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राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा आज भी जारी




तीन बार स्थगन के बाद भी बाधा
फिर दोहराया निलंबित सांसदों का मुद्दा
हरिवंश की अपील का नहीं हुआ कोई असर




नई दिल्ली: राज्यसभा में बुधवार को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य ( एमएसपी ) और अन्य कृषि संबंधी मुद्दों तथा सांसदों के निलंबन को लेकर विपक्ष का हंगामा जारी रहा और सदन की कार्यवाही तीन बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गयी। इस दौरान शून्यकाल और प्रश्नकाल बाधित रहा तथा विधेयकों पर चर्चा नहीं हो सकी।

भोजन अवकाश के बाद उपसभापति हरिवंश सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए बांध सुरक्षा विधेयक 2021 पेश करने के लिए जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम पुकारा तो विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे बोलने के लिए खड़े हो गए। इस पर श्री हरिवंश ने कहा कि विधेयक पेश होने के बाद आप अपनी बात रख सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आपको केवल विधेयक पर बोलने की अनुमति है। इसके बाद श्री हरिवंश ने श्री शेखावत को अपनी बात रखने के लिए कहा। इस बीच श्री खड़गे ने 12 निलंबित सांसदों का मुद्दा उठाने का प्रयास किया जिसकी उन्हें अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद तेलंगाना राष्ट्र समिति और कांग्रेस के सदस्य अध्यक्ष के आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। उपसभापति ने इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही तीन बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी।




इससे पहले सदन की कार्यवाही इन्हीं मुद्दों पर दो बार स्थगित की गई थी जिसके कारण आज शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं हो सका था। संसद के शीतकालीन सत्र का यह तीसरा दिन है जब राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा जारी है और शून्यकाल तथा प्रश्नकाल बाधित है। सदन में आज कोई विधेयक पारित नहीं हो सका है और न ही किसी मुद्दे पर कोई चर्चा की गयी है।

राज्यसभा में हंगामा तो लोकसभा में दो विधेयक पेश

दूसरी तरफ लोकसभा में यह बताया गया कि देश भर के बिजलीघरों के पास नौ दिन के लिए पर्याप्त कोयला भंडार है। कोयला, खान एवं संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद पटेल ने लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ‘‘कोयला आधारित बिजली घरों के पास कोयले का भंडार अब बढ़ कर 1.67 करोड़ टन से अधिक (25 नवंबर 2021 की स्थिति के अनुसार) हो गया है। यह उनकी नौ दिन तक की बिजली उत्पादन की जरूरत के लिए पर्याप्त है।

स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने लोकसभा में बुधवार को सहायता प्राप्त जननीय प्रौद्योगिकी (विनियमन) विधेयक, 2020 पेश किया गया। श्री मांडविया ने विधेयक के बारे में सदन में जानकारी देते हुए कहा कि इसमें अंतर गर्भाशयी गर्भाधान से जुड़े विषयों पर दिशानिर्देशों एवं व्यवस्था का मानकीकरण करने तथा महिलाओं एवं बच्ज़्चों को शोषण से संरक्षण प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।



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