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आदिवासियों की समस्त उपज खरीदेगा ट्राईफेड

नयी दिल्ली :आदिवासी उत्पाद विकास एवं विपणन महासंघ- ट्राईफेड ‘ को आदिवासियों

की समस्त वनोपज खरीदने के निर्देश दिये हैं। मंत्रालय ने सोमवार को यहां बताया कि

आदिवासी समाज का बहुत बड़ा हिस्सा अपनी आजीविका के लिए वनोपज पर निर्भर है ।

कोरोना महामारी के संकट को देखते हुए आदिवासी समाज वनोपज की बिक्री नहीं कर पा

रहा है । इसके लिए राज्यों को वन उपज खरीदने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बाद

आदिवासी किसानों , शिल्पकारों और कलाकारों के पास बची वस्तुओं को ट्राइफेड

खरीदेगा। सरकार के इस फैसले से आदिवासी समाज में तकरीबन 23 करोड़ रूपये का

अतिरिक्त वितरण होगा।

आदिवासियों की मदद करने के लिए ट्राईफेड कॉर्पोरेट कंपनियों

ट्राईफेड कॉर्पोरेट कंपनियों उद्योग संगठनों , गैर सरकारी संगठन और अन्य सामाजिक

संगठनों से संपर्क कर रहा है और उन्हें आदिवासी उत्पाद तथा वन उपज खरीदने के लिए

प्रोत्साहित कर रहा है। आदिवासी उत्पादों का इस्तेमाल दिन प्रतिदिन की आवश्यकताओं

के अलावा सजावट, उपहार देने तथा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में किया जा सकता है।

राज्यों ने लघु वन उत्पादों की खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है और 10 राज्यों में परिचालन

शुरू भी हो गया है। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए अभी तक कुल 20।30 करोड़ रुपये की

खरीद हो चुकी है। कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुए मुश्किल हालात को देखते हुए

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 49 उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में

संशोधन की घोषणा की है।

लघु वन उत्पाद की खरीद के लिए राज्य स्तर पर गतिविधियों की सूचना दिए जाने को

एक आॅनलाइन निगरानी डैशबोर्ड तैयार किया गया है। प्रत्येक पंचायत और वन धन

केन्द्र से या तो मेल से या मोबाइल के माध्यम से सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए

‘‘ट्राइफेड ई- सम्पर्क सेतु’’ के तहत एक वन धन निगरानी डैशबोर्ड तैयार किया गया है।

ट्राइफेड ने इसे 10 लाख गांवों, जिलों और राज्य स्तर के भागीदारों, एजेंसियों तथा स्वयं

सहायता समूह को जोड़ने का प्रस्ताव किया है। राज्यों ने हाट बाजारों से एमएफपी की

खरीद के लिए वन धन केन्द्रों को उनका प्राथमिक खरीद एजेंट नियुक्त कर दिया है। वन

धन केन्द्रों 1।11 करोड़ रुपये मूल्य के 31।35 टन एमएफपी की खरीद की है। वन धन

केन्द्र योजना देश के जनजातीय बहुल जनसंख्या वाले 22 राज्यों में लागू है और इससे

लगभग 1।1 करोड़ जनजातीय परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है।


 

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