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रांची नगर निगम की नई योजना का सांसद पोद्दार ने किया विरोध




  • बकरी बाजार में मार्केट का निर्णय डराने वाली खबर

  • नगर विकास मंत्री सी पी सिंह के नाम खुला पत्र

  • जल बचाने के लिए यहां तालाब भी बन सकता है

  • शहर में अभी नये जल भंडार तलाशे जाएं

रांची : रांची नगर निगम अपर बाजार स्थित बकरी बाजार में मार्केट और पार्किंग प्लेस बनाने का निर्णय ले रहा है।

राज्य के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह को एक खुला पत्र लिखकर राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने अपनी तरफ से इस फैसले की आलोचना करते हुए कई अन्य सुझाव भी दिये हैं।

उन्होंने कहा है कि विभिन्न सरकारी भवनों और अन्य संरचनाओं के कारण पहले ही कंक्रीट के जंगल में बदल चुके रांची शहर के लिए यह नयी खबर डराने वाली ही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदैव खुली जगहों को बचाने की बात करते हैं, बच्चों को खेलने की जगह देने की बात करते हैं।

झारखंड में भी गांवों में स्टेडियम बन रहे हैं, फिर शहर के बच्चों का अपराध क्या है?

आपको बताने की आवश्यकता नहीं कि रांची का अपर बाजार मिश्रित प्रकृति का एक घनी आबादी वाला इलाका है और इस इलाके में बकरी बाजार ही एकमात्र खुली जगह है।

आसपास के करीब 5 किलोमीटर के दायरे में कोई दूसरा खेल मैदान या खुली जगह नहीं है।

यह भी आपके स्मरण में होगा कि बकरी बाजार को खुले मैदान के रूप में विकसित करने के आग्रह के साथ मैं आपको एवं नगर विकास विभाग के अधिकारियों को कई पत्र लिख चुका हूं।

इन पत्रों में अन्य बातों के साथ इस बात का भी जिक्र है कि अग्रवाल सभा ने बकरी बाजार को

खुले मैदान के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया है और मैं स्वयं भी अपनी सांसद निधि से

इस कार्य के लिए वित्त पोषण को प्रस्तुत हूं।

ये अलग बात है कि न तो इन पत्रों के आधार पर कोई सकारात्मक कार्रवाई हुई,

न मुझे इस मामले में लिए गए किसी निर्णय से अवगत कराया गया।

नगर निगम ने आर्किटेक्ट राजीव चडढा का नाम उछाला है

श्री पोद्दार ने लिखा है कि अखबारों की खबरों के मुताबिक राजीव चड्ढा का नाम लेकर

ये जताने की कोशिश हो रही है कि ये उनकी स्कीम है।

लेकिन महोदय, श्री चड्ढा तो एक आर्किटेक्ट हैं, उन्हें जो जिम्मेवारी नगर विकास विभाग

या रांची नगर निगम देगा वे वही करेंगे।

जाहिर है, इस निर्णय की जिम्मेवारी भी नगर विकास विभाग या नगर निगम को लेनी चाहिए।

प्रधानमंत्री हमेशा सरकारी योजनाओं में जन भागीदारी और पारदर्शिता के पक्षधर हैं।

इस शहर में नालों या सीवरेज ड्रेनेज के नाम पर जो कारोबार चल रहा है,

वह आपसे छुपा हुआ नहीं है 200 करोड़ का स्मार्ट नाला बनवाया जा रहा है

लेकिन उसका औचित्य क्या है, सार्वजनिक रूप से नगर विकास विभाग का कोई अधिकारी बोलता ही नहीं है।

हरमू नदी के सौन्दर्यीकरण के नाम पर जनता के धन के अपव्यय पर

आम लोगों, जन प्रतिनिधियों के साथ न्यायपालिका से जुड़े लोग तक प्रतिकूल टिप्पणी कर चुके हैं,

लेकिन कोई इसकी जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं,

आपके पास भी इन योजनाओं से जुड़ी कई शिकायतें आ रही हैं।

अब यदि इन शिकायतों और मेरी बातों को भी लगातार नजरअंदाज किया जाएगा

तो संभव है कि भविष्य में बहुत सारी ऐसी बातें होंगी जो शायद अप्रिय होंगी।

बकरी बाजार में मार्केट और पार्किंग बनाने की सोच किसकी है,

ये मुझे नहीं मालूम, लेकिन इस निर्णय पर मेरा घोर विरोध है।

निगम का फैसला भी अगर गलत है तो उसे रोका जाना चाहिए

आप कह सकते हैं कि यह रांची नगर निगम का फैसला है और आपके मंत्रालय का इस फैसले में कोई दखल नहीं है

लेकिन, नगर निगम से जुड़े लोगों से जब भी मैंने बात की है, उनका कहना होता है कि

सबकुछ नगर विकास विभाग तय करके हमें सौंपता है।

उनके हिसाब से अटल वेंडर मार्केट भी नगर विकास विभाग ने ही बनवाया है।

आप ये भी कह सकते हैं कि बकरी बाजार मामले में शुरूआत उप महापौर श्री संजीव विजयवर्गीय जी ने

की है यदि यह सत्य है और आपकी कोई भूमिका नहीं,

तो भी राज्य के नगर विकास मंत्री के रूप में उन्हें रोकने की जिम्मेवारी तो आप पर आती है

और कुछ नहीं तो कम से कम इस मामले में आपकी राय तो सार्वजनिक होनी ही चाहिऐ

लोगों को पता होना चाहिये कि इस मामले में आप क्या सोचते हैं।

खैर, ये मामला आपके और नगर निगम के बीच का है, लेकिन यदि रांची शहर की

इसी तरह दुर्गति होती रही तो आज नहीं तो कल इसका विरोध होगा

और इसकी जिम्मेवारी से आप नहीं बच पायेंगे मैं उस संभावित अप्रिय स्थिति को टालना चाहता हूं।

मैं समझ नहीं पाता कि यदि नगर विकास विभाग या नगर निगम हरमू में पार्क बना सकता है

तो बकरी बाजार में पार्क या खुला मैदान बनाने से कौन रोकता है।

हरमू के लोग तो 40 – 50 साल से हैं, उन्हें सरकारी आवासीय योजना के तहत बसाया गया है

जबकि अपर बाजार में लोग सैकड़ों सालों से रह रहे हैं, लोगों की पुश्तैनी संपत्ति है।

राज्य के मुख्य सचिव ने खुले इलाकों को बचाने का निर्देश दे रखा है

यहां राज्य के मुख्य सचिव ने भी बाउंड्रीवाल के लिए कुछ मानक तय किये हैं।

उन्होंने निर्देश दिया है कि तालाबों को, खुले मैदानों को या अन्य संरचनाओं को किस प्रकार घेरना है

मुख्य सचिव के निर्देश के बारे में जो कुछ मुझे पता है उसके मुताबिक रांची नगर निगम द्वारा

दुकानें बनाकर बकरी बाजार को घेरने की योजना कहीं से भी उचित नहीं जान पड़ती।

मैं समझ नहीं पा रहा कि यह विलक्षण आईडिया किनके दिमाग में कहां से आया।

महोदय, प्रधानमंत्री श्री मोदी जल संरक्षण के लिए चिंतित हैं।

राज्य सरकार जल संरक्षण के लिए अभियान चला रही है

आप अवगत हैं कि बकरी बाजार में अपर बाजार का अधिकांश पानी बहकर आता है

यदि वहां कंक्रीट स्ट्रक्चर बनेगा तो पानी का प्रवाह रुक जाएगा।

खुली जमीन सतही जल को अवशोषित करती है, यह प्रक्रिया भी रुक जायेगीे

अपर बाजार की ऐसी एकमात्र जगह पर जहां जमीन पानी सोखती है,

अगर कंक्रीट का स्ट्रक्चर खड़ा हो जाएगा तो यह शहर में भूमिगत जल के लिए एक नया संकट होगा।

प्रधानमंत्री के संकल्प पर प्रहार की तरह होगा,

क्या यह बेहतर नहीं होगा कि अपर बाजार क्षेत्र का पूरा पानी जमा करके बकरी बाजार में

जल संरक्षण के लिए तालाब बना दिया जाय। राज्य के नगर विकास मंत्री के तौर पर

आप इस तथ्य से अवगत होंगे कि हर शहर में आबादी के घनत्व और खुली जगह का

एक निश्चित और न्यूनतम अनुपात होता है और प्रत्येक स्थिति में इस न्यूनतम अनुपात को

कायम रखने की कोशिश की जाती है।

रांची में अधिकांश खुली जगहों पर भवन बन गए हैं, खाली जगह है ही नहीं

अबतक जो अनुपात बिगड़ चुका, उसे नजरअंदाज भी करें तो

अब बची हुई खुली जगहों को बचाना तो हम सबका दायित्व है,

आपका दायित्व इस मामले में कुछ ज्यादा ही है।

बकरी बाजार में ही अपर बाजार का पानी जमीन के अंदर जाता है




रही बात पार्किंग स्पेस की, तो अंडरग्राउंड बनाईये, ओवरग्राउंड बनाईये वो एक अलग मुद्दा है

लेकिन बकरी बाजार में जितनी दुकानें बनवाने की योजना है,

आनेवाले समय में सारे दुकानदार गाड़ी वाले होंगे और वही लोग पार्किंग की जगह भर देंगे

ऊपर में जो ऑफिस कॉम्प्लेक्स बनेगा, उसके कर्मचारी बाकी बची खुची जगह भर देंगे

ऐसी स्थिति में ट्रक तो वहां पार्क हो नहीं पायेंगे

बकरी बाजार की मदद अगर पार्किंग समस्या हल करने के लिए ही लेनी है

तो बेहतर है कि इसका खुले मैदान के रूप में विकास कर सड़क के किनारे 20 फीट जगह छोड़ दीजिये,

जिसपर लोग अपनी गाड़ी और मोटरसाइकिल खड़ी कर लें, उसके बाद लोहे का ग्रिल लगा दीजिए।

मेरे हिसाब से नगर विकास विभाग और नगर निगम की प्राथमिकताएं कुछ और होनी चाहिऐ

मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स बनाना निजी क्षेत्र का काम है और यह काम पूरी रफ़्तार से हो भी रहा है

नगर विकास विभाग या नगर निगम को इस प्रकल्प से बचना चाहिऐ

शहर बेतरतीब तरीके से फैल रहा है, खेतों में कॉलोनियां बन रही हैं।

इन अव्यवस्थित कॉलोनियों में सीवरेज, ड्रेनेज, सड़क, पेयजल आदि कोई भी नागरिक सुविधा व्यवस्थित और नियमित नहीं है

पांच-दस साल बाद यही कॉलोनियां सिरदर्द बनेंगी।

लोग नागरिक सुविधाएं मांगेंगे और उन्हें पहुंचाने में वही परेशानी आयेगी

जो आज सीवरेज सिस्टम या यातायात व्यवस्था को ठीक करने में आ रही है

नगर विकास विभाग और नगर निगम की प्राथमिकता नयी बसावट वाले इलाकों की

प्लानिंग और पुरानी बसावट वाले इलाकों तक नागरिक सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश होनी चाहिए।

यदि नगर विकास विभाग और रांची नगर निगम वाकई जनता की चिंता करना चाहे

तो चिंता इस बात की होनी चाहिए कि अबतक पूरे शहर को शुद्ध पेयजल मुहैया कराना

क्यों नहीं संभव हो पाया है।

शहर को अभी जल भंडार बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए

यह भी कि शहर की बढ़ती आबादी के मुताबिक क्या हमारे पास पर्याप्त जलागार हैं

और जो जलागार हैं उनमें क्या शहर के नागरिकों की जरुरत के मुताबिक जल भण्डार है

उत्साह प्रदर्शित करने के लिए सबसे उपयुक्त मामला

यह है किरांची नगर निगम को शहर के लिए नए जल भण्डार तलाशकर उन्हें जलापूर्ति के लिए तैयार करने का काम करना चाहिए।

साथ ही पुराने जल स्रोतों की क्षमता बढ़ाई जाय।

बकरी बाजार के मामले में जनता को जन आकांक्षाओं के अनुरूप सही योजना के प्रस्ताव से

अवगत कराने और उसपर अमल कराने के लिए आप सबसे उपयुक्त पात्र हैं।

मैं और शायद इस शहर की अधिकांश जनता इस मामले पर आपकी बेबाक राय की प्रतीक्षा करेगी।

मैं प्रस्तावित योजना के विरोध में हूं और आपसे अपेक्षा है कि

जनभावना के अनुरूप आप इस मामले में त्वरित कार्रवाई करेंगे।

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