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क्वांटम फिजिक्स की दुनिया में एक अणु को देखा जा सका

  • न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने कर लिया कमाल

  • तमाम वैज्ञानिक उपकरणों की संरचना बदलेगी

  • क्वांटम कंप्यूटिंग में होने जबर्दस्त परिवर्तन

  • पहली बार अणुओँ को अलग और मिलते हुए देखा गया

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः क्वांटम फिजिक्स के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी उपलब्धि हासिल हुई है। इसकी

बदौलत अब पूरी क्वांटम थ्योरी के काम को तेज गति से आगे बढ़ाया जा सकता है। दूसरी

तरफ पदार्थ विज्ञान की अब तक की सोच और संरचना भी बदल सकती है। वैज्ञानिकों ने

अपने अनुसंधान के क्रम में पहली बार अणु को अलग तौर पर देखने में सफलता पायी है।

इस प्रयोग के क्रम में एक अणु को दूसरे अणु से मिलते हुए भी देखा गया है।

न्यूजीलैंड के आटागो विश्वविद्यालय में यह उपलब्धि हासिल हुई है। इन वैज्ञानिकों ने

एक अणु को एक स्थान पर स्थिर रखते हुए देखा है। अब तक आणविक संरचना के बारे में

सब कुछ पता होने के बाद भी उसे स्थिर अवस्था में नहीं देखा जा सका था। वैसे भी

क्वांटम फिजिक्स की दुनिया में हर रोज नये नये आयाम जुड़ रहे हैं। इन उपलब्धियों की

वजह से अनेक वैज्ञानिक उपकरणों की संरचना भी बदल रही है। पहली बार अणु को स्थिर

देखने में सफलता मिलने के बाद इसके आगे की कड़ी को बढ़ाने का काम आसान हो

सकता है। कुछ लोग मानते हैं कि अणु को इस तरीके से देखने में सफलता मिलने का अर्थ

है कि उसे अपनी जरूरत के हिसाब के दिशा और दशा की तरफ संचालित भी किया जा

सकेगा। यदि ऐसा हो पाया तो आणविक संरचना पर होने वाली सारी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं

में क्रांतिकारी बदलाव होंगे और हो सकता है कि पूरी वैज्ञानिक संरचना में जबर्दस्त

बदलाव भी आ जाए।

क्वांटम फिजिक्स की इस उपलब्धि से भारत भी उत्साहित

दूसरी तरफ भारत का एक वैज्ञानिक समूह मानता है कि इससे आणविक ऊर्जा के क्षेत्र में

भी भारत को उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि कोल्ड

डिफ्यूजन के क्षेत्र में यहां के कई इंजीनियरिंग संस्थानों में काफी काम हुआ है। आम

समझ की भाषा में अगर किसी अणु का सामान्य माहौल में विखंडन करना संभव हुआ तो

बिना किसी विकिरण के खतरे से असीमित ऊर्जा हासिल करना संभव होगा। इससे भारत

की ऊर्जा की तमाम जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।

न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने जो कुछ हासिल किया है, उससे अब कंप्यूटर की दुनिया में भी

बदलाव आना तय माना जा सकता है। इस एक अणु को मनचाहे तरीके से इस्तेमाल करने

की शक्ति की वजह से माइक्रो चिप और भी छोटे लेकिन अत्यंत शक्तिशाली हो जाएंगे।

अपनी शोध के तहत इस दल ने दो और तीन अणुओं के मिलने से बनने वाले मॉलिक्यूल

की प्रक्रिया को भी देखने में सफलता पायी है। इससे पहले कभी भी इसे भी नहीं देखा जा

सकता है। इसे देखने के बाद वैज्ञानिकों ने बताया है कि ऐसे अणुओं का आपस में टकराना

कैसा होता है। इस दौरान कैसी प्रतिक्रियाएं होती हैं। इस शोध से जुड़े दल के नेता मारविन

वेइलैंड ने इस बारे में औपचारिक जानकारी भी दी है। उनके मुताबिक इसका पता लग

जाने के बाद खास किस्म के रसायनों के बीच भी प्रतिक्रिया को नियंत्रित और निर्देशित

कर पाना अब संभव होगा।

छोटे से उपकरण के अंदर किया गया है यह प्रयोग

इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक छोटे से इलाके में शून्य जैसी

परिस्थिति पैदा की थी, जहां कोई गुरुत्वाकर्षण नहीं था। इसके अंदर होने वाली

गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लेजर बीम को स्थिर किया गया था। इसी छोटे से

परीक्षण के तहत तीन अणु के मिलने की घटना को देखा जा सका। वैज्ञानिकों ने इस

परिस्थिति में एक केल्विन के एक लाखवां हिस्सा ताप भी उत्पन्न होते हुए देखा। इस

काम को कर पाना उतना आसान भी नहीं था क्योंकि किसी एक अणु को अलग करना

अपने आप में बड़ी वैज्ञानिक चुनौती थी। इस काम को वैज्ञानिकों ने लेजर आधारित

उपकरण के माध्यम से ही किया था। तब जाकर यह पूरी प्रक्रिया देखी जा सकी। खास

लेजर उपकरण से अणु को अलग करने के लिए भी उनका तापमान बहुत कम करना पड़ा

था। तब जाकर आहिस्ते से एक अणु को इस प्रयोग स्थान के अंदर रखा जा सका था।

जिस धातु के अणु पर ऐसे परीक्षण किये गये वे रुबिडियम प्रजाति के थे। ऐसे पदार्थ

डाइरुबिडियम के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। इनके दो अणु मिलकर ही एक मॉलिक्यूल बना

लेते हैं जबकि तीन के होने से यह रसायन बन जाता है। दो अणु को एक तरफ और तीसरे

को अलग रखने के बाद इनके मिलने की प्रक्रिय को नियंत्रित करने में सफलता मिली है।

इस पूरी प्रक्रिया को एक खास कैमरे की नजर से भी दर्ज किया गया ताकि पूरी प्रक्रिया को

बाद में धीमी गति से भी देखा जा सके।

क्वांटम फिजिक्स के इस प्रयोग के सफल होने के बाद वैज्ञानिक उपकरणों की डिजाइन में

अणु आधारित बदलाव की उम्मीद के साथ साथ यह तय माना जा रहा है कि क्वांटम

कंप्यूटिंग के क्षेत्र में इससे काफी परिवर्तन होंगे और पूरी कंप्यूटिंग पद्धति की बदलने के

साथ साथ अत्यंत तेज हो जाएगी।

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