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चीन से आने वाली कंपनियों के लिए रेड कारपेट बिछाने की तैयारी में केंद्र सरकार

  • औद्योगिक विस्तार में पिछड़ रहा है झारखंड
  • जापान ने अपनी तमाम कंपनियों को चीन से बोरिया बिस्तर समेटने का फरमान सुनाया

रांची : चीन से आने वाली कंपनियों को भारत में बेहतर अवसर देने की तैयारियां केंद्र स्तर

पर प्रारंभ हो चुकी हैं। इसके लिए चुपके चुपके जमीन के आंकड़े तैयार किये जा रहे हैं, जो

यहां उद्योग स्थापित करने को इच्छुक वैसी कंपनियों के सामने रखे जाएंगे, जो चीन से

अपना कारोबार समेट रहे हैं। यह सर्वविदित है कि जापान ने अपनी तमाम कंपनियों को

वहां से बोरिया बिस्तर समेटने का फरमान सुना दिया है। साफ पता चलता है कि कोरोना

का संकट समाप्त होने के बाद कई अन्य देश भी चीन से अपना सीधा व्यापारिक संबंध

खत्म कर सकते हैं। इस मौके को देखते हुए भारत सरकार ने अपनी तरफ से सारी

तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसका मकसद चीन से कारोबार समेटने वाली कंपनियों को भारत

में बेहतर अवसर प्रदान करना है। केंद्र सरकार की तरफ से करीब 461589 हेक्टेयर जमीन

का एक बैंक बनाया जा रहा है। इसमें पहले से मौजूद 115131 हेक्टेयर जमीन शामिल हैं।

चीन से कारोबार समेटने वाली कंपनियों को बुलाने के लिए दूत नियुक्त

यह जमीन सिर्फ गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडू और आंध्रप्रदेश में है। इससे स्पष्ट है कि

केंद्र सरकार का फोकस आने वाले उद्योगों को इन्हीं राज्यों में स्थान देना है। इन राज्यों से

आंकड़ा लेने के बाद चीन से कारोबार समेटने वाली कंपनियों को अलग से प्रस्ताव देने के

लिए भी दूत नियुक्त किये जा रहे हैं। ऐसी जमीन निर्धारित की गयी है, जिसमें विदेशी

कंपनियों को अपने उद्योग लगाने में जमीन संबंधी किसी परेशानी का सामना नहीं करना

पड़े। इससे विदेशी पूंजी निवेश का नया रास्ता खुल सकेगा। इस स्थिति का झारखंड भी

लाभ उठा सकती थी क्योंकि खनिज संरचना की वजह से झारखंड के पास अन्य राज्यों के

मुकाबले काफी बेहतर स्थिति है। झारखंड को इसके लिए चीन से आने वाली कंपनियों तक

खुद पहुंच बनाने की पहल करनी थी। साथ ही अपनी औद्योगिक नीति में इस लॉक डाउन

का फायदा उठाकर आवश्यक सुधार भी कर लेने थे। लेकिन अब तक इस दिशा में ऐसी

कोई तरक्की हुई है, इसकी कोई सूचना नहीं है, सिर्फ एक उम्मीद बनकर रह गयी है।

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