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पुष्पराज जैन भाया पीयूष जैन अभी छापामारी राजनीति जारी है




चुनावी चकल्लस

  • यानी भाजपा फिर से पश्चिम बंगाल की चाल चल रही है
  • इत्र कारोबारी के यहां से दो और नाम मिलने की चर्चा
  • पीयूष के केस को कमजोर कर दिया जांच एजेंसियों ने
  • अब पहली छापामारी की चर्चा मंचों से नहीं हो रही है
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पुष्पराज जैन के यहां अंततः छापा पड़ा है। यह तो पहले ही स्पष्ट हो गया था कि जांच एजेंसियों को इसी समाजवादी नेता और इत्र के कारोबारी पर छापा मारना था। नाम का पहला अक्षर, पदवी और मुहल्ला एक होने की वजह से तीर दूसरे निशाने पर जा लगा।




वहां से माल की बरामदगी का तुरंत ही भाजपा ने जबर्दस्त तरीके से प्रचार किया। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इस भ्रष्टाचार के बहाने समाजवादी पार्टी पर हमला किया। जब यह पता चला कि जिसपर यह सारी बयानबाजी हो रही है, वह दरअसल पीयूष जैन हो तो मामला जितनी तेजी से पर्दे पर आया उससे अधिक तेजी से पर्दे से गायब हो गया।

अब तो यह पता चल रहा है कि जांच एजेंसियों ने भी यह कह दिया है कि वहां से बरामद पैसा कोई कालाधन नहीं है बल्कि व्यापार का पैसा है और उसमें सिर्फ कर की चोरी की गयी है। दूसरी तरफ पीयूष जैन ने पहले ही अदालत से कर और दंड का भुगतान कर शेष रकम वापस मांगी है।

लेकिन अजीब बात यह है कि उसके यहां से बरामद विदेश सोना के बारे में भी अब सरकारी एजेंसियों ने अचानक से चुप्पी साध ली है। इस बात की भीचर्चा हो रही है कि जब पीयूष जैन के यहां छापा पड़ा तो सरकारी अफसरों ने ही बरामद धन की तस्वीरें गुप्त तरीके से मीडिया को उपलब्ध करा दी जबकि पुष्पराज जैन के यहां की छापामारी की कोई तस्वीर अंदर से नहीं आयी है।

पुष्पराज जैन के यहां छापा पड़ा पर तस्वीर नहीं आयी

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी से जुड़े इत्र कारोबारी पुष्पराज जैन के यहां हुई छापामारी से कुछ अन्य ठिकानों का पता चलने की बात सामने आयी है। वैसे औपचारिक तौर पर इस बारे में कोई बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए यह कह पाना कठिन है कि क्या कुछ हुआ है।

सिर्फ इस बात की जानकारी मिली है कि पुष्पराज जैन उर्फ पंपी के यहां छापामारी के साथ साथ देश भर के पचास अन्य ठिकानों पर भी छापे पड़े हैं। इनमें दिल्ली और मुंबई के व्यापारिक केंद्र भी शामिल हैं। इस सपा विधान पार्षद के पास इत्र के कारोबार के अलावा पेट्रोल पंप, कोल्ड स्टोरेज भी है।




दरअसल समाजवादी इत्र को लांच कर वह राजनीतिक चर्चा में आ गये थे। अब तो यह भी स्पष्ट हो गया है कि उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव के पूर्व छापा दरअसल उनके यहां ही पड़ना था लेकिन गलती से अथवा जानबूझकर इस टीम को पीयूष जैन के यहां छापा मारना पड़ा।

समाजवादी पार्टी ने भी इस कार्रवाई पर स्वाभाविक तौर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने कहा है कि पिछली बार भाजपा का निशाना गलत हो गया था। इसलिए अब आयकर विभाग को पुष्पराज जैन के यहां भेज दिया गया है। इसके साथ ही कई अन्य कारोबारियों पर भी छापा पड़ा है। जिससे यह साफ हो जाता है कि केंद्र सरकार चुनाव के मौके पर केंद्रीय एजेसियों का कैसे दुरुपयोग कर रही है। सपा की तरफ से यह भी कहा गया है कि राज्य की जनता इन सारी घटनाओं को देख समझ रही है।

सपा ने सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप मढ़ा

वे चुनाव में इन हरकतों का जवाब देंगे। दूसरी तरफ भाजपा वाले इसे सपा का काला कारोबार बता रहे हैं। लेकिन इसके बीच ही पीयूष जैन का मामला भाजपा के गले में अटक गया है। इस रस्साकस्सी के बीच ही शिवपाल यादव ने कहा है कि जब जब चुनाव आता है, तो छापे मारने वाले अधिकारियों का गाड़ियों पर लिख दिया जाता है- ऑल इलेक्शन ड्यूटी।

तो ये तो इलेक्शन ड्यूटी पर हैं। वह अपना काम कर रहे हैं। अगर वे प्रफेशनली करना चाहते थे तो चुनाव से ठीक पहले यह छापे क्यों मारे जा रहे हैं? इससे पहले क्या इनकम टैक्स विभाग सो रहा था। अब लग रहा है कि सत्ता खिसक नहीं है, तो इससे कोई डरेगा? जब जब ज्यादतियां जहां-जहां हुई हैं, सत्ता में बैठे हुए लोग सत्ता से बाहर हुए हैं।

हमने 77 को भी देखा है और जगह भी देखा है। ये एजेंसियां दबाव में भी काम कर रही हैं। कितना परेशान किया ममता को? मुंह की खानी पड़ी। यहां भी खानी पड़ेगी। इसलिए बयानबाजी के दौर में पुष्पराज जैन भाया पीयूष जैन की छापामार गाड़ी भाजपा को कोई फायदा पहुंचा सकेगी या नहीं यह देखना रोचक होता जा रहा है।



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