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असली मुद्दों पर चर्चा विधानसभा चुनाव में गायब







असली मुद्दों को जनता के सामने रखना लोकतंत्र में विपक्ष की जिम्मेदारी है। झारखंड

के विधानसभा चुनाव में विपक्ष अब तक सही तरीके से अपनी इस जिम्मेदारी का पालन

नहीं कर पाया है। इस वजह से झारखंड के प्रथण चरण का चुनाव करीब आने के बाद भी

विपक्ष अपने पक्ष में माहौल नहीं बना पा रहा है। जो चंद नेता चुनावी दौड़ में आगे दिख

रहे हैं, वे सिर्फ व्यक्तिगत प्रयास से भी आगे भागते नजर आ रहे हैं। कुछ स्थानों पर

भाजपा की आंतरिक गुटबाजी की वजह से भी विपक्ष के प्रत्याशियों को यह बढ़त मिली

हुई है। अलबत्ता भाजपा की बात करें तो अब भी भाजपा को सिर्फ भाजपा से ही चुनौती

मिलती दिख रही है।

पलामू सहित जिन इलाकों में यह प्रथम चरण का चुनाव होने जा रहा है, वहां असली मुद्दों

पर अब तक सार्थक बहस तक प्रारंभ नहीं हो पायी है। दोनों खेमा सिर्फ एक दूसरे पर

आरोप लगाने तक सीमित है। इससे जनता अपने सवालों को गुम होते देख हैरान और

परेशान है। इसकी गहराई में जाने पर यह बात भी सामने आती है कि दरअसल वर्तमान

राज्य सरकार के खिलाफ आरोप लगाने के बाद भी उसके घोर विरोधी यह नहीं कह सकते

कि पिछले पांच वर्षों में इस राज्य में कुछ भी नहीं हुआ है।

जिन वास्तविक मुद्दों ने इस बार के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा

को दोबारा से विजयी बनाया है, उन मुद्दों पर सवाल उठाना कठिन काम है। उज्ज्वला

योजना और किसानों को आर्थिक मदद और आयुष्मान जैसी योजनाओं ने सीधे ग्रामीण

जीवन पर असर डाला है। लिहाजा इन मुद्दों पर तो सरकार की आलोचना कतई नहीं की

जा सकती क्योंकि इन योजनाओं से सीधे तौर पर लाभान्वित होने वालों की संख्या कोई

कम नहीं है।

असली मुद्दों को उठाने में पिछड़ रहा है विपक्ष भी

दूसरी तरफ जिन मुद्दों पर इस सरकार को घेरा जा सकता है, उन मुद्दों पर लगातार बोलने

की तैयारी भी विपक्ष के पास नहीं है। यह ऐसे मुद्दे हैं जिसपर बिना अध्ययन के कुछ भी

बोलना अपने लिए परेशानी मोल लेने की बात होगी। नतीजा है कि सिर्फ एक दूसरे पर

आरोप लगाने तक ही सारा चुनाव प्रचार सीमित है।

वैसे यह स्थिति सभी इलाकों में नहीं हैं। कुछ इलाकों में जहां विधायकों ने वाकई काम

किया है, वे अपनी उपलब्धियों के दम पर जनता के बीच जा रहे हैं। इनमें से एक इलाका

छत्तरपुर भी है, जहां भाजपा के बागी नेता राधाकृष्ण किशोर आजसू की टिकट पर चुनाव

मैदान में डटे हुए हैं। भाजपा द्वारा उनका टिकट काटे जाने के पूर्व ही उन्होंने भाजपा नेता

के तौर पर अपने काम का एक रिपोर्ट कार्ड जारी किया था।

इस पुस्तक में उन्होंने उग्रवाद प्रभावित छत्तरपुर-पाटन विधानसभा क्षेत्र का

सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन को दूर करने की चुनौती और अन्य कार्यों का लेखा

जोखा दिया है। राष्ट्रीय उच्च पथ, राजकीय उच्च पथ, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना

तथा राज्य संपोषित सड़क योजना के माध्यम से लगभग 430 किलोमीटर सड़कों का

निर्माण, शिक्षा के क्षेत्र में छत्तरपुर में डिग्री महाविद्यालय की स्वीकृति एक

महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जिंजोई, सदाबह, चोरडंडा, बतरे, सुखनदिया, चुचरूमाड़

तथा खड़ार जैसी सिंचाई योजनाओं का वृहद संरक्षण कराकर सिंचाई क्षमता में

वृद्धि की गई है।

छत्तरपुर की घटना से भाजपा के पास कहने को कुछ नहीं

चेतमा, डगरा, कुहकुह, पथरा, खजुरी जैसे उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस पिकेट

स्थापित कराकर उग्रवाद पर नियंत्रण प्राप्त करने का सार्थक पहल किया गया। इनका

उल्लेख ही भाजपा के लिए परेशानी का सबब है क्योंकि छत्तरपुर-पाटन विधानसभा क्षेत्र

की जनता को इन दावों की सच्चाई अपनी आंखों से दिख रही है। श्री किशोर ने मुख्यमंत्री

ग्राम सेतु, विशेष केंद्रीय सहायता, अनाब( तथा विधायक कोटे की राशि से पुल-पुलिया व

पीसीसी पथ का निर्माण कराकर आवागमन को सुलभ बनाने का जो दावा किया है, वह

भी खुली आंखों से दिख रहा है। इन 5 वर्षों के दरम्यान छत्तरपुर-पाटन विधानसभा क्षेत्र

में लगभग 18763 लाभुकों को प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति और 23500 लाभुकों को

उज्जवला योजना के अंतर्गत निशुल्क गैस चूल्हा व सिलेंडर उपलब्ध कराकर ग्रामीण

क्षेत्रों की तस्वीर बदलने का ईमानदार प्रयास किया गया है। इसलिए भाजपा खुद भी

राजद से आये नेता की पत्नी को टिकट देने बाद श्री किशोर के दावों का खंडन करने की

स्थिति में नहीं है।

दूसरी तरफ विरोधी दलों के लोग वर्तमान राज्य सरकार अथवा विधायक की नाकामियों

के बारे में तथ्यात्मक तौर पर कहीं भी कुछ नहीं कह रहे हैं। दरअसल यह स्थिति भी

भारतीय राजनीति के चारित्रिक पतन का द्योतक है। इस दौर में सकारात्मक कथन

और आचरण को छोड़ नेता खास तौर पर चुनाव के दौर में कीचड़ उछालकर अपनी गोटी

लाल करना चाहते हैं। इसी वजह से जनता के असली मुद्दों पर बोलना किसी को रास नहीं

आता। दूसरी तरफ असली मुद्दों पर किसी पक्ष से कोई ठोस योजना सामने नहीं आने की

वजह से भी जनता भ्रमित ही रहती है।



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