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प्रतिबंध समाप्त होते ही बांग्लादेश में फिर से इलिश का कारोबार शुरु

  • प्रतिनिधि

ढाकाः प्रतिबंध समाप्त कर दिया गया है। बांग्लादेश सरकार के इस फैसले से फिर से पद्मा

और मेघना नदी में इलिश मछली का कारोबार गति पकड़ने लगा है। मछली पकड़कर

अपना कर्ज साधने की तैयारियों में सारे मछुआरे व्यस्त हैं। कोरोना काल ने उन्हें काफी

समय से कर्ज में डूबा रखा है। उन्हें उम्मीद है कि प्रतिबंध समाप्त होने के बाद फिर से

इलिश का कारोबार उन्हें पिछली बर की तरह फिर से अपनी परेशानी दूर करने का साधन

उपलब्ध करायेगा। इसके लिए मछुआरों की बस्ती में पूरी तैयारी हो रही है। प्रतिबंध

समाप्त होते ही मछुआरे नाव लेकर सभी नदियों के समुद्री मुहाने पर पहुंच गये हैं।

शनिवार से यह काम प्रारंभ हो गया है। इसके पहले बांग्लादेश सरकार ने इलिश की

आबादी को सही तरीके से बढ़ने के लिए इन इलाकों में दो महीने के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा

दिया था। इस प्रतिबंध की वजह से वहां इलिश की आबादी फिर से अच्छी हो गयी है। अब

प्रतिबंध समाप्त करने का एलान होते ही मछली पकड़ने का कारोबार गति पकड़ चुका है।

वैसे सरकार ने इलिश पकड़ने पर प्रतिबंध लगाने के दौरान मछुआरा परिवारों को हर

महीने चालीस किलो चावल देने का निर्णय पहले से ही लागू कर रखा है। इस वजह से

प्रतिबंध होने के दौरान भूख मिटान के लिए उन्हें चोरी छिपे भी नदी में नही जाना पड़ता

है। इलिश उत्पादन और संरक्षण का यह काम सीधे प्रधानमंत्री शेख हसीना की देखरेख में

चलता है। पिछली बार बांग्लादेश ने इलिश उत्पादन के साथ साथ उसके निर्यात के सारे

पूर्व रिकार्ड तोड़ दिये थे। इससे मछुआरों के साथ साथ मछली निर्यात से जुड़े कारोबारियों

को भी अच्छा लाभ हुआ था। शेख हसीना की इस पहल में नियम तोड़कर मछली पकड़ने

वालों के लिए दंड का भी प्रावधान किया गया है।

प्रतिबंध के साथ साथ दंड का भी प्रावधान किया गया है

वहां के करीब एक सौ किलोमीटर इलाके में इलिश मछली की आबादी को बढ़ने का अवसर

देने के लिए ऐसे प्रतिबंध लगाये जाते हैं। इसका अब बांग्लादेश के इलिश उत्पादन पर

बेहतर प्रभाव पड़ता नजर आने लगा है। दूसरी तरफ प्रतिबंध के दौरान भोजन का इंतजाम

होने क वजह से मछुआरा चोरी छिपे भी यह काम करने नदी में नहीं जाते। वैसे इस दौरान

समुद्री तट के करीब इन नदियों के मुहानों पर भी कड़ा पहरा रहता है और पकड़े गये लोगों

को एक से दो साल की सजा अथवा पांच हजार रुपया अर्थदंड का प्रावधान कड़ाई से लागू

किया गया है। पिछले दो महीनों में भोला भेदुरिया से पटुआखाली से सारे इलाकों में यह

प्रतिबंध लागू था। मछुआरे भी मानते हैं कि इस प्रतिबंध की वजह से इलिश का आबादी

फिर से अच्छी हुई है। अब छह जिलों के दो लाख 47 हजार 778 मछुआरे इस काम के लिए

पंजीकृत है। बांग्लादेश मछली अनुसंधान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक अनीसूर रहमान ने

बताया कि हर साल बांग्लादेश औसतन 15 हजार मेट्रिक टन इलिश का उत्पादन बढ़ोत्तरी

कर रहा है। उनके मुताबिक एक मादा इलिश लाखों अंडे छोड़ती है। माहौल ठीक होने पर

नदी और समुद्र के मुहाने पर इन्हीं अंडों से बच्चे निकलते हैं। इस बार भी सब कुछ ठीक ही

रहा है। इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि जारी वर्ष में पौने छह लाख मेट्रिक टन इलिश

का उत्पादन होगा। पिछले वर्ष यह आंकड़ा साढ़े पांच लाख मेट्रिक टन का रहा है।

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