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दुर्लभ किस्म की स्क्विड कैद हुआ गहरे समुद्र के रोबोट कैमरा में




उस गहराई में सूर्य की रोशनी भी नहीं पहुंचती
अंधेर में रोशनी से चमकते हैं उसके शरीर के कोष
आकार को भी बदलकर चमका देने में माहिल है यह प्राणी
गहराई में काम करने वाले रोबोट के कैमरे में कैद हुआ यह जीव
राष्ट्रीय खबर

रांचीः दुर्लभ किस्म के स्क्विड को समुद्र की गहराई में देखने का मौका मिला है। दरअसल अत्यंत




गहरे समुद्र में कुशलता के साथ काम करने वाले एक पानी के रोबोट में लगे कैमरे ने इस अजीब से

प्राणी को कुछ देर के लिए अपने कैमरे में कैद किया है।

इस बार जिस समुद्री जीव को देखा गया है, उसके बारे में विवरण तो पहले से दर्ज हैं लेकिन काफी

दिनों के बाद उसे कैमरे में कैद किया जा सका है। दरअसल समुद्र की जिस गहराई में यह प्राणी रहता

है, वहां तक धरती पर सांस लेने वाले किसी प्राणी का पहुंच पाना संभव नहीं होता।

वहां पानी का दबाव भी अत्यधिक होने की वजह से किसी गोताखोर के लिए भी वहां पहुंचना संभव

नहीं है। इसी गहराई में काम करते हुए रोबोट ने इस जीव को अपने कैमरे में कैद किया है।

दुर्लभ किस्म का यह स्क्विड कैमरे की नजर के सामने अचानक ही आ गया था। इसी वजह से उस

दृश्य को रिकार्ड किया जा सका।

वर्ष 2019 में स्मिड्थ ओशन इंस्टिट्यूट ने एक ऐसा पानी का रोबोट तैयार किया जो इस गहराई तक

पहुंचने के बाद भी अच्छी तरह काम कर सकता है। इस रोबोट का नाम रोव सुबास्टियन है।

इस यंत्र ने पहले भी कई अजीब किस्मों का नजारा हमें दिखाया है। इसमें पारदर्शी किस्म के स्किवड

को देखना शामिल है। अब मिली जानकारी के मुताबिक इस रोबोट ने करीब चार हजार मीटर की

गहराई में शोध करते वक्त इस दुर्लभ किस्म के जीव को अपने कैमरे में कैद कर लिया। इस गहराई

में सूर्य की किरणें भी नहीं पहुंच पाती हैं। जिस दुर्लभ किस्म के स्क्विड को देखा गया है, से वैज्ञानिक

परिभाषा में प्लैंक्टोथियूदिस कहा जाता है।




दुर्लभ किस्म का यह जीव गहरे पानी में ही रहता है

इस जीव के बांह अपेक्षाकृत बहुत छोटे हैं जबकि उसकी पूछ पर अजीब किस्म की धारियां बनी हुई है। कैमरे की नजर में इसके कोष चमकने लगते हैं।

दरअसल वे ऐसे कोष है जो रोशनी में ही चमकते हैं अन्यथा वह अंधेरे में पूरी तरह छिपा रहता है। इसी वजह से समुद्र की उस गहराई में इस दुर्लभ किस्म के जीव को खुली आंखों से नहीं देखा जा सकता है। वैज्ञानिक परिभाषा में इन कोषों को इरिडोफोरस कहा जाता है।

इन कोषों की विशेषता यह भी है कि यह रोशनी को अलग अलग तरंगों में फैलता है इसी वजह से वे रंग बिरंगे नजर आने लगता है। रोबोट के कैमरे की रोशनी में भी ऐसा ही हुआ है।

वैसे अब तक इस सवाल का उत्तर नहीं मिल पाया है कि घोर अंधेरे में रहने वाले इन जीवों को ऐसे चमकने की शक्ति प्रकृति ने क्यों दे रखी है। प्रयोगशाला और अन्य परीक्षण केंद्रों में जो स्क्विड रखे और पाले जाते हैं, उनसे इतने विवरण नहीं मिल पाते हैं।

समुद्र की गहराई में इस दुर्लभ किस्म के जीव को इस हालत में पहली बार न सिर्फ देखा गया है बल्कि कैमरे में उसकी तस्वीर भी रिकार्ड हुई है।

अन्य प्रजाति के स्क्विडों की तरह इस दुर्लभ किस्म के जीव को पानी में तैरते हुए देखकर एक बार में यह पता ही नहीं चलता कि यह दरअसल स्क्विड है।

वैसे इसकी पूछ इतनी लंबी क्यों हैं, इस बारे में अभी समुद्र वैज्ञानिक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाये हैं। प्रयोगशाला में रहने वाले इसी प्रजाति के अन्य स्क्विड में यह गुण देखने को नहीं मिला है।

शारीरिक बनावट को बदलकर चकमा देता है

समुद्र में जब इसे देखा गया था तो अपनी शारीरिक बनावट को उसने बदल रखा था। इसी वजह से जो तस्वीर सामने आयी है, उसे देखकर इसे लोग दुर्लभ किस्म के स्क्विड के बदले साइफोनोफोरे भी समझ सकते हैं।

शायद अपना आकार बदलने में माहिर यह जीव इसी तकनीक से हमलावरों को चकमा भी देता रहता

है। साइफोनोफोरे से आम तौर पर दूसरे बड़े हमलावर दूर रहते हैं क्योंकि उसके डंक में जहर होता है।

दूसरी तरफ इसी आकार की वजह से वह समुद्र में अपने भोजन के लायक जीवों को अपनी तरफ

आकर्षित करने में कामयाब होता है।

इससे पहले वर्ष 2014 में भी स्मिड्थ इंस्टिट्यूट ने एक अजीब किस्म के स्क्विड को कैमरे में कैद

किया था। पिछले साल भी इसे एक झलक देख पाने में वैज्ञानिक सफल हुए थे। इन घटनाक्रमों से

यह फिर से साबित हो जाता है कि समुद्र की गहराई के बारे में हम अब तक बहुत कम ही जान पाये

हैं। इस कारण हर बार हमें नई नई जानकारी मिलती रहती है। 



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