतीय जमीन चीन को सौंप देने के

बयान की वजह से रक्षा मंत्रालय को भी बार बार सफाई देनी पड़ रही है। सैन्य विशेषज्ञ

मान रहे हैं कि इस झील के फिंगर 4 और फिंगर 8 से ही चीन अपनी सेना को पीछे ले रहा

है। दोनों पक्षों में इस बात की सहमति भी हो चुकी हैं कि वहां जो स्थायी निर्माण किये गये

हैं, उन्हें भी क्रमवार तरीके से तोड़ दिया जाएगा।



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