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पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य ने कहा चीन ने प्रकृति के नियमों की अनदेखी की

बरेलीः पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि चीन ने

प्रकृति के नियमों की अनदेखी की जिसका परिणाम है कोरोना, जो कई देशों तक पहुंच

चुका है। उन्होंने कहा कि अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो वह अर्थ शक्ति के लिए लड़ाई

जाएगा। भारत में अपार संपदा और खनिज के भंडार हैं इसीलिए अमेरिका और चीन के

लिए बड़ा बाजार है। भारत में उत्पादन की तमाम संभावनाओं को अनदेखा किया जा रहा

है। धर्म चैतन्य सभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में निश्चलानंद ने राजनीति और संतों

की स्थिति जैसे कई पहलुओं पर बात करते हुए देश के भविष्य पर चिंता जताई। उन्होंने

कहा कि अपार मेधा और संपदा होते हुए भी राजनीतिक दलों ने शोषण को शाश्वत

अधिकार मानकर भारत को दिशाहीन बना दिया है। ऐसा न होता तो भारत में अब भी पांच

वर्षों के अंदर पूरे विश्व में सबसे समृद्ध और शक्तिशाली बनने की क्षमता है। उन्होंने कहा

कि भारत की अपार संपदा और मेधा का उपयोग ही नहीं किया जा रहा है। अदूरदर्शिता से

ही समाज दिशाहीन हो गया है। परिवार, राज्य, देश, समाज, सांस्कृतिक मूल्यों का निरंतर

पतन हो रहा है। सरकारें युवाओं को कामगार बनाने के बजाय मुफ्तखोरी सिखा रही हैं।

अर्थनीति ठीक न होने से बैंक बंद हो रहे हैं। देश में भ्रष्टाचार चरम पर है। कल्याणकारी

योजनाओं में दलाली हावी है। खान-पान की सामग्री विषाक्त हो चुकी है।

पुरी पीठाधीश्वर ने मठ मंदिरों की राजनीति को गलत बताया

मठ-मंदिरों में भी राजनीति का वातावरण है। संत राजनेता बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि

अंग्रेज सैकड़ों साल शासन करने के बाद भी जिस भारत को पूरी तरह नहीं लूट पाए, वह

काम अब किया जा रहा है। संसद को देश को दिशा देने के साथ सर्वाधिक मर्यादित होना

चाहिए किंतु वहां राजेनता गाली गलौज करते हैं। राजनीति में संतों के प्रवेश पर एक प्रश्न

के उत्तर में शंकराचार्य ने कहा कि संत किसी के सामने झुकता नहीं बल्कि मार्गदर्शन

करता है। वैदिक काल में संतों ने कभी देश पर राज नहीं किया, राजाओं का मार्गदर्शन

किया। योगी आदित्यनाथ संत नहीं बल्कि भेषधारी संत है। वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के

सामने झुकते हैं, उनके आदेश मानते हैं। वह संत नहीं पार्टी के कार्यकर्ता बनकर सेवा कर

रहे हैं। राजनीति में संतों का आना उचित नहीं कहा जा सकता।


 

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