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वृहस्पति ग्रह का गहरा लाल दाग वैज्ञानिकों का आकर्षण

  • लाल गड्डा आकार में पृथ्वी से भी बड़ा

  • जबर्दस्त तूफान है 560 किमी प्रति घंटा

  • दूसरी तरफ से लगातार बन रहा है बबंडर

  • हब्बल टेलीस्कोप से साफ नजर आया ग्रह का नजारा

रांचीः वृहस्पति ग्रह की नई तस्वीरें सामने आयी है। पहली बार इस ग्रह को इतने साफ

तरीके से देखा गया है। इन तस्वीरों और वहां से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण तो पहले

से ही चल रहा था। अब जाकर वहां के एक खास स्थान ने वैज्ञानिकों का ध्यान आकृष्ट

किया है। यह स्थान तस्वीर में करीब बीच में एक लाल केंद्र के तौर पर नजर आ रहा है।

यह विशाल लाल रंग का इलाका क्या है, इस बार में अभी और आंकड़े जुटाये जा रहे हैं।

तकनीकी अनुमान के मुताबिक जिस लाल रंग के इलाके की बात हो रही है वह तस्वीरों में

छोटा दिखने के बाद भी दरअसल करीब 15,800 किलोमीटर लंबा है।

नासा के हब्बल टेलीस्कोप ने इस ग्रह की तस्वीरें ली है। इस बार जो तस्वीरें आयी हैं, उनमें

काफी स्पष्टता है। इसी वजह से आधुनिक तरीके से इन तस्वीरों का विश्लेषण और

वर्गीकरण किया जा सका है। इसी क्रम में वह लाल गड्डा नजर आया है, जो आकार में

काफी बड़ा है। यह क्यों है और क्या है, इस बारे में अभी सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सका

है। इस पर रिसर्च कर रहे दल ने बताया है कि इसके अन्य आंकड़ों के विश्लेषण से वहां चल

रहे एक बड़े तूफान का भी पता चला है। सफेद रंग का यह तूफान काफी तेज है और यहां से

यह अनुमान लगाया गया है कि उसकी गति करीब 560 किलोमीटर प्रति घंटे की है। पृथ्वी

के लिहाज से इस गति का तूफान निश्चित तौर पर विनाशकारी है। वैज्ञानिकों ने बताया है

कि पहली बार यह तूफान अगस्त के मध्य में नजर आया था।

वृहस्पति ग्रह पर तूफान का पता भी पहले लगा था

यह तूफान वृहस्पति ग्रह के एक खास स्थान के ऊपर से गुजर रहा था। इस बार भी तूफान

ठीक उसी स्थान पर बनता और गुजरता हुआ दिख रहा है। लेकिन इसी खास स्थान पर ही

बार बार तूफान क्यों हैं, इस बारे में अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका है। लेकिन

तूफान की गति से अनुमान बताता है कि पृथ्वी के वायुमंडल के लिहाज से ऐसा तूफान

पृथ्वी पर भीषण तबाही ला सकता है।

लाल निशान और इस तूफान पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक यह भी देख पाये हैं कि तूफान

के पीछे पंख जैसा नजारा इससे पहले नहीं देखा गया था। अजीब स्थिति यह है कि तूफान

जिस दिशा से घूम रहा है, उसके ठीक विपरीत दिशा से पंख जैसी स्थिति बनती दिख रही

है। इसे देखने वाले वैज्ञानिकों का प्रारंभिक अनुमान है कि जो लाल गड्डा दिख रहा है,

उसके ठीक विपरीत ध्रुव के इलाके से ही यह तूफान पैदा हो रहा है और यह दोनों ध्रुवों में

किसी खास अंतर की वजह से यह बार बार पैदा होता रहता है। जो लाल निशान नजर

आया है, वह वृहस्पति ग्रह का दक्षिणी ध्रुव का इलाका है यानी यह तूफान ग्रह के उत्तरी

ध्रुव से पैदा होता है।

उत्तरी ध्रुव से उठा तूफान दक्षिण की तरफ आता है

दूर से काफी आकर्षण नजर आने वाले इस लाल इलाके के बारे में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर

दिया है कि तस्वीर में छोटा नजर आने के बाद भी अकेला यह इलाका ही पृथ्वी से बड़ा है।

गत 25 अगस्त को हब्बल टेलीस्कोप से यह तस्वीर स्पष्ट होने के बाद से ही उसके

विश्लेषण का काम जारी है। यह विशाल लाल इलाका भी एक गति पैदा कर रहा है जिससे

तूफान के बादल उससे अलग और उलट दिशा में होते हुए आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन यह

इलाका शायद धीरे धीरे छोटा होता है, ऐसा वैज्ञानिकों का अनुमान है। ऐसा अनुमान वर्ष

1930 में मिले आंकड़ों से मिलान के आधार पर लगाया गया है। शोधकर्ता मानते हैं कि

लाल रंग का यह अंडाकार इलाका अपने नीचे भी एक नया इलाका तैयार कर रहा है। इसे

छोटे आकार का लाल गड्डा माना गया है। लेकिन यह छोटा गड्डा लाल से सफेद और

सफेद से लाल होता रहता है। ताजा तस्वीर में यह इलाका अभी लाल और नीले रंग के

मिश्रण से बने रंग के जैसा नजर आ रहा है और लाल रंग की तरफ गहरा होता जा रहा है।


 

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