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छठ पूजा गाइड लाइन के विरोध में शहर में कई जगह प्रदर्शन

  • बड़ा तालाब में हेमंत सोरेन का पुतला फूंका

  • मुख्य सचिव ने जारी की है गाइड लाइन

  • पानी के इलाकों में पूजा की अनुमति नहीं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः छठ पूजा गाइड लाइन को लेकर राज्य सरकार और श्रद्धालुओँ के बीच ठन गयी है। राज्य

के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह द्वारा जारी गाइड लाइन के मुताबिक इस बार सार्वजनिक

जलागारों में कोरोना के खतरे को देखते हुए छठ पूजा की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

वीडियो में देखिये बड़ा तालाब में प्रदर्शन

अपने तीन पन्नों के इस आदेश में मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार से प्राप्त दिशा निर्देशों का

हवाला देते हुए सार्वजनिक जलागारों मसलन नदी, तालाब जैसे स्थानों पर छठ पूजा पर

रोक लगाने का यह निर्देश जारी किया है। इस बीच भाजपा ने इसे अपनी तरफ से विरोध

का नया मुद्दा बना दिया है। खुद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्य सभा सांसद दीपक

प्रकाश ने इसके खिलाफ बयान दिया है। स्थानीय सांसद संजय सेठ एवं रांची के कई

विधायकों ने बटन तालाब के जल में उतरकर इस फैसले का विरोध किया है। इसी क्रम में

आज स्थानीय अलबर्ट एक्का चौक पर भी रांची छठ पूजा समिति द्वारा एक हस्ताक्षर

अभियान चलाया गया। दूसरी तरफ भाजपा नेता राजीव रंजन मिश्र के नेतृत्व में बड़ा

तालाब में भी सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया गया। यहां पर

नाराज लोगों ने हेमंत सोरेन का पुतला भी जलाया।

छठ पूजा गाइड लाइन से गरीब पूजा नहीं कर पायेंगे

स्थानीय स्तर पर अनेक लोगों की दलील है कि गरीब परिवार के लोगों के लिए घरों में छठ

पूजा का आयोजन करना संभव नहीं है। अनेक गरीब परिवार ऐसे भी हैं, जिनके घरों में

इतनी जगह ही नहीं है कि वे छठ पूजा का आयोजन कर सके। दूसरी तरफ चिकित्सा

विज्ञान से जुडे विशेषज्ञ मान रहे हैं कि छठ पूजा के कुछ रीति रिवाज ऐसे हैं, जो कोरोना

संक्रमण को भीषण तेज गति से फैला भी सकते हैं। किसी तालाब अथवा नदी में अगर

कोई एक संक्रमित कुल्ला भी करता है तो कुछ ही देर में यह संक्रमण बगल से होते हुए

काफी दूरी पर खड़े किसी अन्य श्रद्धालु तक भी पहुंच सकता है। मौसम के बदलाव के

दौरान बार बार कोरोना का दोबारा हमला होने की चेतावनी के बीच छठ पूजा के इस गाइड

लाइन को लेकर सरकार और श्रद्धालुओं के बीच ठन गयी है। इससे पूर्व दुर्गा पूजा के मौके

पर भी माइक बजाने की अनुमति नहीं दिये जाने की वजह से लोग नाराज हुए थे। हालांकि

बाद में सरकार ने माइक बजाने पर लगे प्रतिबंध को सशर्त बदला था।


 

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