भारत में चल रहे प्रयोग से बदलेगी तकनीक एयर कंडिशनर बिगाड़ रहे हैं पर्यावरण

भारत में चल रहे प्रयोग से बदलेगी तकनीक
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  • पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान

  • जीतने वाले को तीस लाख डॉलर

  •  20 खरब डॉलर का बाजार खुला है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः भारत में हवा ठंडा करने की नई तकनीक पर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है।

यह सरकारी स्तर का प्रयास है। इसके सफल होने के बाद लोगों को अपने घरों में एयर कंडिशनर बदलना पड़ेगा।

वर्तमान में यह समझा जा रहा है कि तेजी से देश के पारिस्थितिकीतंत्र के बिगड़ने की खास वजह

इन्हीं एयर कंडिशनरों का बढ़ता इस्तेमाल भी है।

भारत सरकार के विज्ञान विभाग ने इसके लिए एक प्रतियोगिता भी आयोजित की है।

यह प्रतियोगिता सिर्फ इसी मुद्दे पर प्रथम पुरस्कार जीतने वाले को तीस लाख डॉलर का ईनाम देगी।

इस पर काम करने के लिए दो साल की समय सीमा निर्धारित की गयी है।

विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय ने इसी क्रम  अन्य बेहतर शोध और प्रोटोटाइप विकसित करने में सफल मॉडलों पर भी बीस बीस लाख डॉलर का ईनाम देने जा रही है।

सही पायी जाने वाली विधि के व्यापारिक तौर पर विकसित करने पर भी अलग से दस लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की जाएगी।

मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खास तौर पर यह काम घरेलू एयर कंडिशनिंग के लिए ही मान्य होगा।

केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने एक समारोह में इस पहल की घोषणा की है।

उन्होंने कहा है कि पूरी दुनिया में इस एयर कंडिशनिंग की परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए वैश्विक प्रयास करने का समय आ गया है।

इसलिए हमें अत्यधिक बेहतर किस्म की एयर कंडिशनिंग की दूसरी विधि खोजनी पड़ेगी, जो पर्यावरण को और अधिक नुकसान नहीं पहुंचाये।

लोगों को सुविधा प्रदान करने के लिए ठंडक जरूरी है।

इसलिए वैकल्पिक उपायों पर काम होना चाहिए ताकि लोगों की जरूरतें पूरी होने के साथ साथ

पर्यावरण को हो रहे नुकसान को भी रोका जा सके।

भारत की इस पहल के साथ जुड़े हैं कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थान भी

एक आंकड़े के मुताबिक पूरी दुनिया में इस वक्त घरेलू इस्तेमाल में आने वाले एयर कंडिशनरों की संख्या करीब 12 खरब हो चुकी है।

इनके नियमित इस्तेमाल से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है।

साथ ही आधुनिक गाड़ियों के एयर कंडिशनिंग भी वातावरण को दूषित कर रहे हैं।

वर्ष 2050 तक घरेलू एयर कंडिशनरों की संख्या में एक खरब की और बढ़ोत्तरी हो सकती है।

इससे निपटने के लिए भारत सरकार ने अपनी तरफ से यह पहल की है।

इस प्रतियोगिता को कई विश्वस्तरीय संस्थानों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

इनमें रॉकी माउंटेन इंस्टिट्यूट, कंजरवेशन एक्स लैब्स, सीइपीटी विश्वविद्यालय शामिल हैं।

प्रतियोगिता के आयोजन से जुड़े रॉकी माउंटनेस इंस्टिट्यूट के वरीय पदाधिकारी इयान कैम्पवेल ने कहा कि

इस प्रतियोगिता के महत्व को दूसरे व्यापारिक नजरिए से भी देखना चाहिए।

इस ईनाम को जीतने वाले व्यक्ति अथवा संस्था को

पूरी दुनिया में एयर कंडिशनिंग के करीब 20 खरब डॉलर के बाजार पर कब्जा करने का एकाधिकार भी प्राप्त हो जाएगा।

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