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राष्ट्रीय खबर के राजनीतिक संपादक ने प्रधानमंत्री मोदी को पुस्तक भेंट की

नईदिल्लीः राष्ट्रीय खबर के राजनीतिक संपादक और वरिष्ठ पत्रकार रासबिहारी ने गत

दिनों कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी तीन पुस्तकें भेंट की। इन पुस्तकों में

बंगाल की खूनी राजनीति पर गहराई से प्रकाश डाला गया है। तीन पुस्तकों में वहां की

राजनीति और राजनीतिक हिंसा पर ही विस्तार से चर्चा की गयी है। अपने अत्यंत व्यस्त

कार्यक्रमों के बीच भी गत 23 जनवरी को श्री मोदी ने इन पुस्तकों के लिए रासबिहारी की

सराहनी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा से उनका उत्साह बढ़ा है और

भविष्य में वह अपने पत्रकारिता जीवन के अनुभवों के आधार पर आगे भी पुस्तक लिखने

का काम करेंगे।

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा के गोवर्धन में जन्मे रास बिहारी ने हरियाणा के

पलवल और फ़रीदाबाद में शिक्षा प्राप्त की। करीब चार दशक पूर्व पढ़ाई के दौरान ही

उन्होंने अग्रणीय पत्र-पत्रिकाओं में लिखने की शुरुआत कर दी थी। शुरूआती दौर में उन्होंने

पंजाब केसरी और दैनिक ट्रिब्यून अखबार में लिखते हुए अपनी कलम की धार को तेज

किया। कुछ अखबारों से जुड़ने के बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान,नई दिल्ली से

जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में

पोस्ट ग्रेजुएशन किया। 1988 में कुछ समय वीर अर्जुन अखबार में रहे। 1988 से 2008

तक वह वह दैनिक हिन्दुस्तान में विभिन्न पदों पर रहे। मेरठ और गुरूग्राम में हिन्दुस्तान

अखबार के प्रभारी रहे हैं। नई दुनिया अखबार की दिल्ली-एनसीआर लॉंचिंग टीम के वे

महत्वपूर्ण स्तम्भ रहे और मेट्रो संपादक के पद पर रहते हुए नई दुनिया को दिल्ली में एक

अलग पहचान और मुकाम पर स्थापित किया।

राष्ट्रीय खबर के पूर्व कई प्रमुख पदों पर भी रहे हैं वह

रास बिहारी अब तक गवर्नेंस नाउ के वरिष्ठ संपादक, हिन्दुस्थान समाचार के कार्यकारी

संपादक, और रांची एक्सप्रेस में वरिष्ठ संपादक/ राजनीतिक संपादक के पद पर कार्य कर

चुके हैं। रासबिहारी लम्बे समय तक दिल्ली पत्रकार संघ के अध्यक्ष और महासचिव रहे।

वर्तमान समय में वे नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) के अध्यक्ष हैं।

इन तीन पुस्तकों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है

रक्तरंजित बंगाल- लोकसभा चुनाव 2019

इस पुस्तक में 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान से पहले, मतदान के दौरान और

मतदान के बाद राजनीतिक हिंसा का विस्तार से वर्णन किया गया है। 2019 में

राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों और घायलों के उदाहरण रक्तरंजित बंगाल के प्रमाण

दे रहे हैं। राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में आतंक फैलाने के लिए कैसे जगह-जगह घरों को

फूंका गया। राजनीतिक संघर्ष को लेकर हुई बमबाजी और गोलीबारी से शहर और गांवों के

लोग कैसे पूरे साल दहलते रहे। बढ़ती राजनीतिक हिंसा के साथ ही पश्चिम बंगाल में

भारतीय जनता पार्टी का बढ़ता जनाधार, वामदलों के साथ कांग्रेस का सिमटता आधार

और तृणमूल कांग्रेस की वोटों के लिए तुष्टीकरण नीति का गहराई से आकलन किया गया

है। राजनीति में अवैध हथियारों और काला धन के बढ़ते प्रभाव को उजागर किया गया है।

राजनीति चमकाने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र सरकार,

राज्यपालों, चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों पर हमलों का सटीक विश्लेषण।

बंगाल- वोटों का खूनी लूटतंत्र

पश्चिम बंगाल में नक्सलवाद पनपने के बाद पिछले 50 वर्षों की राजनीतिक हिंसा से पूरी

तरह परिचित कराती पहली पुस्तक। 1967 में किसानों के आंदोलन, उद्योगों में बंद और

हड़ताल, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों में बमों के धमाके तथा रिवाल्वरों से

निकलती गोलियों के साथ अराजकता भरे आंदोलनों की जानकारी। 1972 में कांग्रेस के

मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय के दमनचक्र के बाद 1977 में वाम मोर्चे की सरकार के गठन

के बाद राजनीतिक हिंसा का विस्तृत विवरण। माकपा ने त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था

लागू करने के बाद किस तरह राजनीतिक हिंसा के सहारे सत्ता पर पकड़ बनाए रखी।

1978 से 2018 तक हुए नौ पंचायत चुनावों के दौरान हत्याओं और हिंसा का पूरी जानकारी

के साथ 2013 और 2018 में सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस द्वारा पंचायत चुनाव में वोटों

की खूनी लूट का पुस्तक में खुलासा किया गया है। वर्तमान में वह दिल्ली में रहते हुए

राष्ट्रीय खबर के लिए विशेष रिपोर्ट लिखा करते हैं। 

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