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दिन के सन्नाटे में हैरान हैं रांची के आवारा कुत्ते

  • रात के अंधेरे में ज्यादा आक्रामक हो गया झूंड

  • भीड़ के गुम होने से ज्यादा परेशान और भूखे

  • होटल ठेला बंद होने से नहीं मिल रहा है भोजन

संवाददाता

रांचीः दिन के सन्नाटे में भी अब आवारा कुत्तों का आचरण बदला बदला सा नजर आने

लगा है। अनेक इलाकों में ऐसे कुत्ते दिन में ही पास से गुजरते चार पहिया और दो

पहिया वाहनों पर झपटने लगे हैं। दिन का उजाला होने की वजह से दो पहिया वाहन

चालकों के सकुशल निकल जाने में मदद मिली है। लेकिन कुत्तों का यह आचरण

उनपर नजर रखने वालों को भी हैरान कर रहा है। आम तौर पर इस किस्म के गाड़ियों

की तरफ झपटने का काम रात को होता है। शहर के कुछेक इलाके ऐसे भी हैं, जहां इसी

वजह से आये दिन रात को दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। इन आवारा कुत्तों को आम

दिनों में जिस तरीके से मंडराते देखा जाता था, वे स्थिति भी बदल गयी है। मुख्य सड़कों

पर अब वैसे भी आवारा कुत्ते कम नजर आते हैं। लेकिन अक्सर ही इन कुत्तों को अब

एक दूसरे के करीब देखा जा रहा है। रात का अंधेरा होते ही कुत्तों के झूंड का आकार भी

बड़ा हो जाता है। ऐसा शहर के हर इलाके में पिछले दो दिनों के सुनसान रास्तों की वजह

से हो रहा है।

दिन के सन्नाटे में कुत्तों की हरकत पर मजाक

वरना आम तौर पर यह स्थिति बड़ा तालाब और हरमू मुक्ति धाम के पास दैनंदिन

घटना थी। इसे लेकर लोग मजाक भी कर रहे हैं और कुछ लोगों को मानना है कि

सड़कों पर इंसान की भीड़ देखने को अभ्यस्त कुत्ते भी इस स्थिति को लेकर शायद

परेशान हैं। लेकिन रात के अंधेरे में उनका बदलता आचरण यह साबित कर देता है कि

अंततः वे जंगली मानसिकता के ही जानवर हैं, जो अपने किसी भी दुश्मन को घेरकर

वार करता है। कुछ लोगों का मानना है कि होटल आदि बंद होने और सड़कों पर भोजन

के ठेले नहीं लगने की वजह से भी इनके समक्ष भोजन का भीषण संकट है। शायद इस

वजह से भी वे भूखे होने की वजह से अधिक आक्रामक आचरण करने लगे हैं।

भूखे कुत्तों को भोजन देना अब एक जिम्मेदारी है- श्वेतांक सेन

वॉलीबाल के अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक एवं शहर के कई सक्रिय संगठनों के साथ जुड़े रहे

श्वेतांक सेन अब नियमित तौर पर रात को अपने आस पास के ऐसे कुत्तों को भोजन

देते हैं।  अलबर्ट एक्का चौक स्थित अपने आवास के पास रात को वह इस जिम्मेदारी

को निभाते देखे गये।  उन्होंने कहा कि इन कुत्तों की दिक्कत यह है कि सारे ठेले और

होटल बंद है। वहां से इन्हें काफी कुछ भोजन मिल जाता था। अब भूखे होने की वजह से

वे अजीब तरीके से रोते थे। इसलिए उन्हें नियमित भोजन देना चालू कर दिया है। अब

तो कुत्तों को भी टाइम पता है और ठीक समय  पर वह यहां एकजुट होना प्रारंभ हो जाते

हैं। भोजन लेने के बाद वे फिर अंधेरे में गुम हो जाते हैं।


 

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