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राहुल गांधी का कुत्ता और दूसरे कांग्रेसी नेता एक प्लेट से बिस्कुट खाते दिखे हैं

  • नेताओँ की बात सुनने के बदले कुत्ते से खेल रहे थे

  • जीरो आवर में आलोचना सुनने का वक्त मिलेगा

  • सीएए में भी बात रखने का फिर मौका मिलेगा

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : राहुल गांधी का कुत्ता वहां रखे एक प्लेट से एक बिस्कुट खा गया। उसे देखकर

राहुल गांधी मुस्कुराने लगे। अजीब बात यह लगी कि वहां मौजूद नेताओं की बातों को

ध्यान से सुनने के बदले उनका ध्यान अपने कुत्ते से खेलने में ही लगा हुआ है। असम के

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस बात का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी वजह से वह

आज असम के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच पाये हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी में आने से

पहले कांग्रेस पार्टी का हिस्सा थे। कांग्रेस में रहते हुए राहुल गांधी के साथ हुई मीटिंग का

जिक्र करते हुए सरमा ने बताया कि उस दौरान असम विधान सभा चुनाव को लेकर एक

बैठक थी। इसमें बीजेपी को हराने पर चर्चा हुई। इस मीटिंग में उनके और राहुल गांधी के

अलावा पार्टी के और प्रमुख नेता थे। उन्होंने बताया कि पूरी मीटिंग के दौरान राहुल गांधी

की ओर से कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही थी। वह लगातार अपने कुत्ते के साथ खेल रहे

थे। सरमा ने कहा कि बैठक के बाद उन्हें इस बात का पता चला कि उस कुत्ते का नाम

‘पीडी’ है। सरमा ने बताया कि मीटिंग में वहां मौजूद नेताओं के लिए चाय-कॉफी मंगाई

गई। इस दौरान राहुल गांधी के पास बैठा कुत्ता टेबल के पास गया और वहां रखी प्लेट से

एक बिस्किट निकालकर खाने लगा। इसके बाद राहुल गांधी उनकी ओर देखकर हंसने

लगे। सरमा ने बताया कि वह यह सोच रहे थे कि वो (राहुल गांधी) भला उन्हें देख कर क्यों

ऐसा कर रहे हैं। सरमा ने बताया कि मीटिंग के दौरान वह चाय का कप लेकर इंतजार कर

रहे थे कि राहुल गांधी कुत्ते की जूठी प्लेट के बदले दूसरी प्लेट मंगवाएंगे।

वह सोच रहे थे दूसरी प्लेट मंगायी जाएगी

लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिर उन्होंने देखा कि तरुण गोगोई और सीपी जोशी जैसे सीनियर

नेता उसी प्लेट से बिस्किट उठा कर खा रहे थे। सरमा ने बताया कि चूंकि वह राहुल गांधी

से हमेशा मिलने नहीं जाते थे। इस पर उन्हें अंदाजा हुआ कि यह सब नार्मल बात है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मोदी से

मुलाकात के बाद सरमा ने कहा कि गुजरात के जैसा जीरो ऑवर असम में यह अभ्यास

शुरू करना चाहिए। मुलाकात के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने मुझे

सलाह दी है कि उन्हें कैबिनेट की बैठकों के दौरान भी ‘ज़ीरो ऑवर’ जैसी अवधारणा को

अपनाना चाहिए। जिससे उन्हें सरकार के बारे में आलोचना सुनने को मिलेगी। उन्होंने

बताया कि प्रधानमंत्री ने गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में जो अनुभव किया है उन सबके

बारे में मैंने उनसे जानकारी ली है। उन्होंने कहा मुझे लगता है कि मोदीजी ने ऐसा गुजरात

में किया है, तो मुझे भी असम में यह अभ्यास शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपके

काम को अच्छा बोलने वाले बहुत मिलेंगे, जबकि बुरा बताने वाले कम होंगे। जबतक आप

बुराई नहीं सुनेंगे तब तक आप सुधार भी नहीं कर पाएंगे। एक सवाल का जवाब देते हुए

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आलोचनाओं को न केवल सुनते है बल्कि उसमें सुधार करने

के लिए काम भी करते है।

केंद्र-राज्य संबंधों पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने हाल की घटना का जिक्र करते हुए

कहा कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई चक्रवात

यास समीक्षा बैठक को छोड़कर चली गयी थी। उन्होंने कहा कि उनको प्रधानमंत्री के पद

का सम्मान करना होगा। इस तरह देश नहीं चलेगा।

राहुल गांधी का कुत्ता के अलावा ममता बनर्जी का भी जिक्र किया

साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि कोई सीएम ऐसे कैसे कह

सकता है कि मैं प्रधानमंत्री के लिए 30 मिनट का इंतजार क्यों करूं? उन्होंने कहा कि मैंने

अपने पूरे राजनीतिक करियर में इस तरह की बातें कभी नहीं सुनीं है। उन्होंने यह भी

बताया कि मैंने मुख्यमंत्री को सोनिया गांधी से मिलने के लिए वेटिंग रूम में दो से तीन

घंटे बैठे हुए देखा है। उन्होंने कहा कि उनको अपने अहंकार को अलग रखकर प्रधानमंत्री

का अभिवादन करना चाहिए था। सरमा ने कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्यों में विकास

गतिविधियों को जारी रखेगी, वहां चाहे जिसकी भी सरकार हो। उन्होंने कहा कि राज्य के

मुख्यमंत्री के रूप में वह बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक व्यक्ति के लिए काम करने के

लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा जो लोग एनआरसी और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया

में अपनी भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर सकते हैं, उन्हें बांग्लादेश भेजने से पहले ही

मताधिकार से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की अभी तक

एनआरसी के तहत 19 लाख से अधिक आवेदकों को बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा कि

राज्य सरकार सीमावर्ती जिलों में शामिल नामों में से 20 प्रतिशत और अन्य जगहों पर 10

प्रतिशत के पुन: जाँच की मांग करती है। उन्होंने कहा कि एनआरसी से बाहर होने के बाद

भी लोगों को राज्य के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में अपील करने का मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने

सीएए पर कहा कि असम में सीएए विवादास्पद माना जाता है, जबकि असम इसका एक

मुखर समर्थक था। उन्होंने कहा कि सीएए हमारी ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभा रहा है।

इसे सांप्रदायिकता के चश्में से नहीं देखा जाना चाहिए।

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