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आईआईटी मंडी ने शोधर्ताओं ने कोरोना प्रोटिन ढांचा की विशेष जानकारी दी

  • इस आवरण की वजह से अभेद्य बन जाता है वायरस

  • आवरण में बने प्रोटिन कवच का विश्लेषण किया

  • कांटा जैसा आवरण में एनएसपी 1 ही हानिकारक

  • इस प्रोटिन को निष्क्रिय करने से रुकेगा वायरस

राष्ट्रीय खबर

रांचीः आईआईटी मंडी ( हिमाचल प्रदेश) के शोध दल ने कोरोना वायरस के ढांचे का

अध्ययन करते हुए उसके क्रियाकलापों का पता लगाया है। इस शोध में यह भी देखा गया

है कि वायरस का कौन सा हिस्सा क्या काम करता है। इस जानकारी के सामने आने के

बाद हो सकता है कि इस वायरस का ईलाज खोजने में जुटे वैज्ञानिकों को कुछ नया करने

का रास्ता मिल जाए। इस अनुसंधान के बारे में वॉयरोलॉजी साइंस के ताजा अंक में

जानकारी प्रकाशित की गयी है। इसमें पहली बार वायरस की संरचना और उसके प्रोटिन

का काम काज को भी स्पष्ट किया गया है। वर्तमान में कोरोन के ईलाज की पद्धति में यह

जानकारी आगे बहुत काम आने वाली है, ऐसा माना जा रहा है। खासकर इस वायरस के

बाहरी हिस्से में कांटा जैसा बने प्रोटिनों के काम काज के बारे में अधिक जानकारी दी गयी

है। पहली बार यह पता चला है कि दरअसल कोरोना वायरस की जो संरचना हम देखते हैं,

उससे बाहरी आवरण में जो कांटे जैसे दिखते है, वे ही ऐसे प्रोटिन हैं, जो इंसानी शरीर के

कोष के साथ जुड़कर गड़बड़ी की शुरुआत करते हैं। इन प्रोटिनों को निष्क्रिय बना देने के

बाद वायरस की अपनी कोई ऐसी क्षमता नहीं बच जाती है कि वह खुद इंसानी शरीर को

संक्रमित करे। अगर किसी कारण से इस अवस्था का प्रोटिन आवरण रहित वायरस शरीर

के अंदर प्रवेश करता भी है तो वह बिना कोई नुकसान पहुंचाये ही समाप्त हो जाएगा।

आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओँ ने इन प्रोटिन आवरणों को भी गहराई से समझा है और

हरेक के काम के बारे में जानकारी दी है। इस शोध से जुड़े आईआईटी मंडी के

बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग से सहायक प्रोफसर रजनीश गिरि ने इस बारे में जानकारी दी है।

वह इस शोध से जुड़े रहे हैं।

आईआईटी मंडी ने आवरण के प्रोटिन के समूहों को पहचाना है

उनके मुताबिक वायरस के प्रोटिन को शरीर के अंदर संपर्क स्थापित करने से रोकना ही

सबसे बड़ी चुनौती है। दरअसल इन प्रोटिनों की हरेक की अपनी अपनी भूमिका है। इन्हें

अपना काम करने से अगर रोका जा सका तो कोरोना संक्रमण का खतरा अपने आप ही

समाप्त हो जाएगा। वर्तमान में ऐसी कोई दवा इस्तेमाल में नहीं है जो इन प्रोटिनों को

शरीर के अंदर अपना घर बनाने और उसे बढ़ाने में रोक सकता हो। शोध में यह बताया

गया है कि कोरोना वायरस के बाहरी आवरण में जो कांटादार हिस्सा होता है उसमें 16

प्रकार के प्रोटिन होते हैं। उन्हें नॉन स्ट्रक्चरल प्रोटिन (एनएसपी) का नाम दिया गया है।

इनमें से एनएसपी 1 ही वह प्रोटिन है जो इंसानी शरीर के प्राकृतिक कोष से जुड़कर उसे

दूषित करता है। इस दूषण की वजह से ही वायरस को शरीर के अंदर फैलने का मौका मिल

जाता है। अनुसंधान में यह भी पाया गया है कि यह एनएसपी 1 ही शरीर की प्रतिरोधक

क्षमता को सबसे पहले निष्क्रिय बनाता है। इसलिए उसे रोकने का उपाय होने पर कोरोना

पर जीत पाना बहुत आसान हो जाएगा। इसप्रोटिन अथवा अन्य एनएसपी प्रोटिनों के

अंदर भी स्वचालित स्विच जैसे हैं, जो परिस्थिति को देखकर ही सक्रिय होते हैं। दरअसल

इन प्रोटिनों को मिलने वाले रासायनिक संकेतों के आधार पर उनकी सक्रियता बढ़ती है।

इंसानी शरीर के एमिनो एसिड के क्षेत्र में उनकी सक्रियता होती है और ऐसा माना जाता है

कि हर कोष पर वे सक्रिय भी नहीं होते हैं। खास सेल पाने के बाद ही वे उनसे जुड़कर शरीर

के अपने लड़ने की क्षमता को पहले रोक देते हैं। इससे वायरस को शरीर के अंदर प्रवेश कर

अपनी ताकत बढ़ाने का मौका मिल जाता है।

आवरण के प्रोटिन को तोड़कर वायरस को रोका जा सकेगा

आईआईटी मंडी की टीम ने अलग अलग परिस्थितियों में इस वायरस की जांच की है।

इसी के आधार पर उसकी रासायनिक संरचना को स्पष्ट किया जा सका है। इसे समझने

के लिए जांच दल ने सर्कुलर डॉईक्रोरिज्म स्पेक्ट्रोस्कोपी विधि का इस्तेमाल किया है। साथ

ही फ्लूरोसेंट स्पेक्ट्रोस्कोपी और मॉलिक्यूलर डायनामिक्स के जरिए पूरी प्रक्रिया को

समझा गया है। इसी प्रक्रिया के तहत एनएसपी 1के आचरण को बारे में यह जानकारी

मिली है कि वह वायरस को बचाने वाले कवच में होने के साथ साथ इंसानी शरीर की

प्रतिरोधक क्षमता को रोककर वायरस को अंदर जाने का रास्ता प्रदान करता है।

आईआईटी मंडी की इस शोध टीम में प्रो गिरि के अलावा अमित कुमार, अंकुर कुमार,

प्रतीक कुमार और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की नेहा गर्ग भी शामिल थे।

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