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रांची में सब्जियों के भाव समय के हिसाब से बदल रहे

  • आम जरूरत की चीजों के बढ़ गये हैं दाम

संवाददाता


रांचीः रांची में सब्जियों के औसत दाम भी समय के हिसाब के ऊपर नीचे हो रहे हैं।

दरअसल सब्जियों की बिक्री की समय सीमा तय कर दिये जाने के बाद सब्जी बाजार की शुरुआत महंगे भाव से हो रही है।

जैसे जैसे बंदी का समय करीब आता है, विक्रेता आनन फानन में सारी सब्जी बेचकर निकल जाना चाहते हैं।

सब्जियों के दाम में एकरुपता भी नहीं है क्योंकि ल़ॉकडाउन की वजह से बाहर से सब्जियों की आमद अभी कम है।

स्थानीय स्तर के सब्जी विक्रेता और उनके माध्यम से आम विक्रेता उपलब्ध स्थानीय सब्जियों की ही आपूर्ति कर रहे हैं।

इस बारे में सर्वेक्षण के दौरान कई रोचक तथ्य सामने आये हैं।

कोरोना वायरस का असर अब लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है।

पिछले कुछ दिनों में आम जरूरत की चीजों के साथ खाद्य वस्तुओं के भी दाम बढ़ें हैं।

खुद सरकार के आंकड़े बताते हैं कि खाने पीने की चीजों के दाम में पिछले एक सप्ताह और रविवार को लॉकडाउन के कारण अधिक बढ़ी है।

उपभोक्ता के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह के दौरान दाल, सब्जी और खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि दर्ज हुई है।

खुदरा बाजार में यह इजाफा और ज्यादा है। बाजार से जुड़े जानकार मानते हैं कि

राजधानी में कोरोना वायरसके कारण बाजार बंद होने से दूसरे प्रदेशों में आपूर्ति और मांग का संतुलन बिगड़ा है।

रांची में सब्जियों के साथ साथ खाद्यान्न के भी दाम बढ़े

इसकी वजह से खाने-पीने की चोजों के दाम और बढ़ सकते हैं।

सरकार के मूल्य निगरानी प्रभाग के मुताबिक दालों की कीमतों में अरहर , चावल की दाल में 20-25 रुपये किलो तक वद्धि हुई है।

बाजार में यह इजाफा 25 रुपये प्रति किलो तक है।

आंकड़े बताते हैं कि पिछले माह के मुकाबले अरहर या तूर की दाल की कीमत अधिक बढ़ी है।

इसी तरह उड़द और मूंग की दाल की कीमतों में भी काफी इजाफा हुआ है।

हरी सब्जियों का भाव अंत में घट जाता है

रांची के सब्जी बाजार में नेनुआ, परवल, भिंडी को छोड़कर

किसी भी अन्य सब्जी के दाम 40 रुपये किलोग्राम से कम नहीं हैं।

प्याज और टमाटर 40 रुपये किलो तक बिक रहे हैं।

राजधानी में सब्जियों की कीमत में बढ़ोत्तरी से आम लोगों के घरों का बजट गड़बड़ा गया है।

सब्जी बाजार में नेनुआ, परवल, भिंडी को छोड़कर किसी भी अन्य सब्जी के दाम 30 रुपये किलोग्राम से कम नहीं हैं।

प्याज और टमाटर 60 रुपये किलो तक बिक रहे हैं।

लहसुन और अदरक की कीमतें भी आसमान छू रही हैं।

अदरक और लहसुन 200 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहे हैं।

बाजार में एक सब्जी विक्रेता ने बताया कि झींगी, कद्दू, भिंडी, परवल इत्यादि

सब्जियां 40 से 50 रुपये किलो मिल रही हैं।

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण सब्जी बाजार में सब्जियां कम आ रही हैं।

वहीं एक दूसरे दुकानदार ने कहा कि सब्जियों के दाम कोरोना की वजह से बढ़ी हुई हैं।

उन्होंने कहा किउन्होंने कहा कि सब्जियों के दाम सुनते ही ग्राहक बाजार में नहीं रुक रहे हैं,

बाजार से चले जा रहे हैं।

महंगी बिक रही सब्जियों के कारण वह पर्याप्त मात्रा में खरीदारी नहीं कर पा रही हैं।

बाजार आए एक अन्य ग्राहक ने कहा कि सब्जियों के दाम पर लगाम लगाने के लिए सरकार को उचित कदम उठाना चाहिए।

एक अन्य ग्राहक ने कहा कि होना ये चाहिए था कि इस पर्व-त्योहार के समय में सब्जियां सस्ती मिलतीं।

उन्होंने कहा कि सारी सब्जियां दोगुनी से भी ज्यादा कीमत पर बिक रही हैं, उनके रसोई का बजट पूरी तरह से प्रभावित हो गया है।

लौटने के पहले दाम घटा देते हैं विक्रेता

वैसे सर्वेक्षण का नतीजा है कि अलग अलग सब्जी बाजारों में भी अभी दामों की एकरुपता नहीं है।

साथ ही दिन के दस बजने के पहले से इनके दाम कम होने लगते हैं।

इस बारे में विक्रेताओं ने साफ कर दिया कि बचा हुआ माल ढोकर वापस ले जाने से बेहतर है कि

उन्हें बेचकर घर जाया जाए ताकि अगले दिन फिर से नई खेप लेकर आया जा सके।

वैसे इस दौरान गांव देहात के अनेक उत्पादकों और विक्रेताओं ने रांची आना छोड़ दिया है।

इनलोगों ने कोरोना के संक्रमण के भय से रांची आना छोड़ रखा है।

सर्वेश्रण का निष्कर्ष है कि खादगढ़ा, नागाबाबा खटाल, डेली मार्केट में सब्जियों के भाव दूसरे बाजारों की तुलना में कम हैं।


 

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