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क्वांटम कंप्यूटिंग की दुनिया में जॉन मार्टिनी ने तैयार की नई डिजाइन

  • कंप्यूटर की दुनिया को बदलकर रख देगा गूगल का नया आविष्कार
  • सुपर कंप्यूटर से बहुत तेज पर आकार में छोटा
  • एक छोटे चिप में समाया है अत्यधिक आंकड़ा
  • इसमें अभी और आंकड़ा संग्रह जोड़ने की तैयारी
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः क्वांटम कंप्यूटिंग वर्तमान दौर के सबसे चर्चित विषय है। इसमें अब

नई कड़ी जुड़ने जा रही है।  गूगल के पदार्थ विज्ञान के एक वैज्ञानिक जॉन मार्टिनी

ने यह कमाल कर दिखाया है। गूगल के आर्टिफिसियल इंटैलिजेंस की टीम और

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय संता बारबरा के वैज्ञानिकों ने इसमें सहयोग किया है।

पदार्थ विज्ञान के क्वांटम मैकानिक्स के सिद्धांत पर काम करने वाला यह यंत्र

पूरी कंप्यूटर की दुनिया को बदल सकता है। प्रारंभिक परीक्षण में जब इस

मशीन की जांच की गयी तो यह अब तक का सबसे तेज काम करने वाले सुपर

कंप्यूटर से भी काफी तेज साबित हुआ।

इस बारे में नेचर जर्नल में एक लेख प्रकाशित किया गया है। जिसमें बताया गया है

कि मशीन की डिजाइन ने एक ऐसे कठिन सवाल को साढ़े तीन मिनट में हल किया,

जिसे वर्तमान दौर के कंप्यूटरों को साधने में दस हजार  साल लग सकते थे। इससे

साबित हो जाता है कि यह मशीन आने वाले दिनों में वैज्ञानिक गणना के काम आने

वाली है। इससे कंप्यूटर जगत में एक नई क्रांति होने जा रही है।

इस डिजाइन को गूगल का साइकामोर प्रोसेसर बताया गया है। इस नई मशीन के

आने के बाद कंप्यूटर की दुनिया का चेहरा भी बदल सकता है क्योंकि जब एक मशीन

इतनी सारी गणनाओं को चुटकी बजाते कर लेगी तो क्लाउंड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में इसका

अधिकाधिक प्रयोग बढ़ेगा। इससे पारंपरिक कंप्यूटरों का इस्तेमाल घटता चला जाएगा।

इसे गूगल के साथ साथ अमेरिका के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर आंका जा

रहा है। इसके बारे में नासा की वेबसाइट में कुछ जानकारियां लीक हो गयी थीं।

लोगों का ध्यान इस तरफ आकृष्ट होते ही इसे तुरंत ही वेब साइट से हटा दिया गया था।

उसके बाद अब जाकर यह शोध प्रबंध लोगों के सामने आया है।

क्वांटम कंप्यूटिंग का प्रारंभिक परीक्षण से तेज गति का पता चला

इस परीक्षण के सफल होने के बाद कैलटेक्स के वैज्ञानिक जॉन प्रेस्कील ने कहा कि

जिन तथ्यों पर अब तक  सैद्धांतिक तौर पर चर्चा होती थी। अब उनके क्रियाशील होने

का जमाना आ रहा है। इस एक डिजाइन के बाद  क्रमवार तरीके से इसमें नये नये आयाम जुड़ते चले जाएंगे।

वैसे इस नये शोध की जानकारी सामने आने के बाद गूगल के प्रतिस्पर्धी भी इस दिशा में

तेज काम कर रहे हैं। समझा जा रहा है कि आइबीएस भी इसी तकनीक पर अपनी तरफ

से क्वांटम मशीनों को विकसित कर रहा है। जिसके बारे में अब तक औपचारिक तौर पर

कोई जानकारी नहीं दी गयी है। शोध प्रबंध के प्रकाशित होने के बाद गूगल के प्रमुख

सुंदर पिचाई ने इसे कंप्यूटर की दुनिया का नया मील का पत्थर बताया है। इस पद्धति

के बारे में बताया गया है कि इसमें आणविक स्तर पर कण एक स्थान से दूसरे स्थान तक

ऊर्जा पहुंचाते हैं। चूंकि यह काम अत्यंत तेज गति से होता है इसलिए इस पर आधारित

सारे काम तेज होने लगते  हैं।

आणविक स्तर पर काम होने की वजह से आकार भी छोटा

कंप्यूटर के काम में इसमें कैसे तेजी आ सकती है, इस बारे में जानकारों ने सरलता के

साथ जानकारी दी है।  प्रथम युग के कंप्यूटर सिर्फ बिट्स पर काम करते थे, जो किसी

एक विद्युतीय अथवा ऑप्टिकल पल्स पर आधारित थे। इस एक बिट में या तो

शून्य होता था अथवा 1। बाद में इसमें और क्रमिक सुधार होता चला गया। उस दौर के

प्रथम कंप्यूटर फ्लॉपी डिस्क में 242944 बाइट डाटा स्टोर किये जा सकते थे।

लेकिन आज के दौर में एपल का आइ फोन 11 अपने दर 64 खरब बाइट संजो सकता है।

इस तरीक से जैसे जैसे मशीनें छोटी होती चली गयी, वैसे वैसे आंकड़ों को संरक्षित करने

का यंत्र भी विकसित होने के बाद निरंतर छोटा होता चला गया है। वर्तमान दौर में जब

सुपर कंप्यूटर तैयार किये गये तो उनका आकार दो टेनिक कोर्ट के जितना था।

इसमें काफी आंकड़ों की एक साथ गणना और विश्लेषण  के साथ साथ उन्हें संरक्षित

करने का काम हो सकता था। लेकिन अब क्वांटम पद्धति में यह काम सिर्फ 0 और 1 पर

ही आधारित नहीं होगा।

इसमें नये आयाम जुड़ने की वजह से एक बिट में कई संख्या एक साथ जोड़े अथवा

विश्लेषित किये जा सकते हैं। इसी वजह से मशीन के काम करने की गति इतनी

तेज हो पायी है।

इस पद्धति में डाटा रखने को क्वांटम बिट अथवा क्यूबिट कहा जाता है।

लेकिन इसी क्रम में इसका आकार भी काफी छोटा हो चुका है।

वैसे वैज्ञानिक मानते हैं कि अभी यह मशीन प्रारंभिक अवस्था में हैं, जहां यह किसी

भी गणना संबंधी गड़बड़ी को खुद दुरुस्त नहीं कर सकता।

ऐसी स्थिति होने पर मशीन के अंदर हल्की आवाज सुनायी देगी और वह गर्म होकर

बंद भी हो सकती है।

गूगल के वैज्ञानिक इसकी क्षमता बढ़ाना भी चाहते हैं

जिस मशीन के बारे में गूगल द्वारा जानकारी दी गयी है उसमें मशीन के अंदर उपर

उल्लेखित 54 क्यूबिट की गणना की जा सकती है। इसके चिप को ठंडा रखने के लिए

उसे एक फ्रीज के अंदर रखा गया है, जिसके अंदर का तापमान लगभग शून्य होता है।

इससे मशीन का काम अत्यंत तेज गति से चलता रहता है।

मजेदार बात यह भी है कि यह सारा आंकड़ा मशीन के अंदर एक छोटे से सिलिकॉन चिप

में संग्रहित होता है। इस संरचना की वजह से भी इसके आकार को कम किया जा सका है।

प्रारंभिक परीक्षण में कई तकनीकी गड़बड़ी सामने आयी है। इस परियोजना से जुड़े

वैज्ञानिक उन तकनीकी गड़बड़ियों को सुधारने का काम कर रहे हैं। पता चला है कि यह

काम पहले भी पूरा किया जा सकता था। लेकिन वहां की जंगलों में लगी आग की वजह

से यहां की प्रयोगशाला को बंद करना पड़ा था।

इस वजह से काम में विलंब हुआ है। प्रारंभिक परीक्षण के दौर से गुजरने के बाद वैज्ञानिक

इसकी चिप संरचना  में एक हजार क्टूबिट का आंकड़ा जोड़ना चाहते हैं।

इससे इस क्वांटम कंप्यूटर के काम करने की गति और तेज हो जाएगी।

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