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छापामारी और बयानबाजी का उल्टा असर ना हो यूपी में




चुनावी चकल्लस

  • आयकर की छापामारी खोदा पहाड़ निकली चुहिया
  • लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है
  • अखिलेश ने इसे चुनावी हथियार बनाया है
  • भाजपा अपने विकास के दावों पर बढ़ रही
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः छापामारी भी अब उत्तरप्रदेश के प्रमुख विरोधी दल के तौर पर उभर रहे समाजवादी पार्टी के लिए एक चुनावी हथियार बन गया है। दूसरी तरफ भाजपा की तरफ से अब योगी और मोदी द्वारा किये गये विकास कार्यों की दुहाई दी जा रही है।




लेकिन आयकर की छापामारी के बाद सपा के प्रवक्ता का बयान ही अखिलेश यादव के आरोपों को बल प्रदान करता है कि दरअसल केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल भाजपा सिर्फ लोगों को डराने के लिए कर रही है। सपा के राष्ट्रीय सचिव और प्रवक्ता राजीव राय ने रविवार को कहा कि कल से अब तक उनके आवास पर 16 घंटे चली आयकर विभाग की छापेमारी में 17 हजार रुपये मिले हैं।

राय ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आयकर विभाग की इस छापेमारी को राजनीति से प्रेरित बताते हुये सरकार को नसीहत दी है कि, जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों के घर पर पत्थर नहीं फेंकते। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग की टीम मऊ स्थित उनके अस्थाई निवास से प्रिंटर और अन्य कुछ जरूरी कागजात लेकर गयी है।

इस बीच आयकर विभाग के अधिकारियों ने पत्रकारों से कुछ भी बात करने से मना कर दिया। इसी बयान के बाद सपा अध्यक्ष ने कहा है कि चुनाव में हार के डर से भाजपा भी कांग्रेस की राह पर चल पड़ी है जो चुनाव से पहले अपने विरोधियों को डरवाने के लिये उनके खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल करती थी।

उन्होंने कहा कि जैसे जैसे चुनाव करीब आयेंगे, चुनावी हार को करीब आते देख कर भाजपा केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सहित तमाम जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने विरोधियों को डराने के लिये करेगी।

छापामारी की घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है अखिलेश ने

उन्होंने कहा, उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार न बन जाये, इसके लिये जांच एजेंसियों को भाजपा आगे करती है। वैसे इस बात में लोगों को दम इसलिए भी नजर आ रहा है क्योंकि कई अन्य राज्यों में भी चुनाव के ठीक पहले केंद्रीय एजेंसियों की ऐसी कार्रवाई होती रही है।




यह भाजपा के खिलाफ चुनावी हथियार अगर बना तो उससे भाजपा को नुकसान होना तय है। अखिलेश का आरोप है कि जहां जहां भाजपा को हार का डर सताने लगता है, वहां यही हथकंडा अपनाया जाता है। इसलिये जनता अब उन्हें माफ नहीं करेगी। सपा अध्यक्ष ने गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ को मंत्रिमंडल से बर्खास्त नहीं करने पर भाजपा की मंशा को सवालों के घेरे में खड़ा किया।

दरअसल अजय मिश्रा का मामला भी अंततः भाजपा के चुनाव प्रचार को प्रभावित करने वाला मुद्दा बन चुका है। लेकिन फिलहाल मोदी उनसे दूरी बनाकर चलने के बाद भी उन्हें मंत्रिमंडल में बनाये हुए हैं। यह अलग बात है कि सारे बिल पास हो जाने के बाद कोई कार्रवाई कर लोगों को फिर अपने पाले में करने की कोशिश भी हो सकती है।

लेकिन ब्राह्मण वोट का जो डर भाजपा को सता रहा है, वह तो पूर्वांचल में हरिशंकर तिवारी के परिवार के सपा में शामिल होने से पहले से सामने आ चुका है। दूसरी तरफ बसपा के पास भी सतीश मिश्र की वजह से ब्राह्मण वोटरों का एक वर्ग तैयार हो चुका है।

ऐसे में भाजपा को अपनी विकासवादी सोच के साथ साथ जातिगत समीकरणों को साधने की दोहरी जिम्मेदारी भी है क्योंकि पहले भी यह चर्चा आम रही है कि योगी की सरकार ने खास तौर पर ब्राह्मण विरोधी रुख अपनाया था। इनसे अलग किसान आंदोलन का मसला भी है।

किसानों की नाराजगी अब भी कम नहीं हुई है

एक साल तक जिन किसानों को गालियां दी गयी हैं, वे इतनी जल्दी इसे भूला देंगे, इसकी उम्मीद कम है। फिर भी भाजपा की तरफ से विकास के दावे के साथ हो रहा चुनाव प्रचार कमसे कम यह तो संकेत दे रहा है कि अब भाजपा को भी अपने काम की बदौलत लोगों से मतदान की अपील करना पड़ रहा है।

साथ में अच्छी बात यह है कि भाजपा से फिलहाल नाराज चल रहे बड़े चैनलों के सर्वे यह बता रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ अपनी लोकप्रियता के ग्राफ को कायम रखने में सफल नजर आ रहे हैं। सर्वेक्षणों का अब भी यही निष्कर्ष है कि सीटों की संख्या घटने के बाद भी अंततः योगी ही दोबारा सरकार बनाने का नया रिकार्ड कायम करने जा रहे हैं।



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