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रैपिड टेस्टिंग किट का इस्तेमाल अंतिम समय में रोका गया

  • असम में 22 से प्रारंभ होना था त्वरित परीक्षण

  • भारत सरकार ने उपलब्ध कराये 9600 किट

  • 15-20 मिनट में जांच परिणाम बताते हैं यह

  • दूसरी परीक्षण विधि अन्य इलाकों में चलेगी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः रैपिड टेस्टिंग किट का इस्तेमाल असम सरकार आज यानी 22 अप्रैल से करने

जा रही थी। लेकिन आइसीएमआर का निर्देश प्राप्त होने के बाद अंतिम समय में इसे

रोकना पड़ा है। वहां से दो दिनों तक इन किटों का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश जारी

किया गया है। इस टेस्ट किट का लाभ यह है कि यह मात्र 15 से 20 मिनट के भीतर

कोरोना संक्रमण की पुष्टि कर सकती है। चीन से लाये गये इन किटों में से 9600 किट

असम भेजे गये हैं। इनका इस्तेमाल उन इलाकों में किया जाएगा, जहां संक्रमण के मरीज

पाये गये हैं। इन इलाकों में मरीज के संपर्क में आने वालों का इसके माध्यम से पहले

परीक्षण होगा। इसका मकसद संक्रमण कहां तक फैला है, उसका पता लगाना है।

वर्तमान में इस बीमारी की जांच के लिए दो टेस्ट का नाम सबसे ज्यादा लिया जा रहा है

रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट और पीसीआर टेस्ट। इनमें सबसे बड़ा फर्क यह है कि जब किसी

व्यक्ति को कोई बीमारी होती है, तो शरीर उससे लड़ने के लिए शरीर में एंटीबॉडी बना लेता

है। इस तरह रक्त में संबंधित एंटीबॉडी मिलने से व्यक्ति के उस बीमारी से संक्रमित होने

का संकेत मिलता है। लेकिन यह अन्य बीमारियों के कारण भी हो सकता है। इसीलिये इस

चरण में संक्रमण होने की आशंका वाले व्यक्ति का पीसीआर टेस्ट किया जाता है। यह

डीएनए पर आधारित विश्लेषण कर कोरोना की पुष्टि करता है, जिसमें शक की कोई

गुंजाइश नहीं बचती। इसे अंतिम और प्रामाणिक माना जाता है। असम स्वास्थ्य विभाग

गुवाहाटी में स्पेनिश गार्डन से परीक्षण शुरू करेगा। असम के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हिमंत

बिस्वा सरमा ने सभी से अपील की कि स्वास्थ्य आपातकाल को ध्यान में रखते हुए किटों

पर कोई विवाद न खड़ा करें।

रैपिड टेस्टिंग किट पर हिमंत बिस्वा सरमा ने दी जानकारी

भारत सरकार ने हमें 9,600 रैपिड टेस्टिंग किट भेजे हैं, जिन्हें चीन से आयात किया गया

था। ये 15-20 मिनट में परिणाम देते हैं। सरमा ने कहा कि हम स्वतंत्र रूप से

आईसीएमआर से मान्यताप्राप्त चीनी कंपनियों से इस तरह के किट आयात करने की

कोशिश कर रहे हैं। हालांकि यह परीक्षण गैर-पुष्टित्मक है, यह नियंत्रण क्षेत्रों में बड़े पैमाने

पर निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि यह 15 मिनट में परिणाम देता

है। सरमा ने कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के मुताबिक जिस

व्यक्ति में कोरोना संक्रमण की आशंका होती है, उसके गले या नाक के अंदर से कॉटन के

जरिए सैंपल लेकर उसकी जांच की जाती है। सैंपल गले या नाक से इसलिए लिया जाता है

क्योंकि कोरोना का वायरस इन्हीं जगहों पर सबसे ज्यादा सक्रिय होता है। ICMR के

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर रमन आर गंगाखेड़कर के मुताबिक सैंपल को एक विशेष रसायन

में डाला जाता है, जिसमें कोशिकाएं वायरस से अलग हो जाती हैं। व्यक्ति को किसी दूसरी

बीमारी का संक्रमण हो सकता है। यही कारण है कि इस स्तर पर मिले वायरस का कोरोना

वायरस के लक्षणों का मिलान किया जाता है। अगर मिले वायरस कोरोना वायरस के

लक्षण वाले हुए तब व्यक्ति को कोरोना होने की पुष्टि हो जाती है ।सबसे पहले स्वास्थ्य

विभाग ने इसकी शुरुआत गुवाहाटी में स्पैनिश गार्डन और एंथगाँव मस्जिद एरिया से की

जाएगी।

जहां मरीज मिले थे वहां से शुरु होना था अभियान

लेकिन रैंडम किसी का भी टेस्ट नहीं किया जाएगा, बल्कि जिसके अंदर किसी तरह का

कोरोना संक्रमण का लक्षण मिलेगा, उसी को टेस्ट के लिए चुना जाएगा।उसके बाद असम

के कोरोनावायरस रेड ज़ोन क्षेत्र रैपिड एंटीबॉडी परीक्षण शुरू करेंगे।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है

कि रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट कोरोना के लिए अंतिम नहीं माना जाता है। यह केवल संक्रमण के

बाद एंटीबॉडी बनने का लक्षण होता है। संक्रमण के बाद एंटीबॉडीज बनने में एक हफ्ते तक

का वक्त लग सकता है, इसलिए उसके पहले किए गए टेस्ट से सही जानकारी नहीं

मिलती। अगर कोई व्यक्ति इस स्तर पर संक्रमित पाया जाता है तो पीसीआर टेस्ट कर

उसके संक्रमण की सही स्थिति पता की जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी स्पष्ट

किया है कि रैपिड टेस्टिंग आवश्यक एरिया में ही की जाएगी और इन टेस्ट में पॉजिटिव

पाए गए लोगों की अन्य तरीकों से भी जांच कर संक्रमण की पुष्टि की जाएगी।

पूर्वोत्तर के अधिकांश इलाके संक्रमण से मुक्त

यह यहाँ उल्लेख है कि पूर्वोत्तर के असम के 33 जिलों में से 11 जिलों में कोरोना संक्रमण

के मामले आए हैं जबकि 22 जिले सुरक्षित हैं।वहीं, अरुणाचल प्रदेश के भी ज्यादातर जिले

कोरोना मुक्त हैं। मणिपुर के 16 जिलों में से पश्चिम इंफाल और थाबल में कोरोना के

मामले सामने आए हैं जबकि बाकी प्रदेश कोरोना मुक्त है। मेघालय के 11 में से 1 जिले में

कोरोना का मामला सामने आया है और ऐसे ही मिजोरम के 8 जिले में से एक जिले में

कोरोना केस मिला है। वहीं, त्रिपुरा के 8 जिले में से 2 जिले ही कोरोना के चपेट में हैं।असम

कुल 33 में से 23 जिले कोरोना से सुरक्षित हैं. संक्रमित जिले – कछार, धुबरी, ग्वालपाड़ा,

गोलाघाट, कामरूप, कामरूप मेट्रो, करीमगंज, लखीमपुर, मैरिगॉव और नलबाड़ीl सुरक्षित

जिले – बक्सा, बारपेटा, बिश्वनाथ, बोंगईगांव, चराईदेव, चिरांग, दरांग, धेमाजी, डिब्रुगढ़,

दिमा हसाओ, हैलाकांडी, होजई, जोरहाट, कोकराझार, माजुली, नागौन, सिवसागर,

सोनितपुर, दक्षिणी सलमारा-मनकाचर, तिनसुकिया, उदलगुड़ी, पूर्वी कार्बी आंगलोंग और

पश्चिमी कार्बी आंगलोंग।


 

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