लाल डायरी से कौन से लोग वाकई परेशान हो रहे हैं

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  • सारडा चिट फंड कांड के मुख्य अभियुक्त ने किया है इंकार

  • सबसे पहले जावडेकर ने किया है उल्लेख

  • देवयानी को रिमांड पर लेना चाहती है सीबीआइ

  • बयान में असम के हेमंत विश्वशर्मा का है नाम

एस दासगुप्ता

कोलकाताः लाल डायरी की चर्चा लगातार हो रही है।

पहले ही एक केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने किसी लाल डायरी और पेन ड्राइव का उल्लेख किया था।

अब सीबीआइ ने सारडा कांड की एक अन्य अभियुक्त देवयानी के हवाले से

इस डायरी के होने का दावा किया है।

दूसरी तरफ अदालत में उपस्थित मुख्य अभियुक्त सुदीप सेन ने

स्पष्ट कर दिया कि ऐसे किसी डायरी अथवा पेन ड्राइव की जानकारी कमसे कम उन्हें नहीं है।

उनसे इस बारे में देवयानी द्वारा दी गयी जानकारी के बारे में पूछने पर

उन्होंने कहा कि फिर तो इस बारे में हरेक को देवयानी से ही पूछना चाहिए

कि वह कौन सी डायरी की बात कर रही है।

सीबीआइ ने दिया है देवयानी के रिमांड का आवेदन

वैसे सीबीआइ ने नये सिरे से देवयानी को रिमांड पर लेने का आवेदन

अदालत में दाखिल किया है।

याद रहे कि मामला उजागर होने के बाद फरार हो चुके सुदीप सेन

और उनकी सहयोगी देवयानी को पुलिस ने अप्रैल 2013 में कश्मीर से गिरफ्तार किया था।

इससे साफ हो गया है कि जांच एजेंसियों को जिस लाल डायरी की चिंता

सता रही है, वह किसी के लिए भय का कारण है।

अब यह किसके भय का कारण है, इस पर कोलकाता बाजार गर्म है।

जाहिर तौर पर इसके लिए सबसे पहले तृणमूल से भाजपा में गये नेता

मुकुल राय का नाम आ रहा है।

दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि दरअसल नौकरी छोड़ चुकी

आइपीएस भारती घोष के भाजपा में शामिल होने के बाद

इस डायरी में कुछ रहस्य उनके भी हो सकते हैं।

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री बाबूल सुप्रियो की सारडा कांड में सहभागिता

पर भी नये सवाल उठ खड़े हुए हैं।

दस्तावेज में हेमंत विश्वशर्मा का नाम है दर्ज

दरअसल सीबीआइ में दर्ज बयान में असम के हैवीवेट मंत्री हेमंत विश्व शर्मा का नाम होने का दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक हो चुका है।

इस लिए भाजपा के आरोपों पर भी संदेह की स्थिति बनी है

क्योंकि भाजपा में शामिल होने वाली पूर्व आइपीएस भारती घोष पर

भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।

सीबीआइ के आरोप में भी अब लोग बाल की खाल निकाल रहे हैं।

सीबीआइ का आरोप है कि कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार

सारदा घोटाला के साक्ष्यों को नष्ट कर रहे हैं।

इसके उत्तर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की दलील कोलकाता में

ज्यादा स्वीकार की गयी है जिसमें कहा गया है कि

अगर उन्होंने साक्ष्य नष्ट किया है तो उसका सबूत भी

सीबीआइ को पहले प्रस्तुत करना चाहिए।

मामला गरमाने के बाद सुश्री बनर्जी ने अपने पुलिस अधिकारी का

समर्थन करते हुए कहा कि लाल डायरी का नाम लेकर

शोर मचाने पर से डायरी बरामद नहीं हो सकती।

पहले तो जांच एजेंसी को यह बताना चाहिए कि अगर यह लाल डायरी थी

तो जब्ती सूची में उसका उल्लेख क्यों नहीं है।

लाल डायरी और पेन ड्राइव जब्ती सूची में क्यों नहीं

और अगर जब्ती सूची में ऐसे किसी डायरी अथवा पेन ड्राइव का उल्लेख नहीं है

तो केंद्रीय मंत्री को इसकी जानकारी जिस माध्यम से मिली है,

उसी माध्यम से मामले की जांच होनी चाहिए।

इस घोटाले का पता चलने के बाद कुणाल घोष, मदन मित्रा, श्रींजय बोस,

तापस पाल और सुदीप बंदोपाध्याय को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था।

कभी ममता के खास रहे मुकुलराय से भी इस मामले में वर्ष 2015 में पूछताछ हुई है।

उनका नाम तृणमूल सांसद कुणाल घोष ने लिया था।

कुणाल फिलहाल जेल जाने के बाद अभी जमानत पर बाहर हैं।

भाजपा में शामिल होने के बाद से मुकुल राय से

सीबीआइ कोई पूछताछ नहीं कर रही है, यह सवाल कोलकाता में बड़ा बनकर उभर चुका है।

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