रांची के ज्यूडिशियल अकादमी को लेकर सुगबुगाहट फिर शुरू

रांची ज्यूडिशियल अकादमी
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  • नये सिरे से फाइल खोल सकते हैं वर्तमान मुख्य न्यायाधीश

  • जस्टिस पीके मोहंति ने की थी जांच की सिफारिश

  • नये मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिरूद्ध बोस

  • पांच सितारा सुविधाओं के खर्च पर उठे थे सवाल

संवाददाता

रांची: रांची के ज्यूडिशियल अकादमी का मामला फिर से अंदर ही अंदर गरमाने लगा है।

समझा जाता है कि नये मुख्य न्यायाधीश के तौर पर न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस के सक्रिय होने के बाद

इस मामले को दोबारा देखा जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पीके मोहंति और न्यायमूर्ति डीएन पटेल के बीच छत्तीस का रिश्ता हो गया था।

इस अकादमी के मामले की न्यायमूर्ति मोहंति ने जांच की सिफारिश की थी।

बाद में उनका तबादला होने पर डीएन पटेल ही मुख्य न्यायाधीश के प्रभार में थे। लिहाजा यह मामला दबा हुआ रहा।

उच्च न्यायालय के सूत्रों की मानें तो जस्टिस डीएन पटेल खुद भी यहां से जाना चाहते हैं

ताकि इस ज्यूडिशियल अकादमी के मामले से उनका पीछा छूटे।

लेकिन अभी गुजरात में उनके आगे दो और जज कतार में हैं।

लिहाजा अभी जस्टिस पटेल को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति पाने में समय लगना तय है।

इस बीच अदालतों के पदोन्नति के खेल के माहिर खिलाड़ी अकादमी के मामले को गरमा देना चाहते हैं

ताकि कई लोगों को एक साथ इसकी जांच की चपेट में लिया जा सके।

इस अकादमी के निर्माण के मामले में प्रारंभ से ही विवाद की स्थिति रही है।

इसकी निविदा और निष्पादन पर भी उच्च न्यायालय के कई न्यायाधीशों तक को आपत्ति रही है।

इस परिसर के अंदर पांच सितारा सुविधाएं उपलब्ध कराने के मद में हुए खर्च पर भी अनेकों बार सवाल उठे हैं।

इन्हीं शिकायतों की वजह से पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने मामले की जांच की सिफारिश कर दी थी।

बाद में जब खुद न्यायमूर्ति पटेल ही इसके प्रभारी मुख्य न्यायाधीश बने

तो मामले ठंडे बस्ते में चला गया था।

अब नये मुख्य न्यायाधीश के आने से बस्त में बंद यह मामला फिर से बाहर आने की जुगत में लगा है।

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