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राजधर्म के सवाल पर फिर से भाजपा वनाम कांग्रेस विवाद

नयी दिल्लीः राजधर्म के सवाल पर फिर से कांग्रेस और भाजपा आपस में उलझ गये हैं।

इस क्रम में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी बाजपेयी के इस वक्तव्य को याद

दिलाया गया है जिसमें गुजरात दंगे के बाद उन्होंने नरेंद्र मोदी से राजधर्म का पालन करने

की खुली नसीहत दी थी। कांग्रेस ने कहा है कि राजधर्म का पालन सरकार का दायित्व

होता है लेकिन मोदी सरकार लगातार इसका उल्लंघन कर रही है ,इसलिए जिम्मेदार

विपक्ष के नाते कांग्रेस राजधर्म के निर्वहन करने की बार बार उसे याद दिलाएगी। कांग्रेस

प्रवक्ता आनंद शर्मा ने शनिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में आरोप

लगाया कि सरकार समाज में भय का वातावरण पैदा कर लोगों को बांटने का प्रयास कर

रही है। भय का माहौल शासन, प्रशासन और पुलिस के डर से पैदा किया जा रहा है। उन्होंने

कहा कि राजधर्म शब्द को लेकर मोदी सरकार को चिढ़ है लेकिन उसे यह नहीं भूलना

चाहिए राजधर्म के पालन की जिम्मेदारी सरकार की होती है और विपक्ष की नहीं। विपक्ष

की जिम्मेदारी है कि वह सरकार को याद दिलाए कि इसका पालन नहीं किया जा रहा है

और कांग्रेस अपने इस दायित्व का बार बार निर्वहन करेगी तथा सरकार को बताएगी कि

राजधर्म का पालन नहीं हो रहा है। श्री शर्मा ने कहा कि सरकार दुर्भावना से काम कर रही है

और उनका निशाना राजनीतिक विरोधी होते हैं। इसके लिए वह निरंतर सरकारी एजेंसियों

का दुरुपयोग कर रही है।

राजधर्म के सवाल का उल्लेख दिल्ली की हिंसा पर

उसे राजधर्म का पालन करना चाहिए लेकिन वह भटक गयी है और ऐसा लगता है कि उसे

राजधर्म का पालन करना नहीं आता है। दिल्ली हिंसा को लेकर कई मामलों में सरकार पर

पारदर्शिता के साथ काम नहीं करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकों के

मौलिक अधिकारों को कुचला गया है और धारा 144 का दुरुपयोग किया गया है। कई

मामलों में जानबूझकर कार्रवाई नहीं हुई है वरना दंगे रोके जा सकते थे। उन्होंने कहा कि

जो लोग धरना दे रहे थे और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे उनके खिलाफ संगीन धाराओं का

इस्तेमाल किया गया है। कुछ लोगों के खिलाफ ऐसी धाराएं लगायी जा रही हैं जिनमें

जमानत नहीं है। सरकार लोगों के अधिकारों को नकार रही है।

दूसरी तरफ भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा है कि कमसे कम राजधर्म के मुद्दे पर उसे

कांग्रेस ने नसीहत की कोई जरूरत नहीं है। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में बार बार इस

राजधर्म का उल्लंघन किया है। इसलिए उसे इस बारे में बोलने का कोई नैतिक अधिकार

ही नहीं है।


 

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