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स्थानीय राज अस्पताल ने चौबीस घंटे से रोके रखा है कोरोना शव

  • दो बार दाखिल हुआ था इसी अस्पताल में

  • रिम्स में हुई जांच में कोरोना होने का पता चला

  • दोबारा अस्पताल आया तो कोरोना से ही मौत हुई

  • ईलाज के दौरान मरे के चिकित्सा खर्च लाखों बकाया

संवाददाता

रांचीः स्थानीय राज अस्पताल बिल न चुकाने पर बंधक रख लिया कोरोना मरीज का शव

रोके रखा है। उसके ईलाज पर अस्पताल ने दो लाख रुपये का बिल बकाया होने की वजह

से ऐसा किया है। दूसरी तरफ मारे गये व्यक्ति को कोरोना पॉजिटिव भी पाया गया है। अब

मृतक के परिजन अस्पताल जाकर शव लेने में डर रहे हैं। मृतक के पु्त्र का कहना है कि

राज अस्पताल प्रबंधन उसके साथ मारपीट दुर्व्यवहार कर सकता है।

मिली जानकारी के मुताबिक हजारीबाग के तुकेन्द्र राम को इलाज के लिये राज अस्पताल

में भर्ती कराया गया था। तुकेन्द्र राम में तब तक कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे और राज

अस्पलताल में उनका किसी अन्य रोग का इलाज चल रहा था। इलाज के एक सप्ताह में

कोई सुधार नहीं हुआ और राज अस्पबताल का बढ़ता बिल देख तुकेन्द्रं राम के परिजनों ने

उन्हें राज अस्पुताल से डिस्चार्ज करा कर रिम्स में दिखलाया। रिम्स में कोरोना जांच के

लिये भी उनका सैंपल लिया गया। 11 तारीख को रिम्स से डिस्चार्ज करा कर वापस तुकेन्द्र

राम को उनके परिजन फिर राज अस्पताल में ले आये। तब तक रिम्स के रिपोर्ट में तुकेन्द्र

के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हो गयी। तब राज अस्पताल के कोविड वार्ड में तुकेन्द्र

राम का इलाज किया गया और अंतत: 25 जुलाई को उसकी कोरोना से मौत हो गयी। अब

राज अस्पताल का कहना है कि तुकेन्द्र राम के इलाज के मद में दो लाख रूपये बकाया हैं,

जो उसके परिजन नहीं दे रहे हैं।

स्थानीय राज अस्पताल ने कहा प्रशासन को सूचना दी है

राज अस्पताल के मालिक योगेश गंभीर से जब बात की गयी तो उनका कहना है कि

कोविड मरीज के शव को हम सीधे परिजन को नहीं सौंप सकते, तुकेन्द्र राम के शव को हम

जिला प्रशासन को सौंपेंगे। हमने सीओ को सूचना दे दी है। अब जिला प्रसाशन तय करे कि

शव को कब कैसे ले जाना है। वहीं हमने मृतक के परिजनों को बार-बार बुलाया है ताकि वो

इलाज मद में बकाया दो लाख रुपये का भुगतान करें, लेकिन वो लोग भाग गये हैं,

अस्पताल नहीं आ रहे हैं। इसके भुगतान के लिये हम मृतक के परिजनों पर केस करेंगे।

मृतक के पुत्र जितेन्द्र राम का कहना है कि मुझे अपने पिता का शव चाहिये। हमारे पास

जितने पैसे थे सब इलाज में खर्च हो चुके हैं , अब हमारे पास देने को कुछ नहीं है। मैं भय के

मारे राज अस्पसताल नहीं जा रहा हूं, क्योंकि मुझ डर है कि राज अस्पताल में दो लाख

रुपये बकाये भुगतान के लिये मेरे साथ मारपीट भी की जायेगी।

क्या है कोरोना से मरे मरीज के शव का नियम

वहीं नियमत: कोई भी अस्पताल कोविड 19 से मृत किसी व्यक्ति का शव अस्पताल में

रोक कर नहीं रख सकता है। झारखंड में किसी अस्पताल में यह पहला केस होगा जिसमें

कोविड 19 से मरे किसी मरीज का शव रोके रखा गया है। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में कोविड

19 वार्डों में मरीजों से अच्छी रकम इलाज के नाम पर वसूली जा रही है। सामन्यत: प्राइवेट

अस्पताल एक दिन के दसों हजार वसूल रहे हैं। जिसमें डॉक्टर का फी भी मरीजों से ही

वसूला जा रहा है।

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