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झारखंड में आया राम गया राम की राजनीति में तोल मोल जारी

  • अंदरखाने में तेज हो रहा है शह और मात का खेल

  •  तीनों प्रमुख दलों में असंतोष गुट सक्रिय

  •  असंतोष की आग में घी डाल रहा एक खेमा

  •  पार्टी बदलने की सबकी अपनी अपनी मजबूरी

संवाददाता

रांचीः झारखंड में आया राम गया राम की राजनीति अंदरखाने में तेज है। मजेदार स्थिति

यह है कि यह पहला मौका है जबकि सभी दलों के प्रमुख नेता इस संभावित टूट के बारे में

निरंतर जानकारी ले रहे हैं। लेकिन औपचारिक तौर पर हरेक दल में पूरी मजबूती होने का

दावा किया जा रहा है। वैसे इस पूरे खेल का बारिकी से विश्लेषण करने पर पता चला है कि

इस खेल को हवा देने में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के करीबी लोगों का सीधा संबंध है। खुद

भाजपा नेतृत्व भी इन घटनाक्रमों से वाकिफ हैं लेकिन इस खेल में असली भूमिका निभाने

वालों की पहचान होने के बाद भी भाजपा अथवा अन्य दलों के नेतृत्व में इस समस्या के

समाधान की दिशा में कोई पहल नहीं की है। दूसरी तरफ भाजपा नेतृत्व उन असंतुष्ट

झामुमो विधायकों का भी मन टटोलने में जुटी हैं, जो अपनी ही सरकार में उपेक्षित महसूस

कर रहे हैं। लेकिन यह पहला अवसर है जबकि भाजपा के भी विधायक केंद्र में अपनी

सरकार होने के बाद भी राजनीतिक विकल्पों की तलाश में जुट गये हैं।

झारखंड में आया राम गया राम हर खेमा में है

जानकार बताते हैं कि पार्टी छोड़ने की मंशा रखने वालों में कांग्रेस और भाजपा के वर्तमान

विधायकों के नाम भी शामिल हैं। इस बारे में कुछ कुछ टूटी फुटी सूचनाएं बाहर आने के

बाद भी वैसे भागने की सोच रखने वाले विधायकों के मामले में पार्टी नेतृत्व ने लंबी रस्सी

की छूट देने का मन बना रखा है। इसी बीच अंदरखाने से मोर्चाबंदी की तैयारियों में यह

सूचना भी आने लगी है कि भाजपा की नजर राजद के विधायक पर भी है। लेकिन असली

संकट कांग्रेस खेमा में हैं, जहां के विधायक दिल्ली दरबार तक अपनी शिकायत तो पहुंचा

आये है लेकिन उसका कोई परिणाम निकलता नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस खेमा का हाल

चाल जानने वाले मानते हैं कि फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व के लिए राजस्थान से उपजी

परेशानी को दूर करने की प्राथमिकता है। इसी वजह से प्रभारी महासचिव भी बदले गये हैं।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट सार्वजनिक तौर पर हाथ तो मिला चुके हैं

लेकिन अंदरखाने में मतभेद अब भी कायम है। वहां की परेशानियों को दूर करने के बाद ही

कांग्रेस नेतृत्व झारखंड में कांग्रेस संगठन पर कोई विचार कर सकती है।

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