Press "Enter" to skip to content

रिटायरमेंट के चार दिन पहले राकेश अस्थाना को मिली नई जिम्मेदारी

Spread the love



  • दिल्ली पुलिस के आयुक्त बनाये गये

  • फैसले पर कई नये सवाल खड़े हो गये

  • कैडर बदलने की घटना भी पहली बार

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः रिटायरमेंट के चार दिन पहले नई जिम्मेदारी सौंपकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह




ने साफ कर दिया कि राकेश अस्थाना उनके लिए कितने प्रियपात्र अथवा आवश्यकता बन

चुके हैं।  दिल्ली पुलिस के कमिशनर के पद पर अब राकेश अस्थाना को बहाल करने की

अधिसूचना जारी कर दी गयी है। यह अधिसूचना तब जारी की गयी है जबकि उन्हें अगले चार

दिनों के बाद रिटायर हो जाना था। इसी वजह से केंद्र सरकार का यह फैसला कई सवाल खड़े

कर रहा है। वर्तमान में वह सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक के पद पर पदस्थापित है।

विरोधियों को भी केंद्र सरकार के इस फैसले पर सवाल करने का अवसर मिल गया है।

दरअसल सीबीआई में विशेष निदेशक पद पर होने के दौरान उनके साथ हुए निदेशक आलोक

वर्मा के विवाद की वजह से वह लगातार ही विवादों में रहे हैं। इस बीच यह सूचना भी सामने

आयी है कि रातों रात सीबीआई निदेशक पद से हटाये गये आलोक वर्मा और उनके रिश्तेदारों

के टेलीफोनों पर भी पिगासूस साफ्टवेयर के जरिए जासूसी की गयी थी। इसलिए अभी जारी

पिगासूस विवाद के बीच रिटायरमेंट के ठीक पहले राकेश अस्थाना को दिल्ली का पुलिस

कमिशनर बनाकर और अधिक दिनों तक सरकारी सेवा में रखने का यह फैसला सिर्फ नेताओं




नहीं बल्कि अफसरशाही में भी चर्चा का विषय बन गया है। 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी

राकेश अस्थाना गुजरात कैडर के अधिकारी हैं। वह गुजरात में पदस्थापित होने के दौरान ही

नरेंद्र मोदी और राकेश अस्थाना के करीबी हो गये थे। बाद में सीबीआई में होने के दौरान

उन्होंने रांची और धनबाद में रहते हुए चारा घोटाले की जांच की थी। गुजरात से सीबीआई में

पदस्थापित होने के बाद से वह लगातार विवादों में घिरते चले गये थे।

रिटायरमेंट के पहले सीबीआई में लाने की कोशिश हुई थी

इसी विवाद की वजह से पिछली बार सीबीआई निदेशक के लिए उनके नाम पर सुप्रीम कोर्ट के

मुख्य न्यायाधीश ने आपत्ति जतायी थी। अब दिल्ली पुलिस का कमिशनर बनाये जाने से यह

स्पष्ट हो गया है कि केंद्र सरकार के दोनों प्रमुख लोग हर हाल में राकेश अस्थाना को अपने

करीब बनाये रखना चाहते हैं। पिगासूस साफ्टवेयर विवाद के बीच यह फैसला इसी वजह से

विरोधियों के लिए हमले का नया हथियार बन गया है। वैसे भी गुजरात कैडर के किसी

अधिकारी को केंद्रीय कैडर में भेजे जाने का यह फैसला भी अपने आप में पहला उदाहरण है।

इस फैसले की वजह से राकेश अस्थाना अब 31 जुलाई 2022 तक सरकारी सेवा में बने रहेंगे।

इस वजह से भी ब्यूरोक्रेसी में इस फैसले को लेकर भी तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं।



More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from दिल्लीMore posts in दिल्ली »
More from राज काजMore posts in राज काज »

Be First to Comment

Leave a Reply