राफेल पर राहुल और चिंदावरम का सरकार पर जोरदार हमला

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  • गायब करने वाला ही लौटा गया फाईल

  • मुमकिन है नारा का भी मजाक उड़ाया

  • अब संभव नहीं है गड़बड़ी छिपाना

  • चोर ही लौटा गया है गोपनीय दस्तावेज

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः राफेल विमान सौदे की फाइलके पहले चोरी जाने और बाद सकुशल मिलने की सूचना का भी राजनीतिक इस्तेमाल होने लगा है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिंदावरम ने अलग अलग बयानों में इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार पर हमला बोला है।

श्री गांधी ने कहा कि गायब हो गया शब्द ही मोदी सरकार की कार्यकुशलता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में जिस तरीके से भाजपा ने युवाओं के लिए नौकरी और किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का वादा किया था।

ठीक उसी तरह राफेल सौदे की फाइल की हालत है।

जो सरकार के मुताबिक कभी गायब हो रही है तो कभी मिल रही है।

श्री गांधी ने हर बात पर राफेल सौदे को जोड़ने के लिए भी नरेंद्र मोदी की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि बालाकोट हवाई हमले में भी श्री मोदी ने राफेल की उपयोगिता साबित करने की राजनीतिक चाल चली।

राफेल के आने में हुई देर का कारण भी बता दें नरेद्र मोदी

लेकिन वह यह सच बताने से पीछे हट गये कि विमानों की आपूर्ति में देर क्यों हुई हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह विलंब सिर्फ इस वजह से हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री को अपने मित्र अनिल अंबानी को तीस हजार करोड़ दिलाने की जल्दबाजी थी।

अब तो दस्तावेजों के चोरी जाने और फिर मिलने से कमसे कम इतना तो स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेज हैं

और उनमें यह बात साफ साफ लिखी गयी है कि प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से भी

विमान की खरीद पर समानांतर बात-चीत चलायी जा रही थी।

सरकार द्वारा ऐसे दस्तावेज रखने वाले मीडिया घरानों के खिलाफ सरकारी गोपनीयता कानून के तहत कार्रवाई के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर होता है।

अगर जांच करनी है तो सभी की करो और साथ में जिसपर मुख्य आरोप है,

उनकी यानी नरेंद्र मोदी की भी जांच हो।

श्री मोदी और भाजपा के कुछ नेता बार बार इस मामले की जेपीसी जांच का विरोध कर रहे हैं।

अगर उन्हें डर नहीं है तो वह किस सच्चाई पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।

किस सच्चाई को छिपाना चाहती है केंद्र सरकार

तीस हजार करोड़ के रक्षा सौदा घोटाला की जांच से जो सरकार बार बार पीछे हट रही है,

उसे दूसरे की जांच का नैतिक अधिकार ही नहीं है।

वैसे इस बहस में भाजपा के तमाम चुनावी वादे अवश्य गायब कर दिये गये हैं,

जो उन्होंने 2014 के चुनाव में किये थे।

इधर पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदांवरम ने कहा कि शायद चोर ही समझदार था,

जिसने दस्तावेजों की चोरी करने के बाद उन्हें वापस लौटा दिया है।

लेकिन उन्होंने भी अपनी ट्विट में कहा है कि दस्तावेजों के प्रकाशित होने के बाद

इसे गोपनीयता कानून के दायरे में लाने की बात होने लगी है।

लेकिन दस्तावेज सही हैं तो उसके आधार पर भी सरकार को

नरेंद्र मोदी के खिलाफ कार्रवाई पहले करनी चाहिए।

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